चीन की लैब में बंदरों पर खतरनाक प्रयोग, जीन्स बदलकर बनाए हजारों बंदर, जिनपिंग की सेना की निगरानी

चीन में 20 सालों तक रिपोर्टिंग कर चुके वरिष्ठ पत्रकार जैस्पर बेकर ने कहा है कि कोरोना वायरस निश्चित तौर पर चीन की प्रयोगशाला में तैयार किया गया है और इसको लेकर किसी को जरा सा भी शक नहीं होना चाहिए।

बीजिंग, जून 07: चीन अपनी हरकतों की वजह से इस दुनिया के लिए सबसे खतरनाक मुल्क बनता जा रहा है। कोरोना वायरस को चीन की प्रयोगशाला में ही बनाया गया है, ये करीब करीब हर महामारी विशेषज्ञ अब मानने लगे हैं, लेकिन इस बीच चीन को लेकर एक और बड़ा दावा किया गया है। एक विशेषज्ञ ने दावा किया है कि चीन बंदरों को लेकर एक खतरनाक और रहस्यमयी रिसर्च कर रहा है और चीन की सेना ही इस रिसर्च को करवा रही है। इस खुलासे के बाद एक बार फिर से हड़कंप मच गया है, क्योंकि कोरोना वायरस की वजह से दुनिया में लाखों लोग बेमौत मारे जा चुके हैं।

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    बंदरों पर चीन का रहस्यमयी प्रयोग

    बंदरों पर चीन का रहस्यमयी प्रयोग

    डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक चीन का वुहान शहर, जहां से कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैलना शुरू हुआ था, उस शहर की प्रयोगशालाओं में जानवरों पर बेहद खतरनाक प्रयोग किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक वुहान में एक हजार से ज्यादा जानवरों को प्रयोगशाला के अंदर म्यूटेट किया गया है, जिनमें बंदर और खरगोश भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रयोगशाला में जिन जानवरों के जीन्स में परिवर्तन किया गया है, उन जानवरों के अंदर प्रयोगशाला में इंजेक्शन के जरिए जीन्स परिवर्तित वायरस दिए गये हैं। जिसके बाद कई जानवरों में कोविड-19 संबंधित लक्षण भी देखने को मिले हैं। खुलासा हुआ है कि चीन उन हर तरह के गैर कानूनी प्रयोगों को अंजाम दे रहा है, या बढ़ावा दे रहा है, जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं होते हैं और जिन रिसर्च पर पूरी दुनिया में प्रतिबंध लगा हुआ है, उन रिसर्च को पूरी दुनिया में किए जाने पर रोक है।

    दुनिया को बेवकूफ बनाता चीन

    दुनिया को बेवकूफ बनाता चीन

    डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक जब से दुनिया में लाभ के लिए प्रयोगशाला में रिसर्च के लिए निवेश का आदान प्रदान शुरू हुआ है, उसके बाद से चीन और बेखौफ होकर प्रयोगशालाओं में रहस्यमयी और खतरनाक रिसर्च को अंजाम देने लगा है। चीन की प्रयोगशाला में जानवरों के साथ साथ इंसानों पर भी एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं, जिसे दुनिया के दूसरे देशों में अमानवीय करार दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन इन खतरनाक प्रयोगों को कई वजहों से अंजाम दे रहा है। एक सामान्य वजह ते ये है कि चीन स्वास्थ्य टेक्नोलॉजी के क्षेत्र से काफी फायदा उठाना चाहता है। लेकिन, इसका दूसरा पहलू काफी ज्यादा खतरका है, जो सीधे तौर पर इंसानों की जिंदगी को लेकर है।

