चीन ने नया कानून बनाकर निकाला विदेशी प्रतिबंधों से निपटने का रास्ता
बीजिंग, 11 जून। गुरुवार, 10 जून को चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस की स्थायी समिति ने एक कानून को मंजूरी दे दी, जिसके जरिए चीन को उन विदेशी प्रतिबंधों के खिलाफ कदम उठाने के अधिकार मिल गए, जिन्हें वह अन्यायपूर्ण मानता है. इस कानून के तहत चीन ऐसे कदम उठा सकेगा, जो उसके नागरिकों या व्यापारिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ विदेशों में लगाए गए प्रतिबंधों का जवाब होंगे.

चीन के सरकारी टीवी चैनल सीसीटीवी ने खबर दी है कि यह कानून चीन के नागरिकों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका द्वारा लगाए गए 'एकतरफा और पक्षपाती' प्रतिबंधों के खिलाफ कदम उठाने के अधिकार देता है. आमतौर पर चीन में किसी कानून पर वोटिंग तब होती है, जब उसकी तीन बार समीक्षा हो चुकी हो. इस कानून की यह दूसरी ही समीक्षा थी. पहली समीक्षा गुपचुप तौर पर अप्रैल में की गई थी. इस कानून के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
प्रतिबंधों की वजह
चीन का कहना है कि उसे 'पक्षपातपूर्ण' प्रतिबंधों के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार है. उसका दावा है कि उसे अमेरिका के खिलाफ अपने हितों की रक्षा करनी है, जो बंधुआ मजदूरी, नजरबंदी शिविर और शिनजियां प्रांत में अल्पसंख्यकों की पुनर्शिक्षा जैसे 'झूठों' का इस्तेमाल उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाने के लिए कर रहा है.
पश्चिमी देशों के मानवाधिकार संगठन चीन पर शिनजियांग प्रांत में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हैं. ऐसी कई रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, जिनमें कहा गया है कि चीन उइगर मुसलमानों को योजनाबद्ध तरीके से प्रताड़ित कर रहा है. पश्चिमी देश, जैसे अमेरिका और यूरोपीय संघ इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हैं और इस आधार पर कई तरह के प्रतिबंध लगा चुके हैं. लेकिन चीन का कहना है कि ये प्रतिबंध राजनीतिक विचाराधाराओं से प्रेरित हैं और चीन को दबाने के लिए लगाए जा रहे हैं.
मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था एमनेस्टी ने अपनी नई रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें चीन पर 'इस्लाम को नष्ट करने' करने की कोशिश का आरोप लगाया गया है. यह रिपोर्ट कहती है कि चीन की सरकार ने पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में 'बड़े पैमाने पर योजनाबद्ध' तरीके से शोषण किया है.
हाल ही में अमेरिका ने संसद में एक प्रस्ताव पास किया था, जिसके तहत चीन की कई बड़ी कंपनियों जैसे वावे और जेडटीई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. इसके जवाब में चीन कहता है कि उसे अपने संस्थानों, उद्योगों और नागरिकों के हितों की सुरक्षा के लिए कुछ कानूनी रास्ते तैयार करने होंगे.
कई देशों में हैं ऐसे कानून
चीन ऐसा कानून बनाने वाला पहला देश नहीं है. दुनिया में कई जगह ऐसे कानून बनाए जा चुके हैं. 2018 में रूस ने अपने हितों की सुरक्षा को आधार बताते हुए ऐसे ही कुछ कानून पास किए थे. इन कानूनों में देश की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की बात कही गई थी. उसने प्रतिबंधों के खिलाफ ऐसे कदमों की एक सूची भी प्रकाशित की थी. इनमें प्रतिबंध लगाने वाले देश से सहयोग बंद करना और उनके उत्पादों का व्यापार अपने यहां प्रतिबंधित कर देना शामिल था.
पिछले सितंबर में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने भी ऐसी ही एक सूची जारी की थी. 'अविश्वसनीय संस्थानों की सूची' के नाम से जारी इस लिस्ट को जानकारों ने अमेरिका के प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया कदम बताया था. इस सूची में चीन के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनियों और लोगों के खिलाफ सख्त जुर्माने लगाने का प्रावधान किया गया था. हालांकि चीन दावा करता है कि ऐसे कानून या सूचियां किसी देश से उसके रिश्तों को प्रभावित नहीं करेंगी.
वीके/एए (डीपीए, केएनए)
Source: DW
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