दोस्त पुतिन की खातिर चीन का प्रोपेगैंडा वार, छात्रों में भर रहा यूक्रेन के खिलाफ जहर, शिक्षक लगे काम पर

हांगकांग, 29 मार्च। भले ही रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया हो लेकिन इसी दौरान चीन ने एक सहायक प्रचार युद्ध छेड़ रखा है जो आश्चर्यजनक रूप से क्रूर है। खासतौर पर बीजिंग से होने वाली आधिकारिक घोषणाओं की जांच करें और चीनी इंटरनेट पर क्या फैलाया जा रहा है तो यह यह स्पष्ट हो जाता है कि चीन किसी भी तरह से तटस्थ नहीं है।

शिक्षकों को लगाया गया काम पर

शिक्षकों को लगाया गया काम पर

वास्तव में चीनी सरकार ने राष्ट्रपति व्लादिमीर के यूक्रेन पर आक्रमण की वजहों के बारे में छात्रों को "शिक्षित" करने के लिए एक ठोस अभियान शुरू किया है। चीन की प्रांतीय सरकारों ने विश्वविद्यालयों में रूस पर यूक्रेन के हमले को सही साबित करने वाले व्याख्यानों में शिक्षकों की सामूहिक रूप से उपस्थिति को अनिवार्य किया है।

ये ऐसे ही नहीं कहा जा रहा है। दरअसल दाक़िंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर एक तस्वीर में शिक्षकों को यूक्रेन की स्थिति नाम के शीर्षक वाले इस तरह के एक अध्ययन में भाग लेते दिखाया गया है। खासतौर पर जब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी इसे आक्रमण या युद्ध कहने से इनकार कर रही है।

सीसीपी के अनुसार सही राजनीतिक स्थिति यह है कि रूसी सैन्य कार्रवाई वैध है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी इसे नाटो, यूएसए और यूक्रेन की गलती है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूली बच्चों को भी बताया जा रहा था कि किस पर विश्वास किया जाए।

छात्रों को क्या बताया जा रहा?

छात्रों को क्या बताया जा रहा?

"रूस ने यूक्रेन में सेना क्यों भेजी?" इस तरह के सवालों की स्लाइड चीन में इंटरनेट पर फैले हुई है जिसमें यूक्रेन के बारे में यह बताया जाता है कि यूक्रेन भ्रष्ट है, जातीय विभाजन से भरा हुआ है। इसमें यह भी कहा गया है कि यूक्रेन ने रूसी भाषी अल्पसंख्यकों की हत्याएं की हैं और रूस से नफरत करता है।

इसमें दूसरी प्रमुख बात है कि यूक्रेन की सामूहिक विनाश के हथियार बनाने और नाटो में शामिल होने की योजना है। चीनी प्रचार तंत्र इंटरनेट पर यह फैलाने में जुटा है कि नाटो के पूर्व की ओर विस्तार ने रूस को इस तरह के कार्य (हमले) के लिए मजबूर होना पड़ा है।

चीनी प्रोपेगैंडा का तीसरे प्रमुख हिस्से में यह बताया जाता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका मुख्य अपराधी है क्योंकि यह यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति करता है, यूरोप में विभाजन की खेती कर रहा है और रूस को उकसा रहा है। इसका अंतिम बिंदु यह है कि रूस ने सभी राजनयिक प्रयास कर लिए और अंततः पुतिन को मजबूर होना पड़ा जिसकी नीति कहती है कि 100 मुठ्ठियों से मुक्का मारने से बचने के लिए पहले मुक्का मारें।

पोल खुली तो हटाई जा रही सामग्री

पोल खुली तो हटाई जा रही सामग्री

दिलचस्प बात यह है कि चीनी सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ने वाले इन ट्यूटोरियल के दस्तावेज़ और नोटिस अचानक हटा दिए गए थे जब अधिकारियों ने महसूस किया कि सीसीपी के राष्ट्रव्यापी "शिक्षा अभियान" की कलई खुल रही है।

यहां यह बात ध्यान देने की है कि बीजिंग जोर देकर कहता है कि रूसी आक्रमण पर उसकी स्थिति वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष है। हालांकि, सच्चाई और तथ्य यह है कि चीनी सरकार रूसी प्रचार और दुष्प्रचार के जरिए छात्रों के बीच नैरेटिव बनाने में सख्ती से जुटी हुई है।

सब प्रचार में साथ नहीं

सब प्रचार में साथ नहीं

हालांकि चीन की पूरी कोशिश के बावजूद ऐसा नहीं है कि सब उसके प्रोपेगैंडा में फंस रहे हैं। एक अध्ययन सत्र में एक व्याख्याता के ऑनलाइन नोट्स सामने आया है जिसमें कहा गया है कि रूस फंस गया है। रूस के पास संख्याबल तो ज्यादा है लेकिन विज्ञान और तकनीक में कमजोर है और यह पश्चिम की उच्च तकनीक और हथियार का मुकाबला नहीं कर सकता। इसमें यह भी कहा गया है कि रूस ने यूक्रेन की इच्छाशक्ति को कम करके आंका।

यह दिखाता है कि सीसीपी के मजबूत प्रचार के बावजूद कुछ लोग हैं जो सच्चाई को समझते हैं। हालांकि चीन का विदेश मंत्रालय उसी तरह से कांस्पिरेसी थ्योरी को फैलाना जारी रखे हैं जैसे कि उसने कोविड-19 के दौरान बनाया था था कि कोरोना वायरस अमेरिकी लैब में तैयार हुआ।

यूक्रेन पर रूसी हमले को सही साबित करने के प्रोपेगैंडा में शामिल एक ली यांग है जो मंत्रालय के सूचना विभाग में काउंसलर और ब्राजील वाणिज्य दूतावास में काउंसल जनरल रहा है। ली ने कई ट्वीट किए हैं जिनमें एक यह भी है कि "मुख्य बिंदु यह है कि यह युद्ध अमेरिका की जरूरत है इसलिए हम इस युद्ध को देख रहे हैं।"

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