    सीधे तौर पर पीएलए जिम्मेदार

    सीधे तौर पर पीएलए जिम्मेदार

    चीन में 20 सालों तक रिपोर्टिंग कर चुके वरिष्ठ पत्रकार जैस्पर बेकर ने कहा है कि कोरोना वायरस निश्चित तौर पर चीन की प्रयोगशाला में तैयार किया गया है और इसको लेकर किसी को जरा सा भी शक नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हजारों जानवरों को अभी तक चीन अपनी लैब में रहस्यमयी प्रयोगों के जरिए म्यूटेट कर चुका है और इसके लिए सीधे तौर पर चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी यानि पीएलए जिम्मेदार है। पीएलए की देखरेख में ही ये तमाम प्रयोग किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'चीन दुनिया में बंदरों पर रिसर्च की राजधानी बन गया है और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ये है कि इंसानी दिमाग की सोच को सबसे अच्छी तरह से बंदर ही बता सकते हैं, लिहाजा बंदरों के लिए चीन इंसानी सोच पर एक तरह से कब्जा करने की कोशिश में जुटा हुआ है।' जर्नलिस्ट जैस्पन बेकर ने कहा कि '2019 में चीन की शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस प्रयोगशाला में एक मकाक से पांच बंदरों का क्लोन तैयार किया गया था और इस खतरनाक प्रयोग का नतीजा ये हुआ कि बेबी बंदर ऐसे लक्षणों के साथ पैदा हुए हैं कि उनके नींद लेने की शैली के साथ साथ उनका जीवन पूरी तरह से बदला हुआ है।'

    जहरीला हथियार बनाना है मकसद

    जहरीला हथियार बनाना है मकसद

    दरअसल, चीन अपनी रहस्यमयी और खतरनाक प्रयोगों के जरिए जानवरों के जीन्स में परिवर्तन कर उन्हें आधुनिक बनाना चाहता है। इसके साथ ही प्रयोगशालाओं में ऐसा जैविक हथियार तैयार करना चाहता है, जिसे एक बार दुश्मन पर छोड़ देने के बाद दुश्मनों के पास उससे बचाव का कोई रास्ता ही ना हो। वहीं, चीन के दो रिसर्चर्स ने 2019 में एक आर्टिकिल लिखा था, जिसमें प्रयोगशाला में चमगादड़ों पर रिसर्च की बात का जिक्र उन्होंने किया था। आर्टिकिल में उन्होंने लिखा था कि 'प्रयोगशाला में जानवरों पर प्रयोग करना काफी कठिन होता है, क्योंकि अकसर वो आपके कंट्रोल में नहीं होते हैं।' उन दोनों ने आगे लिखा था कि 'प्रयोगशाला में 605 चमगाड़ों पर रिसर्च किया जा रहा है लेकिन एक रिसर्च में शामिल एक चमगागड़ ने एक वैज्ञानिक के हाथ पर काट लिया है और उनके हाथों पर चमगादड़ का खून भी लगा हुआ है।' वहीं, 2019 के एक चायनीज आर्टिकिल में कहा गया था कि 'चमगादड़ों को पकड़ने के लिए जिन पिंजरों का इस्तेमाल किया जाता है, ना वो सुरक्षित हैं और नाही चमगादड़ों को पकड़ने का तरीका। चमगादड़ों को पकड़ने के लिए सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता है।'

    2015 में 'बैट वुमन' का आर्टिकिल

    2015 में 'बैट वुमन' का आर्टिकिल

    चीन में ही कोरोना वायरस का जन्म हुआ है, इसका एक और सबूत है 21015 में वुहान लैब में काम करने वाली और चमगादड़ों पर रिसर्च करने वाली वैज्ञानिक शी जेंग्ली का आर्टिकिल। शी जेंग्ली को बैट वुमन भी कहा जाता है। उन्होंने 2015 में विश्व प्रतिष्ठित नेचर मैग्जीन के लिए एक आर्टिकिल लिखा था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि 'मैंने उन पिंजरों को देखा है, जिनमें चमगादड़ पकड़े जाते हैं'। इसके साथ ही उन्होंने लिखा था कि 'ये चमगादड़ कोरोना वायरस को फैलाने की क्षमता रखते हैं'

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