यूक्रेन संकट पर अपने ही पड़ोस में घिर गया चीन, बोला-ताइवान से कोई तुलना नहीं
बीजिंग, 23 फरवरी: यूक्रेन संकट पर चीन एक तरह से रूस की तरफदारी करने में लगा हुआ है। लेकिन, जब ताइवान से यह मसला उठा तो चीन के शासकों का दिमाग ठनक गया। उसने तुरंत ही कहना शरू कर दिया कि यूक्रेन और ताइवान के बीच में कोई तुलना ही नहीं है। गौरतलब है कि चीन ताइवान पर अपना अधिकार जताता रहा है और जबरन कब्जा करने की धौंस भी दिखाता है। आए दिन चीन के फाइटर जेट भी ताइवान की वायुसेना में घुसपैठ की कोशिश करते हैं, लेकिन पड़ोसी मुल्क ताइवान भी उसे मुंहतोड़ जवाब देने में कभी पीछे नहीं रहता है। बुधवार को फिर से दोनों देशों के बीच का यह विवाद सुर्खियों में आ गया और चीन ने अपनी दलीलें देने की कोशिशें की हैं।

ताइवान यूक्रेन नहीं है- चीन
यूक्रेन संकट से ताइवान की तुलना को लेकर चीन घबरा गया है। उसने यूक्रेन में जारी संकट और स्वशासित और लोकतांत्रिक ताइवान पर अपने दावे को लेकर हो रही तुलना को खारिज करते हुए बुधवार को कहा है कि द्वीप (ताइवान) 'यूक्रेन नहीं' है और वह हमेशा ही मेनलैंड (चीन) का अविभाज्य अंग रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, 'ताइवान यूक्रेन नहीं है। ताइवान हमेशा से चीन का अविभाज्य अंग रहा है। यह निर्विवाद, कानूनी और ऐतिहासिक तथ्य है।' चीन के प्रवक्ता ने कहा कि ताइवान का मुद्दा गृहयुद्ध से बचा हुआ है, लेकिन चीन की अखंडता से कभी समझौता नहीं होना चाहिए और न ही कभी समझौता किया गया है।

ताइवानी राष्ट्रपति ने की है 'बाहरी शक्तियों' से निगरानी बढ़ाने की बात
दरअसल, बुधवार को ही चीन की ओर इशारा करते हुए ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन कहा है कि 'बाहरी ताकतें' 'यूक्रेन की स्थिति को तोड़ने-मरोड़ने और ताइवान के समाज के मनोबल को प्रभावित करने की कोशिश' कर रही थीं और अपनी सरकार से कहा कि 'युद्ध को संज्ञान में रखते हुए ज्यादा चौकस रहे।' इसी के जवाब में चीन ने अपने प्रवक्ता को उतारा, जिसने कहा है कि यूक्रेन और ताइवान में किसी भी तरह की तुलना ताइवान मुद्दे के मूलभूत इतिहास की समझ में कमी दिखाता है।

साई इंग वेन ने अपनी सेना को अलर्ट रहने को कहा है
दरअसल, चीन हमेशा से स्वशासित और लोकतांत्रिक ताइवान पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है और जरूरी पड़ने पर उसने मेनलैंड के साथ एकीकृत करने की मंशा को भी कभी खारिज नहीं किया है। इससे पहले रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में साई इंग वेन के हवाले से कहा गया कि उन्होंने यूक्रेन संकट के लिए गठित अपनी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की वर्किंग ग्रुप की बैठक में कहा कि सभी सिक्योरिटी और मिलिट्री यूनिट को 'अपनी निगरानी बढ़ानी चाहिए और ताइवान जलडमरूमध्य के नजदीक सैन्य गतिविधियों की पूर्व चेतावनी देना चाहिए। ' अलबत्ता ताइवानी राष्ट्रपति ने कहा था कि भू-रणनीति, भूगोल और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में ताइवान और यूक्रेन में मूलभूत अंतर है। उन्हें ये कहते हुए बताया गया कि ' लेकिन यूक्रेन में स्थिति को बदलने और ताइवानी समाज के मनोबल को प्रभावित करने के इरादे से विदेशी ताकतों के सामने, सभी सरकारी इकाइयों को विदेशी शक्तियों और उनके स्थानीय सहयोगियों की ओर से शुरू किए गए युद्ध की रोकथाम को खुद को मजबूत करना चाहिए।

यूक्रेन की परिस्थितियों को समझने की जरूरत-चीन
चीन ने रूस के यूक्रेन को लेकर उठाए गए कदमों को लेकर उसपर राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नजरअंदाज करने के लग रहे आरोपों के बारे में कहा कि जो उसके (चीन के) बारे में ऐसा कह रहे हैं, वो 'या तो गुप्त उद्देश्यों से प्रेरित हैं या जानबूझकर तोड़-मरोड़कर या चीन की गलत व्याख्या कर रहे हैं।' उसने कहा है कि इस संकट का शांतिपूर्ण हल निकालने के लिए यूक्रेन की परिस्थितियों को समझकर इसका निपटारा करने की आवश्यकता है।(तस्वीरें- फाइल)












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