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मसूद अजहर को UNSC में आतंकी घोषित करने के लिए चीन राजी, लेकिन इस शर्त पर!

नई दिल्‍ली। बुधवार को चीन ने यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) में जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को ग्‍लोबल आतंकी घोषित करने वाले प्रस्‍ताव पर चौथी बार टेक्निकल होल्‍ड लगा दिया। लेकिन इंग्लिश डेली हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक एक समझौते के तहत यूएनएससी को मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने के लिए कह सकता है। इस बात पर चर्चा जारी है कि चीन को इसके लिए कैसे राजी किया जाए। माना जा रहा है कि बीजिंग को प्रस्‍ताव की भाषा और उन वाक्‍यों पर ऐतराज है जिसके तहत मसूद अजहर को आतंकी घोषित किया जाएगा।

 अगले कुछ दिनों में आ सकती है अच्‍छी खबर

अगले कुछ दिनों में आ सकती है अच्‍छी खबर

अखबार ने दावा किया है कि महीनों और हफ्तों में नहीं बल्कि अगले कुछ दिनों के अंदर चीन की तरफ से भारत को मसूद अजहर के मुद्दे पर एक सकारात्‍मक खबर सुनने को मिल सकती है। चीन को प्रस्‍ताव की भाषा पर खासी आपत्ति है। इस वजह से अमेरिका, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम ने इसमें बदलाव की इच्छा भी जाहिर की है। ये देश अजहर को आतंकी घोषित करने वाले अपने लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं। जैश ने 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले की जिम्‍मेदारी ली थी और मसूद अजहर इसका संस्‍थापक है।

पहली बार चीन का रुख बदला

पहली बार चीन का रुख बदला

चीन की ओर से इस मुद्दे पर चर्चा करने रूचि जाहिर की गई है। इस वजह से ही इस बात की संभावनाएं प्रबल हो गई है कि अजहर को यूएनएससी में बैन किया जा सकता है। न सिर्फ यूएनएससी के सदस्‍य देश बल्कि पाकिस्‍तान को भी इसके लिए हामी भरनी पड़ेगी कि वह अजहर को अपने यहां न तो रखेगा और न ही उसके हथियार या फिर दूसरी जरूरी मदद मुहैया कराएगा।

यूएनएससी का बयान भारत के लिए अहम

यूएनएससी का बयान भारत के लिए अहम

पुलवामा आतंकी हमले की निंदा करते हुए 22 फरवरी को यूएनएससी की ओर से एक बयान जारी किया गया था। भारत के लिए यह बयान इसलिए अहम था क्‍योंकि यूएनएससी ने पहली बार जम्‍मू कश्‍मीर में हुए आतंकी हमले की निंदा की थी। साथ ही पहली बार यूएनएससी ने इसे जम्‍मू कश्‍मीर कहा था न कि भारत अधिकृत कश्‍मीर। पहली बार यूएनएससी ने हमले के लिए जैश का नाम लिया था।

अगर नहीं माना चीन तो...

अगर नहीं माना चीन तो...

लेकिन अगर चीन किसी भी तरह नहीं माना तो यूएनएससी के सदस्‍य के तौर पर अमेरिका, यूके और फ्रांस ने एक नया रास्‍ता तलाशा है। चीन के अड़‍ियल रवैये की वजह से अजहर आजाद न घूमे इसके लिए खुले में वोटिंग और बहस कराई जा सक‍ती है। अभी तक यूएनएससी में प्रतिबंध के लिए सिर्फ काउंसिल की प्रतिबंध समिति में ही बहस होती है और वोटिंग की मंजूरी है। फिलहाल इस पर बातचीत जारी है और हो सकता है कि अगले कुछ दिनों में अजहर को लेकर एक बड़ी खबर सुनने को मिले।

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