CPEC का नाम बदलने को तैयार चीन, लेकिन दूतावास की वेबसाइट ने बढ़ाया कनफ्यूजन!

भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने के मकसर से चीन की ओर से दिया गया था चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का नाम बदलने का प्रस्‍ताव। भारत को वन बेल्‍ट वन (ओबीओआर) का हिस्‍सा बनाना चाहता है चीन।

बीजिंग। अगले हफ्ते से वन बेल्‍ट वन रोड (ओबीओआर) पर एक समिट चीन की ओर से शुरू होने वाली है। इस समिट से पहले चीन ने भारत को इस समिट का हिस्‍सा बनाने के मकसद से चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (सीपीईसी) का नाम तक बदलने की पेशकश की थी। ओबीओआर, चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग का फेवरिट प्रोजेक्‍ट है और चीन चाहता है कि भारत इसका हिस्‍सा बने।

CPEC का नाम बदलने को तैयार चीन, लेकिन दूतावास की वेबसाइट ने बढ़ाया कनफ्यूजन!

चीनी राजदूत का प्रस्‍ताव

चीन की ओर से यह पेशकश भारत में चीन के राजदूत लुओ झाओहुई के जरिए हुई थी। शुक्रवार को बंद दरवाजे के पीछे हुए संबोधन के बाद इस ऑफर को चीनी दूतावास की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया गया। सोमवार की शाम तक हालांकि झाओहुई के भाषण से इस पेशकश वाले अंश को हटा दिया गया था। वर्ष 2013 में चीन के राष्‍ट्रपति जिनपिंग की ओर से चीन के यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ने वाले प्रोजेक्‍ट ओबीओआर का ऐलान किया गया था। एक अनुमान के मुताबिक इस प्रोजेक्‍ट को 900 बिलियन डॉलर की जरूरत होगी और इसके जरिए बंदरगाह, गैस पाइपलाइन और हाई स्‍पीड रेल नेटवर्क को आपस में जोड़ा जाएगा। ओबीओआर दरअसल सीपीईसी का ही हिस्‍सा है और इसमें हाइवे, रेल और एनर्जी प्रोजेक्ट्स को साथ जोड़ा गया है। इसे पहले सिल्‍क रूट का नाम दिया गया था। इस प्रोजेक्‍ट ने भारत को काफी नाराज कर दिया क्‍योंकि यह पीओके से होकर गुजरता है। चीन ने इस पर भारत की चिंताओं को जरा भी तवज्‍जो नहीं दी थी।

भारत और चीन के बीच तनाव जारी

शुक्रवार को लुओ ने सीपीईसी का नाम बदलने की पेशकश यूनाइटेड सर्विसेज इंस्‍टीट्यूशंस में दिए गए भाषण में की थी। यह पेशकश उस चार सूत्रीय पहल का हिस्‍सा थी जिसका मकसद दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा करना है। चीनी दूतावास की ओर से यह पेशकश ऐसे समय में आई थी जब दोनों ही देशों के बीच रिश्‍ते काफी तनावपूर्ण हो गए हैग्‍ं। चीन ने पिछले दिनों अरुणाचल प्रदेश की छह जगहों का नाम बदला है। इसके अलावा चीन की ओर से जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने के भारत के प्रस्‍ताव पर भी चीन ने अड़ंगा डाला हुआ है। साथ ही वह भारत की एनएसजी मेंबरशिप को लेकर भी कई अड़चने पैदा कर रहा है। इन मुद्दों की वजह से दोनों देशों में एक नया तनाव है। लुओ ने कहा था कि सीपीईसी का संप्रभुता से कोई संबंध नहीं है और इसका नाम बदलने से इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लुओ ने फिर कहा कि चीन इस प्रोजेक्‍ट का नाम बदलने के बारे में भी सोच सकता है।

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