UP Chunav 2027: प्राकृतिक खेती से यूपी के किसानों की आय होगी दुगनी? चुनाव से पहले CM योगी ने चला दांव
Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath Big Updates: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने गुरुवार (18 जून 2026) को प्राकृतिक खेती को समय की जरूरत बताया। कहा कि यह केवल खेती का एक विकल्प नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल ने खेती की लागत बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाला है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण तीनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
कानपुर में आयोजित 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला 2026' को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों से गाय आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में बेहतर स्वास्थ्य और रोगमुक्त समाज की बड़ी भूमिका होगी और इस दिशा में प्राकृतिक खेती अहम योगदान दे सकती है।

गाय आधारित प्राकृतिक खेती पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती का आधार भारतीय कृषि परंपरा है, जिसमें गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग खाद और जैविक कीटनाशक के रूप में किया जाता है। इससे खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होती है।
उन्होंने कहा कि आज किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेती की बढ़ती लागत है। रासायनिक खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि संसाधनों पर लगातार बढ़ते खर्च ने किसानों की आय को प्रभावित किया है। प्राकृतिक खेती इस समस्या का एक प्रभावी समाधान बन सकती है क्योंकि इसमें स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाता है और बाहरी इनपुट पर खर्च कम होता है।
रासायनिक खेती और बढ़ती बीमारियों पर जताई चिंता
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने दावा किया कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग का असर मानव स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब तीन दशक पहले किडनी संबंधी बीमारियों के मामले अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते थे, लेकिन आज लगभग हर क्षेत्र में ऐसे मरीज मिल जाते हैं जिन्हें डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि केवल किडनी रोग ही नहीं, बल्कि लिवर सिरोसिस, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों के मामलों में भी वृद्धि हुई है। उनका मानना है कि खाद्य श्रृंखला में रासायनिक तत्वों की बढ़ती मौजूदगी स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
किसानों को होगा आर्थिक लाभ
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती के आर्थिक पक्ष पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि किसान प्राकृतिक खेती को अपनाते हैं तो वे प्रति एकड़ लगभग 10,000 से 12,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि रासायनिक खेती में खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री पर होने वाला खर्च काफी अधिक होता है, जबकि प्राकृतिक खेती में यह लागत काफी कम हो जाती है। इससे किसानों का मुनाफा बढ़ सकता है और उनकी आय में सुधार हो सकता है।
योगी ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल लागत घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसानों को अपने उत्पादों के बेहतर दाम मिलने की भी संभावना रहती है। देश और विदेश में प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका लाभ किसानों को मिल सकता है।
गंगा किनारे और बुंदेलखंड में विशेष अभियान
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चला रही है। इसके तहत गंगा नदी के किनारे स्थित 27 जिलों और बुंदेलखंड क्षेत्र के सात जिलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया गया है।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और आवश्यक प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसान इस मॉडल को अपनाएं और रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करें। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य के 24 जिलों में प्राकृतिक खेती को लेकर उल्लेखनीय प्रगति भी देखने को मिली है, जो इस दिशा में सकारात्मक संकेत है।
बाजार और सर्टिफिकेशन की व्यवस्था होगी मजबूत
प्राकृतिक खेती को सफल बनाने के लिए बाजार व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती से तैयार होने वाले उत्पादों के प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) की प्रक्रिया को सरल बनाने पर काम कर रही है।
इसके साथ ही ऐसे उत्पादों के लिए अलग बाजार विकसित करने और उपभोक्ताओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनका मानना है कि जब किसानों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिलेगा, तभी प्राकृतिक खेती बड़े स्तर पर सफल हो सकेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
CM योगी ने उपभोक्ताओं से क्या अपील की?
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में केवल किसानों की नहीं बल्कि उपभोक्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पाद कुछ महंगे भी हों, तब भी उन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग से उगाया गया अनाज 40 रुपये प्रति किलो में मिलता है और प्राकृतिक खेती से तैयार अनाज 50 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध है, तो उपभोक्ताओं को दूसरे विकल्प को चुनना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक उत्पाद रासायनिक अवशेषों से मुक्त होते हैं और लंबे समय में बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। ऐसे उत्पादों पर थोड़ा अधिक खर्च करना भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति से पूरा नहीं होगा। इसके लिए स्वस्थ नागरिक, सुरक्षित पर्यावरण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती इन सभी उद्देश्यों को एक साथ पूरा करने की क्षमता रखती है। यही कारण है कि राज्य सरकार इस दिशा में व्यापक स्तर पर काम कर रही है और किसानों को इससे जोड़ने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा और इससे किसानों की आय, लोगों के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण संरक्षण तीनों को लाभ मिलेगा।













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