पाकिस्तान में सैन्य ठिकाने क्यों बनाना चाहता ड्रैगन?
इस्लामाबाद, 20 मईः चीन, पाकिस्तान में सैन्य चौकियों का निर्माण करने के लिए सरकार पर दबाव बना रहा है। हालिया समय में पाकिस्तान में काम कर रहे चीनी नागरिकों पर हमले को रोकने के लिए चीन यह प्रयास कर रहा है। कराची, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई), चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) परियोजनाओं के स्पॉन्सरशिप में किए जा रहे कई परियोजनाओं पर पाकिस्तान में हजारों चीनी कर्मचारी काम कर रहे हैं। चीन नहीं चाहता कि उसकी इन परियोजनाओं में कोई खलल पड़े।

बीते महीने चीनी नागरिकों पर हुआ हमला
बीते महीने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) आतंकवादी समूह की एक महिला आत्मघाती हमलावर ने कराची विश्वविद्यालय परिसर में एक वैन के पास खुद को उड़ा लिया था, जिसमें तीन चीनी नागरिक और उनके पाकिस्तानी ड्राइवर की मौत हो गई। इसके बाद चीन ने पाकिस्तान में मंदारिन सीखा रहे शिक्षकों को वापस अपने देश बुलाने का आदेश दिया था। चीन लंबे समय से अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा की मांग कर रहा है। वह उन जगहों पर विशेष नजर बनाए रखे हुए है जो पहले शीत युद्ध या उसके बाद अमेरिका के प्रभाव में थे।

बीएलए दे रहा चीन को चुनौती
सूत्रों के मुताबिक चीन सीपीईसी परियोजनाओं से अर्जित कर्ज को वापस लेने का वादा करके पाकिस्तान को मनाने की कोशिश कर रहा है, जो कि आर्थिक संकट के कारण लंबे समय से नकदी की कमी से जूझ रहा पाकिस्तान मांग रहा था। पाकिस्तान का सहयोगी चीन अशांत बलूचिस्तान में विशेष रूप से बीएलए द्वारा बढ़ती प्रतिक्रिया का सामना कर रहा है। ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से लगा बलूचिस्तान लंबे समय से चल रहे हिंसक विद्रोह का घर है। बलूच विद्रोही समूहों ने पहले भी 60 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) परियोजनाओं को निशाना बनाकर कई हमले किए हैं।

भारत जता चुका है विरोध
60 बिलियन डॉलर की यह 3000 किलोमीटर लंबा मार्ग वाला महत्वाकांक्षी सीपीईसी परियोजना, चीन के उत्तर-पश्चिमी झिंजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र और पश्चिमी पाकिस्तान प्रांत बलूचिस्तान में ग्वादर पोर्ट को जोड़ती है। सीपीईसी को लेकर भारत ने चीन के सामने विरोध जताया है क्योंकि इसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के जरिए ले जाया जा रहा है।












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