Special Report: भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास से चीन को लगी मिर्ची, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तीन देशों की ‘लड़ाई'
भारत और अमेरिका के बीच फरवरी के अंत में होने वाले मिलिट्री एक्सरसाइज से पहले चीन बौखला गया है। इसी बौखलाहट में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए चीन ने भारत को नसीहत तक दे डाली है।
Indo-US military exercise: नई दिल्ली/बीजिंग: 21 फरवरी से राजस्थान में होने वाले भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास से पहले चीन बौखला गया है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वर्चस्व बनाने को बेताब चीन, भारत-अमेरिका मिलिट्री युद्धाभ्यास से पहले ही डर गया है। चीन के डर का आलम ये है कि उसने युद्धाभ्यास शुरू होने से पहले ही भारत को नसीहते देनी शुरू कर दी है। चीनी सरकार का भोंपू ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में भारत को अमेरिका का मोहरा तक कह दिया है।

युद्धाभ्यास पहले लगी चीन को मिर्ची
ग्लोबल टाइम्स ने चीनी एक्सपर्ट्स के हवाले से लिखा है भारत को इंडो-पैसिफिक यानि हिंद प्रशांत क्षेत्र में वर्चस्व बनाने के लिए अमेरिका के साथ युद्धाभ्यास को लेकर उत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि जो बाइडेन प्रशासन भारत को चीन के खिलाफ सिर्फ एक मोहरा की तरह ही इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय मीडिया पर इस युद्धाभ्यास को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाते हुए आलोचना की है।
चीनी भोंपू ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय मीडिया की आलोचना करते हुए कहा है कि 'भारतीय मीडिया जो बाइडेन शासनकाल में भारत-अमेरिका के बीच होने वाली मिलिट्री एक्सरसाइज को लेकर काफी उत्साहित है। भारतीय मीडिया का कहना है कि इस मिलिट्री ड्रील से दोनों देशों की सेना और नजदीक आएगी साथ ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में इस मिलिट्री एक्सरसाइज से काफी फायदा मिलेगा'
भारत और अमेरिकी सेना के बीच युद्धाभ्यास राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इलाके में किया जाएगा। जिसका मकसद दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी सहयोग बढ़ाना, दोनों देशों के बीच के संबंध को और मजबूत करना है। इस ड्रिल का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत का अपनी शक्ति और मजबूत करना भी है। और यही डर अब चीन को हो रहा है।

चीनी एक्सपर्ट्स के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि 'हालांकि भारत-अमेरिका के बीच के इस युद्धाभ्यास के पीछे का मकसद चीन नही है, जबकि भारत-चीन के बीच लंबे वक्त से सीमा विवाद की वजह से टेंशन जारी है। इससे बड़ा युद्धाभ्यास डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में भारत ने किया था जब दोनों देश की नेवी ने मालाबार में जापान और ऑस्ट्रेलियन सैनिकों के साथ मिलिट्री एक्सरसाइज को अंजाम दिया था' भारत और अमेरिका के बीच होने वाले इस मिलिट्री एक्सरसाइज को डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में ही शिड्यूल किया गया था। भारत और अमेरिका के बीच बेसिक एक्सचेंज एंड कॉर्पोरेशन एग्रीमेंट (BECA) भी डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में ही साइन किया गया था। जिसका मकसद जियो पॉलिटिकल कॉर्पोरेशन को बढ़ाना था।
डोनाल्ड ट्रंप की राह पर जो बाइडेन
ग्लोबल टाइम्स ने नेशनल स्ट्रेटजी इंस्टीट्यूट शिंहुआ यूनिवर्सिटी के रिसर्च डिपार्टमेंड के डायरेक्टर Qian Feng के हवाले से लिखा है कि 'इस मिलिट्री एक्सरसाइज से जाहिर होता है कि जो बाइडेन प्रशासन भी भारत के साथ डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की तरह की मिलिट्री और एशिया की राजनीती को आगे बढ़ाने वाला है' ग्लोबल टाइम्स के जरिए चीन का डर इस बात से भी जाहिर होता है कि 'इंडो पैसिफिक रीजन के लिए राष्ट्रपति बनने के बाज जो बाइडेन ने भारत को ही उसका 'कैप्टन' माना है।
जो बाइडेन प्रशासन इस बात को मानने के लिए बाध्य है कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में अगर अमेरिका अपना प्रभुत्व बनाना चाहता है और अगर चीन को रोकना चाहता है तो उसे भारत पर ही निर्भर रहना होगा'। ग्लोबल टाइम्स अपनी रिपोर्ट में ये भी कहता दिख रहा है कि जो बाइडेन प्रशासन भारत के साथ अमेरिका के संबंधों को और बढ़ाने के लिए काफी सीरियस है। हालांकि, ग्लोबल टाइम्स अपने दिल को सांत्वना देते हुए ये भी कहता दिख रहा है कि अमेरिका चीन के लिए भारत को सिर्फ मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाहता है।

