कनाडा बनेगा पाकिस्तान! जस्टिन ट्रूडो की खतरनाक नीति, खालिस्तानी कैसे बन रहे हैं दुनिया के लिए खतरा?

Canada Khalistan: इतिहास के शांत कोनों में, एक डरावनी कहानी मौजूद है, कि कैसे खालिस्तान की मांग, जो एक हिंसक अलगाववादी घटना में तब्दील हो गया था, उसके बीज राजनीतिक प्रतिष्ठान के करीबी लोगों द्वारा ही बोए और पोषित किए गए थे।

यह शक्ति, महत्वाकांक्षा और विश्वासघाती गठबंधन की कहानी है, जिसके कारण राजनीतिक लाभ के लिए करिश्माई उपदेशक से उग्रवादी नेता बने जरनैल सिंह भिंडरावाले की भर्ती की गई। जैसा कि देश ने देखा, भारत की राजनीतिक दिग्गज कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अनजाने में उसी राक्षस को पाला-पोसा, जो आखिरकार 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की दुखद हत्या का कारण बना।

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उस अशांत इतिहास के निशान आज भी भारत की स्मृति में शेष है, जो हमें परेशान करते हैं। लेकिन, जैसे-जैसे इतिहास की काली परछाइयां बढ़ती जा रही हैं, दुनिया अक्सर खालिस्तानी खतरे की सीमा से बेखबर रही है और इसे भारत-केंद्रित समस्या के देखना शुरू कर रही है।

दुनिया उस इतिहास से भी सबक सीखने के लिए तैयार नहीं है, कि कैसे इसी तरह से चरमपंथियों को पालते पालते पाकिस्तान बदहाल हो गया और अब उसके पास खाने के लिए दो रोटी तक नहीं है। दुनिया इस बात से भी सबक सीखने को तैयार नहीं है, कि चरमपंथियों को पालने की ही नतीजा था, जो कभी तालिबान, कभी अलकायदा, तो कभी आईएसआईएस की शक्ल में इंसानियत का खून बहाता रहा।

खालिस्तानियों को पालता पश्चिम!

खालिस्तानियों को लेकर दुनिया का भ्रम पहली बार तब टूटा था, जब 1985 में टोरंटो से लंदन जा रहे एयर इंडिया के विमान में हुए भीषण विस्फोट में 329 निर्दोष लोगों की जान चली गई।

यह एक डरावनी याद दिलाने वाली बात है, कि खालिस्तानी आतंकवाद की भी, अलकायदा या फिर आईएसआईएस की ही तरह कोई सीमा नहीं है।

फिर भी, पश्चिमी देश, जो अपनी शातिर इरादों के लिए कुख्यात रहा है, और जिसका अतीत भारत को परेशान करने के लिए कुख्यात रहा है, वो फिर से खालिस्तानियों को लेकर खामोश है। खामोश नहीं, बल्कि खालिस्तानियों को पालने-पोसने में व्यस्त है।

लिहाजा, खालिस्तानी उग्रवाद का भूत एक बार फिर कनाडा में अपना सिर उठा रहा है, जहां अलगाववादी समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने एक विवादास्पद खालिस्तान जनमत संग्रह का आयोजन किया, जिसने एक सुलगते मुद्दे को फिर से जन्म दे दिया है, जिसने कई देशों को परेशान कर दिया और हजारों लोगों की जान ले ली।

यानि, आतंक की उस कहानी को फिर से लिखा जा रहा है, जो हजारों बेगुनाहों की जान ले चुका है।

कनाडा बनेगा पाकिस्तान!

जी20 शिखर सम्मेलन में भारत पहुंचे कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जब भारत पहुंचे, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें उस खतरे से आगाह कराया, जो खुद कनाडा के लिए खतरनाक है।

कनाडा के प्रधानमंत्री के साथ भारत कूटनीति में जिस वक्त व्यस्त था, उस वक्त कनाडा के सरे शहर के एक गुरूद्वारे में खालिस्तानियों ने जनमत संग्रह कराया। ये वही गुरुद्वारा है, जिसका प्रमुख एसएफजे के हरदीप सिंह निज्जर था, जिनकी 18 जून को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

ये कुछ ऐसा ही है, जैसे पाकिस्तान में होता है। पाकिस्तान के मस्जिदों में भारत विरोधी भावनाओं का संचार किया गया और पाकिस्तान की हर नई पौध को जहरीला बनाया गया, जिसका नतीजा आज पाकिस्तान, बर्बाद होकर भुगत रहा है। पाकिस्तान देख रहा है, कि कैसे वो जहर, हर दिन विस्फोट की सूरत में बेगुनाहों को बारूद से उड़ा रहा है।

कनाडा के सामने भारत बार बार चेतावनी की घंटी बजा रहा है, लेकिन हर बीतते दिन के साथ ये साफ होता जा रहा है, कि कनाडा सरकार की कार्रवाई का आश्वासन सिर्फ एक मायावी सपना है।

नई दिल्ली आए कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद भारत की दलीलों पर जो उदासीनता दिखाई है, वो खामोशी का शंखनाद करता है, कि कनाडा बारूद का ढेर बिछा रहा है, जिसमें एक दिन सिर्फ तिली लगाने भर की जरूरत होगी।

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पश्चिम की खतरनाक खामोशी

20 मार्च 2023 को दुनिया ने अराजकता और विनाश का बेशर्म तमाशा देखा, जब खालिस्तानी कट्टरपंथियों की भीड़ ने लंदन में भारतीय उच्चायोग पर अपना गुस्सा निकाला।

बमुश्किल एक दिन बाद, सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास भी इसी तरह के हमले का शिकार हो गया। तब वाशिंगटन में भारतीय दूतावास पर आतंक का साया मंडरा रहा था, लेकिन हमारी सतर्क गुप्त सेवाओं ने इस नापाक साजिश को नाकाम कर दिया।

ये चौंकाने वाली घटनाएं इस बात की याद दिलाती हैं, कि पुनर्जीवित खालिस्तान आंदोलन अब सिर्फ भारत के लिए चिंताजनक नहीं रहा, क्योंकि भारत का पंजाब अभी भी शांत है। लेकिन, खालिस्तानियों के रूप में विषैला सांप कनाडा के शरीर से लिपटा हुआ है।

खालिस्तानियों की इस कट्टरवाद का केंद्र, अलगाववाद का यह टिंडरबॉक्स, पंजाब नहीं बल्कि कनाडा है।

दुनिया इस खतरनाक वास्तविकता से आंखें मूंदने का जोखिम नहीं उठा सकती। प्रधान मंत्री ट्रूडो, अब कदम उठाने का समय आ गया है, इससे पहले की वो विषैला सांप कनाडा के पैरों को डंसकर उसे सड़ा दे।

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, यदि आप ऐसा नहीं करेंगे, तो खालिस्तानी उग्रवाद की लपटें भारत को नहीं, बल्कि कनाडा को अपनी चपेट में ले सकती हैं। खतरा वास्तविक है, और यह आपके दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, बचा लीजिए कनाडा को, इससे पहले की ये पाकिस्तान बन जाए।

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