हिन्दी फिल्म 'भरतियां' पर भड़का चीन, ग्लोबल टाइम्स ने लिखा लंबा-चौड़ा संपादकीय, इस सिनेमा में ऐसा क्या है?
China on Bharateeyans: हिन्दी फिल्म 'भरतियां' को लेकर चीन आगबबूला है और चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में इस फिल्म के खिलाफ लंबा-चौड़ा आर्टिकिल लिखते हुए हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को कई सारी नसीहतें दी गई हैं।
ग्लोबल टाइम्स ने कहा है, कि इस फिल्म में कलात्मक या फिर कहानी का आकर्षण कुछ नहीं है, बल्कि इसे बेचने के लिए चीन के खिलाफ उत्तेजक सामग्रियां पड़ोसी गई हैं, जिससे भारत और चीन के बीच के संबंध खराब होते हैं। ग्लोबल टाइम्स का कहना है, कि कई भारतीय राजनेताओं ने असामान्य तरीके से फिल्म की प्रशंसा की है और इसे हर भारतीयों के लिए देखी जाने लायक फिल्म बताया है, जबकि ये फिल्म सिर्फ और सिर्फ चीन विरोधी भावनाओं से भरी हुई है।

फिल्म 'भरतियां' पर भड़का चीन
ग्लोबल टाइम्स का कहना है, कि कुछ गंभीर भारतीय मीडिया आउटलेट्स ने आर्ट और टेक्नोलॉजी के नजरिए से फिल्म की आलोचना की है, जो इसमें कुछ राहत देने वाले कारक हैं।
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, "फिल्म की मुख्य कहानी छह युवा भारतीयों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक "गुप्त मिशन" पर चीनी क्षेत्र में घुसपैठ करते हैं, लेकिन संवाद और दृश्य जानबूझकर गलवान घाटी संघर्ष की पृष्ठभूमि को उजागर करते प्रतीत होते हैं। प्रोडक्शन टीम ने गलवान घाटी संघर्ष में सैनिकों के हताहत होने पर निराशा व्यक्त की और नागरिकों से एकता का आह्वान किया।"
ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में कहा गया है, कि "फिल्म निर्माण कंपनी ने फिल्म की रिलीज से पहले गलवान घाटी में हुए संघर्ष को बार-बार प्रचारित और सनसनीखेज बनाया। यह स्पष्ट है, कि यह अब एक साधारण फिल्म नहीं है, बल्कि चीन विरोधी प्रचार का एक हिस्सा है।"
संपादकीय में आगे कहा गया है, कि "कुछ भारतीय मीडिया ने इसे "देशभक्तिपूर्ण फिल्म" कहा है। जिसे ठीक किया जाना चाहिए। यह किसी भी तरह से देशभक्तिपूर्ण फिल्म नहीं है, बल्कि संकीर्ण विचारधारा वाली राष्ट्रवाद की फिल्म है, जो नफरत को बढ़ावा देती है। यह कुछ ऐसा है जिसे कोई भी आधुनिक सभ्य देश बर्दाश्त नहीं कर सकता है और यह फिल्म और टेलीविजन कार्यों की निचली सीमा को पार कर गया है।"
ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है, कि "चीन को "खलनायक" और "भारत के दुश्मन" के रूप में चित्रित किया गया है। इसके चलते और फिल्म की निर्माण टीम और भारतीय जनमत द्वारा किए गए प्रचार-प्रसार का अंतिम प्रभाव भारतीय समाज में वैचारिक जहर फैलाने जैसा है। जितने अधिक लोग इसे देखेंगे, प्रदूषण का दायरा उतना ही बड़ा होगा।"
ग्लोबल टाइम्स का कहना है, कि "भारत में यह कोई अकेला मामला नहीं है। 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के तुरंत बाद, भारत में कुछ लोगों ने इस घटना के बारे में "चीन विरोधी मेलोड्रामा" बनाना शुरू कर दिया। इस पूरे वर्ष निर्देशक अपनी फिल्मांकन योजनाओं की घोषणा करते रहे हैं। हम नहीं जानते कि ऐसी फिल्में बनाने के पीछे का उद्देश्य क्या है, यह परिणामों पर विचार किए बिना ध्यान आकर्षित करने की कोशिश हो सकती है, डायरेक्टर और टीम की गलत व्याख्या और फिल्मों के माध्यम से चीन के प्रति गलत इरादों का परिणाम, या शायद तथाकथित "देशभक्ति" को बेचने के लिए "चीन विरोधी" भावना का फायदा उठाने का एक तरीका हो सकता है।"
ग्लोबल टाइम्स का कहना है, कि निश्चित तौर पर ये भारत से प्यार करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह फिल्म कला का अपमान और दुरुपयोग है।












Click it and Unblock the Notifications