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चीन ने अब नेपाल के राष्ट्रपति भवन में की घुसपैठ, काठमांडू में सड़कों पर उतरे लोग

नई दिल्ली- नेपाल के आंतरिक मामलों में चीन के दखल देने के बाद काठमांडू में लोगों ने सड़कों पर चाइनीज एंबेसी के बाहर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। नेपाल के विदेश विभाग के अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर खलबली मची हुई है कि बिना उनकी जानकारी में लाए एक राजनयिक राष्ट्रपति के साथ संदिग्ध बातचीत कैसे कर सकता है। क्योंकि, निर्धारित प्रोटोकॉल के मुताबिक इस तरह की कूटनीतिक बातचीत में विदेश विभाग के बड़े अफसरों की मौजूदगी बहुत ही जरूरी और इसके रिकॉर्ड रखने की भी निर्धारित प्रक्रिया है। जबसे, चीन की राजदूत हाओ यांकी के इस तरह से राष्ट्रपति और नेपाल के बाकी नेताओं से बातचीत की खबर फैली है, वहां के लोग इस बात को लेकर चीन के खिलाफ भड़क गए हैं।

चीन ने अब नेपाल के राष्ट्रपति भवन में की घुसपैठ

चीन ने अब नेपाल के राष्ट्रपति भवन में की घुसपैठ

नेपाल में सियासी बवाल के बीच चीन की राजदूत हाओ यांकी का सारे प्रोटोकॉल तोड़कर नेपाली राष्ट्रपति बिद्या भंडारी से मुलाकात करने के बाद नेपाल में बहुत बड़ा राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है। नेपाल की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यांकी सिर्फ नेपाली राष्ट्रपति भंडारी से ही नहीं मिली हैं, बल्कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल से भी मिली हैं, जिसके बाद नेपाल के अंदरूनी मामले में चाइनीज दखल की आशंकाएं बढ़ गई हैं। गौरतलब है नेपाल की सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी में बहुमत नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली के खिलाफ है और बुधवार को होने वाली कमेटी की अहम बैठक में ओली को इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ सकता है। ऐसे में पीएम ओली के बेहद निकट माने जाने वाली चीनी राजदूत का इस तरह से वहां की राष्ट्रपति और सत्ताधारी दल के एक वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल से गुपचुप मुलाकात के बाद ड्रैगन की शातिर चाल को लेकर संदेह पैदा हो गया है। क्योंकि, आरोपों के मुताबिक नेपाली पीएम ओली चीन के इशारे पर ही भारत-विरोधी कदम उठा रहे हैं।

विदेश मामलों के अधिकारियों में खलबली

विदेश मामलों के अधिकारियों में खलबली

काठमांडू पोस्ट में छपी एक खबर के मुताबिक विदेश मंत्रालय के कई अधिकारियों ने शिकायत की है कि राष्ट्रपति के दफ्तर से कई डिप्लोमेटिक कोड ऑफ कंडक्ट की खिल्ली उड़ाई जा रही है, जिससे में यह स्पष्ट निर्देश है कि राष्ट्रपति के साथ किसी भी ऐसी मुलाकात में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य है। नेपाली विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, 'डिप्लोमेटिक कोड ऑफ कंडक्ट के हिसाब से विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को ऐसी बैठकों में मौजूद रहना चाहिए, लेकिन हमें कोई सूचना नहीं दी गई.....इसलिए बैठक की कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है और हमें नहीं पता है कि किस मुद्दे पर बात हुई......' खबरों के मुताबिक यांकी और माधव कुमार नेपाल के बीच हुई मुलाकात को भी गुप्त रखा गया है। नेपाल के विदेश मामलों के विभाग के डिप्टी चीफ बिष्णु रिजल ने कहा है, 'हमारे पास नेपाल और एंबेसडर हाओ की बैठक की डिटेल नहीं है....।'

चाइनीज दूतावास के बाहर प्रदर्शन

हाल ही में जब यांकी कुछ और नेपाली नेताओं से मिली थीं तो चाइनीज दूतावास की प्रवक्ता झांग सी ने कहा था, 'दूतावास नेपाली नेताओं से अच्छा संबंध बनाए रखता है और सही समय पर सामान्य हित के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करता रहता है।' इस बीच चाइनीज एंबेसडर के बर्ताव के बाद नेपाल में चीनी दूतावास के बाहर सिविल सोसाइटी के लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन स्थानीय सिविल सोसाइटी के लोगो ने किया है। जिस तरह से चीनी राजदूत ने नेपाली नेताओं से गुपचुप मुलाकात की है, उसपर वहां खूब बवाल हो रहा है। आदित्य राज कौल नाम के एक पत्रकार ने ट्वीट कर कहा है कि यह विरोध नेपाल के आंतरिक मामलों में चीन की दखलंदाजी के खिलाफ हो रहा है।

ओली की कुर्सी बचाने की मुहिम पर लग गया ड्रैगन!

ओली की कुर्सी बचाने की मुहिम पर लग गया ड्रैगन!

गौरतलब है कि नेपाल के मामलों में चीन की दखलंदाजी ऐसे वक्त में हो रही है, जब भारत-विरोधी एजेंडा लेकर आगे बढ़ रहे नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली की कुर्सी खतरे में पड़ चुकी है। ओली के खिलाफ अपनी ही पार्टी के नेता मोर्चा खोल चुके हैं और वो नेपाली कांग्रेस के निशाने पर भी है। लेकिन, उनका आरोप है कि भारत उन्हें सत्ता से बेदखल करना चाहता है। ऐसे में संभव है कि चीन की राजदूत पीएम ओली की कुर्सी सुरक्षित रखने की मुहिम को ही आगे बढ़ा रही हों। क्योंकि, ओली ने हाल में चीन के इशारे पर भारत विरोधी ऐक्शन लेना शुरू किया है और इसलिए मौजूदा माहौल में जब पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन को भारत ने जोरदार तमाचा जड़ा है तो वह ओली जैसे सहयोगी की कुर्सी को महफूज करना चाहता है।

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