बिहार सरकार पूरा करेगी लद्दाक जाने का सपना, उठाएगी ट्रिप का खर्च, क्या है अप्लाई करने का प्रोसेस?
Sindhu Darshan Teerth Yatra Yojana: बिहार सरकार ने राज्य के लोगों के लिए एक ऐसी योजना शुरू की है, जो धार्मिक आस्था के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का भी मौका देगी। अब लद्दाख में आयोजित होने वाली सिंधु दर्शन यात्रा पर जाने वाले पात्र लोगों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाएगी। ऊंचे पहाड़ों और दूरस्थ इलाके में स्थित लद्दाख तक पहुंचने में आने वाले भारी खर्च को देखते हुए कैबिनेट ने 'सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना' को मंजूरी दी है।
इसके तहत चयनित यात्रियों को 20 हजार रुपये तक की मदद मिलेगी। खास बात यह है कि वर्ष 2026 में पहली बार सिंधु महाकुंभ का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिससे इस यात्रा का महत्व और बढ़ गया है। सरकार का मानना है कि आर्थिक सहयोग मिलने से अधिक लोग इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली यात्रा में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, इस सहायता का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी और एक साल में सीमित संख्या में ही यात्रियों को इसका फायदा मिलेगा।

कैबिनेट ने दी मंजूरी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 17 जून 2026 को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में 'सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना' को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत लद्दाख में आयोजित सिंधु दर्शन यात्रा में शामिल होने वाले लोगों को अधिकतम 20 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो यात्रा का पूरा खर्च वहन करने में कठिनाई महसूस करते हैं।
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क्या है योजना का उद्देश्य?
बिहार सरकार के अनुसार, यह पहल केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं है। इसका मकसद लोगों को भारत की सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ना भी है। सिंधु नदी को भारतीय सभ्यता की पहचान माना जाता है और इसके तट पर होने वाला सिंधु दर्शन महोत्सव राष्ट्रीय एकता तथा सांस्कृतिक मेल-जोल का संदेश देता है।
किन लोगों को मिलेगा लाभ?
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं।
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आवेदक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
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तीर्थ यात्री की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
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एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 100 लोगों को ही सहायता मिलेगी।
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योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी बिहार पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी।
कितनी मिलेगी सहायता?
विवरण जानकारी योजना का नाम सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना सहायता राशि अधिकतम 20,000 रुपये पात्रता बिहार के स्थायी निवासी न्यूनतम आयु 18 वर्ष वार्षिक लाभार्थी सीमा 100 तीर्थ यात्री इस बार क्यों खास है सिंधु दर्शन यात्रा?
सिंधु दर्शन यात्रा का आयोजन कई वर्षों से किया जा रहा है, लेकिन वर्ष 2026 का आयोजन विशेष माना जा रहा है। इसकी वजह लद्दाख में प्रस्तावित पहला सिंधु महाकुंभ है। यह कार्यक्रम 22 जून से 27 जून 2026 के बीच लेह में आयोजित होने वाला है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु, संत और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।
सिंधु नदी का सांस्कृतिक महत्व
भारतीय इतिहास और संस्कृति में सिंधु नदी का विशेष स्थान रहा है। लद्दाख के सिंधु घाट पर आयोजित कार्यक्रमों में अलग-अलग राज्यों से लोग पहुंचते हैं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में हिस्सा लेते हैं। इस आयोजन को अक्सर 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना से भी जोड़ा जाता है। हाल के वर्षों में हुए सिंधु दर्शन महोत्सवों में भी देशभर से बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली है।
2019 में अलग बना था लद्दाख
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पेश किया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया। यह व्यवस्था 30 अक्टूबर 2019 की रात 12 बजे से लागू हुई।
नई व्यवस्था के तहत जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, जबकि लद्दाख बिना विधानसभा और विधान परिषद वाला केंद्र शासित प्रदेश बना। पुनर्गठन के बाद जम्मू-कश्मीर में 20 जिले और लद्दाख में 2 जिले शामिल किए गए। साथ ही केंद्र के 106 कानून इन दोनों क्षेत्रों में लागू हुए और राज्य के 153 पुराने कानून समाप्त हो गए।
कहां स्थित है लद्दाख?
लद्दाख भारत के सबसे उत्तरी हिस्से में स्थित केंद्र शासित प्रदेश है। इसके पूर्व में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान की सीमा लगती है। लेह इसकी राजधानी है। समुद्र तल से 11 हजार से 18 हजार फीट तक की ऊंचाई पर बसे इस क्षेत्र को 'लैंड ऑफ हाई पासेस’ के नाम से भी जाना जाता है।
लद्दाख कैसे पहुंच सकते हैं?
लद्दाख पहुंचने के लिए हवाई और सड़क, दोनों विकल्प मौजूद हैं।
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दिल्ली से लेह के लिए सीधी उड़ान उपलब्ध है।
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फ्लाइट से यात्रा में करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है।
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चंडीगढ़, जम्मू और श्रीनगर से भी नियमित उड़ानें संचालित होती हैं।
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मनाली-लेह मार्ग लगभग 470 किलोमीटर लंबा है।
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श्रीनगर-लेह मार्ग की दूरी करीब 420 किलोमीटर है।
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बाइक और रोड ट्रिप पसंद करने वाले यात्रियों के बीच ये दोनों रास्ते काफी लोकप्रिय हैं।
घूमने का सबसे अच्छा समय
लद्दाख घूमने के लिए मई से सितंबर का समय सबसे अनुकूल माना जाता है। इस दौरान बर्फ काफी हद तक पिघल चुकी होती है और सड़कें भी खुली रहती हैं। मौसम साफ होने के कारण पैंगोंग झील, नुब्रा वैली और खारदुंग ला जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान होता है।
जून और जुलाई को यहां का पीक टूरिस्ट सीजन माना जाता है। वहीं अक्टूबर से मार्च के बीच भारी बर्फबारी होती है। कई इलाकों का तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच जाता है, जिससे कई सड़क मार्ग बंद हो जाते हैं।
5 दिन की यात्रा में कितना खर्च?
यदि कोई यात्री फ्लाइट के जरिए लद्दाख पहुंचकर पांच दिन का सामान्य ट्रिप प्लान करता है, तो प्रति व्यक्ति लगभग 25 हजार से 40 हजार रुपये तक का खर्च आ सकता है। रहने, खाने और स्थानीय घूमने के खर्च के आधार पर यह राशि बदल सकती है।
वहीं लग्जरी यात्रा करने वालों का कुल बजट 80 हजार रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। दूसरी ओर, बाइक ट्रिप, साझा आवास और कैंपिंग जैसे विकल्प अपनाकर यात्रा को काफी किफायती भी बनाया जा सकता है।
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