क्या दोबारा राष्ट्रपति बन पाएंगे जो बाइडेन? जानिए कैसे होता है अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव
जो बाइडेन ने 'मेक अमेरिका क्रेट अगेन' से जुड़े चमरपंथियों का समर्थन करने पर ट्रम्प की आलोचना की। इस दौरान कैपिटल हिल हमले का भी उन्होंने जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह एक बार फिर अमेरिका की आत्मा के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन दोबारा राष्ट्रपति चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को एक वीडियो जारी कर 2024 राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी दावेदारी का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए उन्हें एक बार फिर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
80 साल के जो बाइडन का एक बार फिर से चुनाव लड़ना लोगों को हैरान कर रहा है। गौरतलब है कि बाइडन की उम्र को लेकर विपक्षी पहले से सवाल उठाते रहे हैं। अगर बाइडेन एक बार फिर से राष्ट्रपति बनने में सफल होते हैं तो दूसरे कार्यकाल के आखिर तक उनकी उम्र 86 साल हो जाएगी।
जो बाइडेन जो पहले से ही कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, अगले 5 साल तक आसानी से सत्ता चला पाएंगे इसकी उम्मीद कई डेमोक्रेट्स सदस्यों को भी नहीं है। इसके साथ ही उनकी याद्दाश्त को लेकर भी उनका कई बार मजाक बन चुका है। इसके अलावा महंगाई, मास शूटिंग जैसी चीजें हैं जिस पर बाइडेन घिर सकते हैं।
अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया
यदि आप भारत में होने वाले चुनावों की तर्ज पर अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव को समझने की कोशिश करेंगे तो बुरी तरह से असफल होंगे। दोनों ही देशों में चुनावी प्रक्रिया बिल्कुल अलग है। अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर मुख्यतः दो पार्टियों में लड़ाई होती है।
अमेरिका में दो प्रमुख पार्टियां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक हैं। दोनों ही पार्टियों में उनके सदस्य राष्ट्रपति पद के लिए दावा ठोक सकते हैं। पार्टियों में उम्मीदवार बनने की चाहत रखने वाले सदस्य हर राज्य में जनता के बीच जाते है और प्राइमरी और कॉकस चुनाव का हिस्सा बनते हैं।
प्राइमरी और कॉकस चुनाव में जीतने वाला उम्मीदवार ही दोनों पार्टियों की ओर से औपचारिक उम्मीदवार बनाया जाता है। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ के औपचारिक रूप से उम्मीदवारों की घोषणा के बाद शुरू होती है।
अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जीतने वाले दोनों उम्मीदवार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ते हैं। दोनों ही दलों के प्रत्याशी देशभर में अपने-अपने एजेंडे के साथ एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं। वोटिंग के छह हफ्ते पहले दोनों उम्मीदवारों के बीच टीवी पर राष्ट्रपति पद के लिए तीन बार बहस होती है।
जो उम्मीदवार सभी राज्यों में सबसे ज्यादा वोट हासिल करता है वह राष्ट्रपति बनने के योग्य होता है। अमेरिका के चुनाव में इलेक्टोरल कॉलेज सिस्टम बेहद अहम है। यह लोगों का समूह होता है जो 538 इलेक्टर्स को चुनता है। जिसे 270 इलेक्टर्स का समर्थन मिल जाता है, वह अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बनता है।
538 इलेक्टर्स में 435 रिप्रेजेंटेटिव्स, 100 सीनेटर्स और तीन डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के इलेक्टर्स होते हैं। आपको बता दें कि नवीनतम जनगणना के मुताबिक जितनी आबादी होती है उसी के आधार पर प्रत्येक राज्य में निश्चित संख्या में इलेक्टर्स होते हैं।












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