'पागलों' की तरह सोना क्यों खरीद रहा है चीन? आखिर क्या प्लानिंग कर रहा ड्रैगन जिसकी वजह से बढ़ी गोल्ड प्राइस
अक्सर भू-राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल के समय में सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। वर्तमान समय में रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास के बीच जंग छिड़ी हुई है। इसकी वजह से सोने की कीमत में बढ़ोतरी हुई है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद सोने की में अचानक उछाल देखा गया और ये मार्च 2024 तक धीरे-धीरे बढ़नी रही
लेकिन अचानक मार्च से सोने की कीमतों में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है। 29 फरवरी को सोने की कीमत 64 हजार रुपये प्रति दस ग्राम से कम थी लेकिन अप्रैल में ये 75 हजार के आंकड़े को पार कर गई।

सोने की अचानक कीमतों में वृद्धि की असली वजह चीन को माना जा रहा है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि चीनी उपभोक्ताओं का रियल एस्टेट या स्टॉक जैसे निवेशों में उनका विश्वास डगमगा गया है इसलिए वे भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
यूं तो सोने के बाजार में चीन का लंबे समय से दबदबा रहा है लेकिन हाल फिलहाल में ये बढ़ता चला जा रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच चीनी केंद्रीय बैंक ने अपने सोने के भंडार में लगातार वृद्धि की है।
इसके साथ ही उसने अमेरिकी ऋण की हिस्सेदारी को कम किया है। 2021 में चीन पर लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर अमेरिकी कर्ज था। लेकिन इस साल मार्च में ये लगभग 775 बिलियन डॉलर रह गया है।
ऐसा कहा जा रहा है कि चीन का सोने पर ये भरोसा काफी लंबे समय तक बरकरार रहने वाला है। लंदन स्थित मेटल्सडेली के सीईओ रॉस नॉर्मन ने कहा कि चीन निर्विवाद रूप से सोने की कीमतें बढ़ा रहा है। चीन में सोने की खपत पहली तिमाही में एक साल पहले की तुलना में 6 फीसदी बढ़ी। ये उछाल पिछले वर्ष 9 फीसदी की वृद्धि के बाद आया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन का रियल स्टेट संकट में है इसलिए निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। इसके अलावा चीन में सोने का प्रमुख खरीदार उसका केंद्रीय बैंक है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBC) लगातार 17 महीनों से सोना खरीदकर सबसे आगे रहा है।
पिछले साल इस बैंक ने दुनिया के बाकी सभी केंद्रीय बैंकों की तुलना में सबसे अधिक सोना खरीदा था। इसकी वजह से बैंक का स्वर्ण भंडार पिछले 50 वर्षों में अभी सबसे उछाल पर है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि चीन लंबे समय से अमेरिकी खजाने में अपनी हिस्सेदारी को धीरे-धीरे कम कर रहा है।
बीजिंग में बीओसी इंटरनेशनल के वैश्विक मुख्य अर्थशास्त्री गुआन ताओ ने कहा, कि अतीन में चीन घरेलू स्तर पर सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अपनी मुद्रा का उपयोग करता था। लेकिन अब उसने पैटर्न बदल लिया है।
डॉलर देकर खरीद रहा सोना
चीनी बैंक सोना खरीदने के लिए विदेशी मुद्राओं का उपयोग कर रहा है। दरअसल रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगा दिये थे। इन प्रतिबंधों ने चीन की आंखें खोल दी हैं। यही वजह है कि वो अमेरीकी डॉलर और बाकी मुद्राओं पर से अपनी निर्भरता कम करते जा रहा है।
रूस पर लगे प्रतिबंध से मिला सबक
दरअसल चीन को इस बात की भी टेंशन है कि ताइवान और अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड टेंशन के कारण भविष्य में उसे वो दिन भी देखना पड़ सकता है जो आज रूस देख रहा है। इसी आशंका ने चीन को अपने भंडार में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया है। इस रणनीति में सोना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत फिर भी चीन से आगे
हालांकि दिलचस्प बात ये भी है कि बड़े ही आक्रामक तरीके से सोना खरीदने के बाद भी चीन के विदेशी मुद्रा भंडार में इस धातु की हिस्सेदारी केवल 4.6% है। अगर प्रतिशत के संदर्भ में देखा जाए तो भारत के पास सोने का लगभग दोगुना भंडार है।












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