भारत के लिए डोनाल्ड ट्रंप फायदेमंद
चीन की बौखलाहट और भारत को दिए उसके नसीहत को लेकर हमने इंस्टीट्यूट ऑफ डिप्लोमेसी एंड इंटरनेशनल अफेयर के प्रोफेसर डॉ. मनन चतुर्वेदी से बात की। तो उन्होंने कहा कि जो बाइडेन प्रशासन का रूख अभी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है लेकिन अगर इंडो पैसिफिक रीजन की बात करें तो डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के पक्ष में थी। डोनाल्ड ट्रप ने चीन के खिलाफ 'विद्रोही रवैया' अपनाया था। जो पूरी तरह से भारत के हित में था। डॉ. मनन चतुर्वेदी कहते हैं कि भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए स्पष्ट पॉलिसी बनाने की जरूरत है। डॉ. मनन चतुर्वेदी के मुताबिक 'डोनाल्ड ट्रंप सीधे तौर पर इंडो पैसिफिक रीजन का नाम लेते थे लेकिन जो बाइडेन ने एशिया पैसिफिक क्षेत्र का जिक्र किया है जो भारत के लिहाज से ठीक नहीं है। ऐसे में भारत को चाहिए कि बाइडेन प्रशासन को डोनाल्ड प्रशासन की तरह ही इडो-पैसिफिक क्षेत्र पर फोकस करने का आग्रह करे'।

क्या है हिंद प्रशांत क्षेत्र?
हिन्द महासागर के कुछ क्षेत्र और प्रशांत महासाग के कुछ क्षेत्र को मिलाकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र कहते हैं। हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के सीधे जल ग्रहण क्षेत्र में आने वाले देशों को इंडो-पैसिफिक देश कहा जाता है। भारत के लिए हिंद प्रशांत क्षेत्र रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्वी एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापार, आर्थिक विकास और समुन्द्री सुरक्षा में भागीदारी निभाने के लिए हिंद प्रशांत क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
हिंद महासागर इकलौता ऐसा महासागर है जिसका नाम भारत के नाम पर है लेकिन वर्तमान में हिंद महासागर में हो रहे बदलावों को लेकर भारत ज्यादा गंभीर नहीं है लेकिन हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भारत सरकार काफी ज्यादा गंभीर दिखाई देती है। भारत हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभुत्व कायम करने के साथ शांति, स्थिरता और मुक्त व्यापार (Free Trade) को बढ़ावा देने का पक्षधर है। वहीं चीन 'वन बेल्ट वन रोड' के माध्यम से विश्व की महाशक्ति के रूप में अपनी पहचान बनाने के लिए दुनिया के अलग अलग देशों में इन्फ्रास्टक्चर और कनेक्टिविटी का विकास कर रहा है। चीन की इस पहल का मकसद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित भी करना है।
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