Video: अंतरिक्ष में रचा गया इतिहास, पहली बार NASA ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में उगाई मिर्च

नई दिल्ली, 17 जुलाई: अब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर धीरे-धीरे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भोजन से जुड़ी समस्या को खत्म करने पर काम किया जा रहा है। ऐसे में अब अंतरिक्ष में मिर्च ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि नासा ने अंतरारष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में मिर्च सफलतापूर्वक मिर्च का उगा ली है। नासा के चिली प्लांट हैबिटैट-04 अध्ययन के लिए 48 हैच मिर्च का एक बैच इंटरनेशन स्पेस स्टेशन भेजा गया, जो 5 जून को स्पेसएक्स कार्गो जहाज ऑर्बिट (कक्षा) पर पहुंचा। लगभग एक महीने के बाद लाल और हरी मिर्च में वहां इजाफा होने लगा है। स्पेस में भेजे गए बीज एस्पानोला इम्प्रूव्ड न्यूमेक्स (न्यू मैक्सिको) हैच ग्रीन चिलीज हैं, जिन्हें नियमित रूप से हरे रंग में खाया जाता है और लाल होने पर बारीक पाउडर बनाया जाता है।

मिर्ची की खेती हो रही शुरू

मिर्ची की खेती हो रही शुरू

अब यह कहना आसाना होगा कि कुछ महीनों में पूरी तरह से विकसित लाल और हरी मिर्च अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अंतरिक्ष यात्रियों की स्वाद को लुभाने वाली है। नासा के अंतरिक्ष यात्री शेन किम्ब्रू ने प्रयोग शुरू किया। किम्ब्रू एक फ्लाइट इंजीनियर है, जो सात-सदस्यीय एक्सपेडिशन 65 क्रू का हिस्सा है। उनको अंतरिक्ष में फसल उगाने का पिछला अनुभव है। मिर्च को एडवांस्ड प्लांट हैबिटेट (APH) नामक उपकरण में उगाया जाता है। एपीएच उन तीन पौधों के विकास कक्षों में से एक है, जो नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर इस्तेमाल किया जाता है। 180 से अधिक सेंसर से लैस, एपीएच नमी के स्तर, कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर, तापमान, प्रकाश जैसी चीजों को नियंत्रित करता है ताकि पौधे पृथ्वी की तरह ही अंदर बढ़े।

अंतरिक्ष यात्री शेन किम्ब्रू कर रहे देखरेख

अंतरिक्ष यात्री शेन किम्ब्रू कर रहे देखरेख

मिर्च ने अत्यधिक नियंत्रित वातावरण में स्थिरता का प्रदर्शन किया। कुछ महीनों में अंतरिक्ष यात्री अपने खाने में हरी और लाल मिर्च का इस्तेमाल करेंगे। वर्तमान में अंतरिक्ष यात्री शेन किम्ब्रू इस प्रयोग की देखभाल कर रहे हैं। शेन पहले भी इस तरह के प्रयोगों का हिस्सा रह चुके हैं। 2016 में उन्होंने अंतरिक्ष में उगने वाले रेड रोमैन लेट्यूस की खेती की थी। उन्होंने प्लांट हैबिटेट-04 प्रयोग भी शुरू किया। हालांकि शेन इस प्रयोग के परिणाम नहीं देख पाएंगे, क्योंकि जब तक मिर्च तैयार होगी तब तक वह स्पेस से नीचे यानी धरती पर आ जाएंगे।

माइक्रोग्रैविटी में रहने से होते हैं साइड इफेक्ट

माइक्रोग्रैविटी में रहने से होते हैं साइड इफेक्ट

माइक्रोग्रैविटी में रहने से साइड इफेक्ट होते हैं, जैसे स्वाद और गंध का अस्थाई रूप से चले जाना। इसके कारण मसालेदार भोजन अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ठीक होता है। नासा के एक बयान में प्लांट हैबिटेट-04 प्रोजेक्ट की टीम लीड लाशेल स्पेंसर ने कहा कि माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव, प्रकाश की गुणवत्ता, तापमान और रूट जोन की नमी पूरी तरह से मिर्च के स्वाद और बनावट को प्रभावित करेगी। यह देखना आकर्षक होगा कि फल कैसे उगेंगे और स्वाद कैसा होगा।

अब तक के सबसे जटिल प्लांट

अब तक के सबसे जटिल प्लांट

लंबी अंकुरण और बढ़ती अवधि की वजह से PH-04 प्रोजक्ट को अंतरारष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अब तक के सबसे जटिल संयंत्र प्रयोगों में से एक माना जा रहा है। पिछले प्रोजेक्ट में अंतरिक्ष यात्रियों ने स्पेस में उगाए गए रेड रोमैन लेट्यूस, मिजुना सरसों, मूली और अन्य दो प्रकार के सलाद को अपने खाने में लिया था। उन्होंने झिननिया जैसे फूल वाले पौधे भी उगाए हैं। अंतरिक्ष यात्री अंतिम बार फसल काटने से पहले लगभग चार महीने तक मिर्च उगाएंगे।

मानव मिशन भेजने से पहले खाने की तैयारी

मानव मिशन भेजने से पहले खाने की तैयारी

आपको बता दें कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा मंगल पर मानव मिशन भेजने की तैयारी में है। अब जब अंतरिक्ष का यह प्रोजेक्ट गति पकड़ रहा है और चंद्रमा और मंगल के लिए क्रू मिशन की योजना बनाई जा रही है। ऐसे में स्पेस स्टेशन पर स्थानीय रूप से अधिक भोजन बढ़ाना एक महत्वपूर्ण कदम है। बताया जा रहा है कि मंगल पर जाने और वहां से वापस आने की यह यात्रा 3 साल लंबी हो सकती है। इतने लंबे मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को खाने से जुड़ी परेशानी हो सकती है। ऐसे में ऐसे आवश्यक कदम उठाने बेहद जरूरी है।

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