मदरसों में बच्चों को दी जाती है आतंकी बनने की तालीम, UN रिपोर्ट में पाकिस्तान पर दुनिया को चेतावनी

रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान दुनिया से झूठ बोल रहा है, वो अफगानिस्तान के नये जेनरेशन को कट्टरपंथी शिक्षा देकर बर्बाद कर देगा।

इस्लामाबाद/काबुल, अक्टूबर 05: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मदरसों में तालीम के नाम पर छोटे-छोटे बच्चों को कट्टरपंथी और आतंकवादी बनाए जा रहे हैं। यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (EFSAS) के एक शोध विश्लेषक ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान में स्थिति मजहबी स्कूलों के ऊपर खुलासा करते हुए कहा कि, इन दोनों देशों में आतंकवादियों की फैक्ट्री चलाई जा रही है।

मदरसों पर खुलासा

मदरसों पर खुलासा

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की बैठक के 48वें सत्र में वर्चुअल भाषण देते हुए ईएफएसएस की ऐनी हेकेंडॉर्फ ने कहा कि, "यह सर्वविदित है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का खतरा बड़े पैमाने पर मजहबी स्कूलों, मदरसों से बढ़ा है। ये स्कूल अक्सर बार-बार आते हैं। इन स्कूलों में इस्लाम की एक विकृत, काफी ज्यादा कट्टरपंथी व्याख्या की जाती है और ऐसे स्कूल काफी ज्यादा संख्या में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में चल रहे हैं, जहां से बच्चों को आतंकवादी की एबीसीडी पढ़ाई जाती है।" यूनाइटेड नेशंस में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा गया है कि, तालिबान और हक्कानी नेटवर्क में जो आतंकवादी हैं, उन्होंने भी मदरसों से ही पढ़ाई की है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आतंकियों की पाठशाला

आतंकियों की पाठशाला

ईएफएसएस की ऐनी हेकेंडॉर्फ ने कहा कि, "तालिबान और खूंखार हक्कानी नेटवर्क भी पाकिस्तान में स्थिति ऐसे ही मदरसों से पैदा हुए हैं। लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) और अन्य आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा जाता है और ये सभी अलग अलग मदरसों के जरिए आतंकवादियों के कारखानों को चलाते हैं। इन आतंकियों को पाकिस्तान की काफी शक्तिशाली खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि, ''पाकिस्तान और अफगानिस्तान में कई अवैध 'मदरसे' या धार्मिक स्कूल हैं जो युवाओं को 'जिहाद' या 'पवित्र युद्ध' के लिए मजबूर करते हैं। वे उन्हें दूसरे धर्मों के खिलाफ नफरत सिखाते हैं और उन्हें बंदूक संस्कृति की ओर प्रेरित करते हैं।

झूठ बोल रहा है तालिबान

झूठ बोल रहा है तालिबान

हेकेंडॉर्फ ने यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन रिसोर्स काउंसिल को बताया कि, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को तालिबान के शिक्षा के झूठे वादों से खुश नहीं होना चाहिए। स्कूली शिक्षा का क्या मूल्य है और शिक्षा के जरिए देश को शांति के रास्ते पर कैसे ले जाया जाता है, या फिर शिक्षा के जरिए देश में कार्यबल का कैसे विकास किया जाता है, इससे तालिबान को मतलब नहीं है। उनकी शिक्षा में दूसरे धर्मों के खिलाफ नफरत भरा हुआ है, वो जिहाद के नाम पर दूसरों को मार देने की बात सिखाते हैं और उनकी शिक्षा में घृणा, द्वेष भरा हुआ है।'' उन्होंने कहा कि, ''तालिबान की आर्थिक स्वतंत्रता की कमी और उनके संरक्षक राज्य के बगल में एक चांदी की परत है, जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को लाभ देता है। इसका उपयोग युवा अफगानों की एक और पीढ़ी को मदरसा में दी जाने वाली नस्लीय कट्टरपंथ के नुकसान को रोकने के लिए किया जाना चाहिए"।

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