भारत के लिए खतरे की घंटी! डोकलाम क्षेत्र में तेजी से निर्माण कर रहा है चीन, भूटान ने साधी चुप्पी
भूटान बॉर्डर पर निर्माण कार्य से सुदूर डोकलाम पठार पर नियंत्रण संभावित रूप से चीन को भारत के "चिकन नेक" क्षेत्र में रणनीतिक तौर पर बढ़त देगा।
नई दिल्ली, जनवरी 12: पूर्वी लद्दाख और अरूणाचल प्रदेश से सटे इलाकों मे चीन काफी तेजी के साथ निर्माण कार्य तो कर ही रहा है, लेकिन चीन ने भूटान के साथ अपनी विवादित जमीन पर भी काफी तेजी के साथ निर्माण कार्य कर रहा है और एक दो नहीं, बल्कि 200 से ज्यादा संरचनाओं का निर्माण चीन कर रहा है, जिससे आने वाले वक्त में भारत के लिए बहुत बड़ी मुसीबत पैदा होने वाली है। (सभी तस्वीर फाइल)

डोकलाम में चीन का निर्माण
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया है कि, चीन ने भूटान के साथ अपनी विवादित सीमा पर दो मंजिला इमारतों के साथ साथ 200 से ज्यादा संरचनाओं का निर्माण कार्य तेजी के साथ बढ़ाना शुरू कर दिया है। उसके साथ ही चीन ने छह जगहों पर निर्माणाधीन बस्तियों के निर्माण में तेजी लाई है।
अमेरिकी डेटा एनालिटिक्स फर्म हॉकआई 360 द्वारा रॉयटर्स को प्रदान की गई तस्वीरों में चीनी निर्माण कार्यों का विश्लेषण किया गया है, जो जमीनी स्तर की गतिविधियों पर खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए उपग्रहों का इस्तेमाल करता है, और जिसकी रिपोर्ट दो अन्य विशेषज्ञों द्वारा जांच के बाद तैयार की जाती है। इसी विश्लेषण में कहा गया है कि, भूटान के साथ लगती सीमा पर चीन काफी तेजी से निर्माण कार्य कर रहा है।

भूटान सीमा पर तेजी से निर्माण
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन द्वारा भूटान की पश्चिमी सीमा के साथ कुछ स्थानों में निर्माण से संबंधित गतिविधियां साल 2020 की शुरुआत से ही चल रही है। सैटेलाइट इमेजरी फर्म कैपेला स्पेस और प्लैनेट लैब्स द्वारा प्रदान की गई सामग्री के आधार पर पता चला है कि, इन इलाकों में चीन पटरियों के निर्माण के साथ साथ कई और दूसरे तरह के निर्माण कार्य कर रहा है। हॉकआई 360 में मिशन एप्लिकेशन निदेशक क्रिस बिगर्स ने कहा कि, ये तस्वीरें बताती हैं कि, साल 2021 के बाद से चीन ने निर्माण कार्य को और भी ज्यादा तेज कर दिया है और ऐसा लग रहा है कि, काफी तेजी से कई ढांचों को तैयार किया गया है और शायद पहले इन जगहों पर घर बनाने के लिए उपकरणों को रखा गया है और फिर घरों का निर्माण किया गया है।

2021 में निर्माण कार्य में तेजी
हॉकआई 360 में मिशन एप्लिकेशन निदेशक क्रिस बिगर्स ने कहा कि, 'मेरा मानना है कि साल 2021 से चीन ने निर्माण कार्य को और भी ज्यादा तेज कर दिया है'। वहीं, कैपेला स्पेस द्वारा नए निर्माण के स्थानों और हाल ही में ली गई सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन करने वाले दो अन्य विशेषज्ञों ने कहा कि, सभी छह बस्तियां चीन और भूटान द्वारा विवादित क्षेत्र में बनाई जा रही है, ऐसा प्रतीत हो रहा है, जिनमें से करीब 110 वर्ग किलोमीटर का एक विवादित क्षेत्र शामिल है। वहीं, भूटान के विदेश मंत्रालय ने रॉयटर्स के सवालों के जवाब में कहा कि, "यह भूटान की नीति है कि वह जनता के बीच सीमा के मुद्दों पर बात न करे।" भूटान मंत्रालय ने आगे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

चीनी विदेश मंत्रालय का बयान
वहीं, निर्माण कार्यों को लेकर जब चीनी विदेश मंत्रालय से सवाल पूछा गया, तो चीन की तरफ से जवाब दिया गया कि, ''ये निर्माण कार्य स्थानीय लोगों के रहने और उनकी स्थिति में सुधार के लिए किए जा रहे है और ये तमाम निर्माण कार्य चीन की संप्रभुता के भीतर रहकर की जा रही और चीन अपने क्षेत्र में सामान्य निर्माण गतिविधियों को अंजाम देने में स्वतंत्र है।" वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय ने आगे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जबकि, दो विशेषज्ञों का कहना है कि, ये गांव बीजिंग को कुछ रणनीतिक महत्व भी देते हैं। नया निर्माण भारत, भूटान और चीन की सीमाओं के जंक्शन पर डोकलाम क्षेत्र से 9 से 27 किमी दूर है, जहां भारतीय और चीनी सैनिक 2017 में दो महीने से अधिक समय तक एक दूसरे के सामने खड़े रहे थे।

चीन के खिलाफ भूटान की चुप्पी
वहीं, डोकलाम में चीनी निर्माण कार्यों को लेकर भूटान ने पूरी तरह से चुप्पी बना रखी है और भूटान के नेता चीन के खिलाफ एक शब्द भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भूटानी विदेश मंत्रालय ने चीनी निर्माण पर कहा कि, भूटान और चीन अपने मतभेदों को सुलझाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अप्रैल 2021 में सीमा वार्ता के को लेकर सहमत हुए थे।'' मंत्रालय ने कहा कि, "भूटान और चीन के बीच सीमा वार्ता के ढांचे के भीतर सभी मुद्दों पर चर्चा की जाती है।" वहीं, लंदन के SOAS विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और रिसर्च के सहयोगी रॉबर्ट बार्नेट ने कहा कि, "चीन का गांव बनाने का निर्माम कार्य उन जगहों पर की जा रही है, जिनको लेकर भूटान दावा करता रहा है और चीन का निर्माण कार्य भूटान को मजबूर करने का एक चीनी डिजाइन है।''

भारत के लिए खतरे की घंटी
डोकलाम क्षेत्र में तेजी से निर्माण कार्य भारत के लिए बहुत बड़े खतरे की घंटी है और भारत को फौरन अपनी रणनीति पर काम करना चाहिए और संभवत: भारतीय रणनीतिकार काम भी कर रहे होंगे। आपको बता दें कि, सुदूर डोकलाम पठार पर नियंत्रण संभावित रूप से चीन को भारत के "चिकन नेक" क्षेत्र में रणनीतिक तौर पर बढ़त देगा। आपको बता दें कि, 'चिकन नेक' भारत के उस हिस्से को कहा जाता है, जो भारत को उसके उत्तरपूर्वी क्षेत्र से जोड़ती है।
भारत चीन के साथ 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। डोकलाम से लगभग 1,100 किमी दूर लद्दाख क्षेत्र में एक अलग सीमा विवाद में दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के पास तैनात रहते हैं, जहां वे 2020 में आमने-सामने की लड़ाई में भिड़ गए थे। भारत अपनी सीमाओं के साथ चीनी निर्माण की बारीकी से निगरानी कर रहा है, भारतीय रक्षा सूत्र ने मामले की संवेदनशीलता के कारण नाम लेने से इनकार कर दिया।












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