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China: पुतिन की पीठ में शी जिनपिंग ने घोंपा खंजर! दबोच रहे रूस की जमीन, नक्शे में रूसी इलाके को बताया अपना

China: चीन अक्सर भारत के अरुणाचल प्रदेश को अपना बताता रहता है। यहां तक कि उसने अपने नक्शे में भी अरुणाचल को शामिल किया है। लेकिन उनसी इस कब्जे वाली नीति से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अब रूस के लिए भी मुश्किलें खड़ी होने वाली हैं। दरअसल चीन ने रूस के कुछ इलाकों को अपने नक्शे में दिखाया है। जिसको लेकर फिर से एक नई बहस शुरू हो गई है।

यही वजह है कि दुनिया की सबसे लंबी सीमा पर चीनी अतिक्रमण की आशंका तेज़ हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि बीजिंग और मॉस्को ग्लोबल मंच पर "असीमित साझेदार" दिखते हैं, लेकिन अंदर से रिश्ते उतने सरल नहीं हैं जितने नज़र आते हैं।

China

आधिकारिक चीनी नक्शों में बड़ा बदलाव

2023 में चीन के पर्यावरण मंत्रालय ने नए आधिकारिक नक्शों में रूस के कुछ शहरों-जैसे व्लादिवोस्तोक-को उनके चीनी नामों से दिखाने का आदेश दिया। इसके अलावा, अमूर और उस्सूरी नदियों के बीच स्थित वह विवादित द्वीप, जिस पर 2008 में समझौता हो गया था, उसे चीन ने नक्शे में पूरी तरह अपना क्षेत्र दिखा दिया।

चीनी किसानों की बढ़ती जमीन खरीद से रूस चिंतित

सीमा के दोनों ओर चीनी किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने और लंबे समय की लीज़ लेने की घटनाएँ भी रूस की बेचैनी बढ़ा रही हैं। इसी बीच चीन के राष्ट्रवादी खुले तौर पर 19वीं सदी में किंग राजवंश द्वारा रूस को जबरन सौंपे गए क्षेत्रों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। हालांकि बीजिंग ने इन मांगों की पुष्टि नहीं की है।

बीजिंग का बयान और पुतिन-शी की दोस्ती

चीन इन बदलावों को कम महत्व देता है और कहता है कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ उसका रिश्ता बेहद महत्वपूर्ण है। जून में तियानमेन स्क्वायर में हुई 'वी-डे' परेड में पुतिन को शी जिनपिंग के ठीक बगल में सम्मानित स्थान दिया गया था-जो दोनों देशों की सार्वजनिक दोस्ती को दर्शाता है।

रूस की अर्थव्यवस्था को चीन का सहारा

यूक्रेन पर रूस के फुल-स्केल आक्रमण और भारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद चीन उसका सबसे बड़ा सपोर्ट बनकर उभरा है। चीन आज रूस का नंबर-वन गैस और तेल खरीदार है। इसके चलते रूस की वॉर इकोनॉमी चलती रही है। बदले में, रूस को चीन के साथ रिकॉर्ड स्तर का व्यापार मिला है और उसने SWIFT के विकल्प के तौर पर चीनी युआन को अपनाया है।

अमेरिका के खिलाफ चीन-रूस का बढ़ता गठजोड़

कूटनीतिक रूप से दोनों देश अमेरिका के वर्चस्व के खिलाफ एक मजबूत धुरी बनाते जा रहे हैं।
प्रशांत क्षेत्र में उनके संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अमेरिका और उसके सहयोगी अपनी सैन्य मौजूदगी के लिए सीधे चुनौती मानते हैं।

रूस के अंदर डर

रूस में एक चिंता तेजी से बढ़ रही है-कि कहीं वह चीन की तुलना में "जूनियर पार्टनर" न बन जाए। क्रेमलिन से जुड़े कुछ लोगों ने चेतावनी दी है कि चीन पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में उलटा भी पड़ सकती है।

लीक हुए दस्तावेज़ों में खुलासे

एक न्यूयॉर्क टाइम्स रिपोर्ट-जो रूसी खुफिया विभाग से लीक दस्तावेज़ों पर आधारित थी-ने चीन के बढ़ते प्रभाव से जुड़े डर को सामने लाया। रिपोर्ट में दावा था कि चीनी एजेंट, चीनी पत्नियों वाले रूसी नागरिकों की भर्ती कर रहे हैं, और चीन से लौटने वाले रूसी एजेंटों से पॉलीग्राफ टेस्ट कराए जा रहे हैं। यह दोनों देशों के बीच अविश्वास की एक परत को दर्शाता है।

चीन की "धीमी लेकिन स्थिर" रणनीति

हडसन इंस्टीट्यूट के एशिया-प्रशांत विशेषज्ञ पैट्रिक क्रोनिन कहते हैं कि शी जिनपिंग रूस को अमेरिका के बाद की विश्व व्यवस्था में एक "महत्वपूर्ण रणनीतिक साथी" मानते हैं। उनके मुताबिक, परेड, संयुक्त अभ्यास और एकजुटता के दिखावे वास्तविकता को छुपाते हैं-जहाँ चीन धीरे-धीरे अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत कर रहा है, खासकर साइबर गतिविधियों और सीमाई क्षेत्रों में।

रूस की कमजोर स्थिति का फायदा उठाने की तैयारी

क्रोनिन का दावा है कि चीन रूस की कमजोर अर्थव्यवस्था का फायदा उठाने के लिए तैयार है और पड़ोसी क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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