भारत में बहुत बड़ी जासूसी का खुलासा, डिफेंस, टेलीकॉम समेत भारत सरकार के विभागों को किया गया टारगेट
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका स्थिति रिकॉर्डेड फ्युचर ने कहा है कि भारत में बड़े पैमाने पर जासूसी करने की कोशिश की गई है और कई अहम सैन्य जानकारियां हासिल करने की कोशिश की गई है।
नई दिल्ली, जून 18: पिछले साल गलवान घाटी में भारतीय सेना से पिटने के बाद चीन की सेना भारत के खिलाफ बहुत बड़ा जासूसी करवा रही है और रिपोर्ट है कि चीनी सेना के जासूसों ने भारत के कई अहम ठिकानों को टारगेट करने की कोशिश की है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सेना के जासूस भारत में एयरोस्पेस, डिफेंस, भारत सरकार, खनन और टेक्नोलॉजी संगठन को टारगेट पर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक रेडफॉक्सट्रॉट चीनी सेना के कहने पर भारत के अहम प्रतिष्ठानों को टारगेट पर ले रही है।

निशाने पर भारत के प्रतिष्ठान
रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से ही रेडफॉक्सट्रॉट भारत में सक्रिय है और चीनी सेना पीएलए के लिए काम कर रही है और पीएलए के यूनिट 69010 से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अलावा अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान हैं। भारत पर चीनी सेना द्वारा किए गये साइबर अटैक का खुलासा रिकॉर्डेड फ्युचर ने किया है, जो दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट सुरक्षा संस्थान है और इंटरनेट की दुनिया को लेकर खुफिया जानकारियां उपलब्ध करवाता है। गुरुवार को रिकॉर्डेड फ्युचर ने कहा है कि पीएलए ने भारत के अहम प्रतिष्ठानों को निशाने पर लेने की कोशिश की है और इस काम के लिए रेडफॉक्सट्रॉट को जिम्मेदारी दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक रिकॉर्डेड फ्युचर नाम रिकॉर्डेड फ्युचर के थ्रेट रिसर्च आर्म इंसिक्ट ग्रुप की तरफ से दिया गया है।
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भारत को नुकसान ?
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका स्थिति रिकॉर्डेड फ्युचर ने कहा है कि भारत में बड़े पैमाने पर जासूसी करने की कोशिश की गई है और कई अहम सैन्य जानकारियां हासिल करने की कोशिश की गई है। इसमें कहा गया है कि चीनी सेना पीएलए ने अपने सीमावर्ती देशों में बड़े पैमानों पर जासूसी करने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि भारत की संवेदनशील खुफिया जानकारियों को लेने की कोशिश की गई है, हालांकि, क्या क्या जानकारी ली गई है, इसका खुलासा नहीं हो पाया है। रेडफॉक्सट्रॉट ने भारत में जासूसी के लिए बीस्पोक और सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध मैलवेयर, दोनों का इस्तेमाल किया है।

टारगेट पर डिफेंस सेक्टर
रिकॉर्डेड फ्युचर के एक अधिकारी ने कहा है कि 'हमने पता लगाया है कि चीन के इस ग्रुप ने भारत में दो टेलीकॉम कंपनियों की जानकारियां चुरा ली हैं। इसके साथ ही पिछले 6 महीने में 3 डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर और कई सरकारी संस्थाओं से जानकारियां चुराई हैं। इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर से भी जानकारियां चुराई गई हैं।' अधिकारी ने कहा है कि 'पिछले साल जग भारत और चीन के बीच गलवान घाटी झड़प हुई है, उसके बाद चीन की पीएलए ने भारत में बहुत बड़े पैमाने पर जासूसी करने की कोशिश की है और हमने उन संस्थाओं को भी इसकी जानकारी दी है, जिन्हें निशाना बनाया गया है।'

जासूसी और चोरी में माहिर चीन
चीन के द्वारा की जा रही जासूसी को लेकर अभी तक ये नहीं पता चल पाया है कि चीन ने क्या क्या डेटा चुराया है या फिर कौन कौन सी जानकारियां ली हैं। लेकिन जासूसी और चोरी के खेल में चीन हमेशा से माहिर रहा है। इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स कई बार कह चुके हैं कि अमेरिका और यूरोप में काम करने वाली चीनी कंपनियां नई नई टेक्नोलॉजी की चोरी करते रहे हैं और उसी की बदौलत चीन ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काफी तरक्की की है। भारत सरकार ने जासूसी को लेकर ही चीन की सैकड़ों मोबाइल्स एप्स पर प्रतिबंध लगाए हैं। वहीं, इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉंस टीम ने कहा था कि उसे चीन के साइबर एक्सपर्ट्स की तरफ से भारतीय परिवहन क्षेत्र में जासूसी अभियान चलाने की जानकारी भी मिली थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि साइबर घुसपैठ में अगर चीन को कामयाबी मिलती है तो बिना युद्ध लड़े ही किसी भी देश की व्यवस्था को ठप कर सकता है।

भारतीय पावर ग्रिड पर हमला
इसी साल चीन के साइबर चोरों ने भारचीय पावर ग्रिड पर भी हमला किया था और उसका खुलासा अमेरिकन अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने किया था। अखबार ने कहा खा कि भारत को सरहद पर आक्रामक होने से रोकने के लिए चीन ने भारत के पॉवर ग्रिड पर साइबर हमला किया था और उसी वजह से पिछले साल मुंबई में पावर सप्लाई ठप पड़ गई थी। अमेरिकी अखबार ने कहा था कि मुंबई में विद्युत सप्लाई को रोकने के लिए चीन ने इंडिया के इलेक्ट्रिक सप्लाई के कंट्रोल सिस्टम में एक मैलवेयर को डाल दिया था, जिससे मुंबई में पावर सप्लाई पूरी तरह से ठप पड़ गई थी।












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