कनाडा में आंदोलनकारियों ने बनाया 'सिंघू बॉर्डर', भारत को 'ज्ञान' देने वाले पीएम ट्रूडो कुचलेंगे प्रदर्शन?
देश में जारी प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में बयान दिया है और कहा है कि, ओटावा में हो रहे ट्रक ड्राइवर्स के विरोध को समाप्त होना चाहिए।
ओटावा, फरवरी 08: भारत में जब किसान आंदोलन चल रहा था, उस वक्त भारत को लोकतंत्र को लेकर ज्ञान देने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पहले तो प्रदर्शनकारियों के डर से फरार हुए और अब सैनिकों के जरिए प्रदर्शन को कुचलने की तैयारी में जुट गये हैं। कनाडा में ट्रक ड्राइवर्स का प्रदर्शन लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रदर्शन अब बेकाबू होता जा रहा है और अब जस्टिन ट्रूडो लोकतंत्र को भूलकर लाठीतंत्र का इस्तेमाल करने का विचार कर रहे हैं।

कनाडा में ट्रक ड्राइवर्स का प्रदर्शन
कनाडा में पिछले एक हफ्ते से करीब 50 हजार से ज्यादा ट्रक ड्राइवर्स का प्रदर्शन चल रहा है और प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को समझ नहीं आ रहा है, कि आखिर प्रदर्शनकारियों से कैसे निपटा जाए। दूसरे देशों में होने वाले प्रदर्शन को लेकर 'ज्ञान' देने वाले प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अब खुद लोकतंत्र को ताक पर रखकर दूसरे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। वहीं, कनाडा के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, अगर ये प्रदर्शन और लंबा खिंचता है, तो जस्टिन ट्रूडो की प्रधानमंत्री की कुर्सी भी जा सकती है। कनाडा के बड़े सिख नेता जगमीत सिंह ने तो ये भी कह दिया है, कि ट्रक ड्राइवर्स जस्टिन ट्रूडो की सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते हैं।

जस्टिन ट्रूडो ने संसद में दिया बयान
देश में जारी प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में बयान दिया है और कहा है कि, ओटावा में हो रहे ट्रक ड्राइवर्स के विरोध को समाप्त होना चाहिए। उन्होंने इसके पीछे देश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय निवासियों के सामने आने वाली मुश्किलों का हवाला दिया है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार शाम कनाडा की संसद में एक भाषण में कहा कि, "प्रदर्शनकारी हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे लोकतंत्र और हमारे साथी नागरिकों के दैनिक जीवन में परेशानी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और इसे रोकना होगा।" वहीं, एक और अन्य टूट में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि, प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए बड़े पैमाने पर केन्द्रीय पुलिस को तैनात किया गया है।

प्रदर्शनकारियों पर होगी कार्रवाई?
प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्वीट में कहा है कि, ''कनाडा के लोगों को प्रदर्शन करने और सरकार से असहमत होने का अधिकार है और अपनी बात सरकार के सामने रखने का भी अधिकार है, लेकिन उन्हें कनाडा की अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र और नागरिकों को परेशान करने का अधिकार नहीं है और उन्हें ये बंद करना होगा''। कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि, 'ओटावा में हजारों केन्द्रीय पुलिस जवानों को तैनात किया गया है, जो ओटावा पुलिस की मदद करेगी।'

क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं हजारों प्रदर्शनकारी?
कनाडा में करीब 50 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी कोविड-19 वैक्सीन की अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने 29 जनवरी से देश की राजधानी में प्रदर्शन शुरू किया था और प्रदर्शनकारियों ने शहर के बाहर सड़कों को जाम कर दिया है और टेंट और अस्थाई झोपड़ी बनाकर राजधानी को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया है। कनाडा में ट्रक ड्राइवर्स उसी तरह से प्रदर्शन कर रहे हैं, जिस तरह से भारत में किसानों का आंदोलन चल रहा था और उस वक्त कनाडा के प्रधाननमंत्री ने भारत को लोकतंत्र की नसीहत दी थी, लेकिन अब जब कनाडा में ही प्रदर्शन हो रहा है, तो जस्टिन ट्रूडो को देश के विकास की बात याद आ रही है।

राजधानी ओटावा में आपातकाल लागू
वहीं, देश की राजधानी में पिछले 9 दिनों से चल रहे प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने ओटावा में आपातकाल की घोषणा कर दी है। ओटावा के मेयर ने स्थिति को 'ऑउट ऑफ कंट्रोल' बताया है। उन्होंने कहा कि, 'राजधानी में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए स्टेट ऑफ इमरजेंसी लागू किया गया है'। उन्होंने हा कि, प्रदर्शन के दौरान राजधानी के लोगों की सुरक्षा के लिए आपातकाल लगाने की घोषणा की गई है। ओटावा के मेयर ने राजधानी की स्थिति को पूरी तरह से काबू से बाहर बताया है और ट्रक ड्राइवर्स के आंदोलन को 'असंवेदनशील' करार दिया है।
जस्टिन ट्रूडो ने दिया था भारत को ज्ञान
भारत में जब किसान आंदोलन चल रहा था, उस वक्त जस्टिन ट्रूडो ने मोदी सरकार को नसीहत दे डाली थी, जिसे भारत सरकार ने आंतरिक मामलों में दखल बताया था। जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि, 'अगर में किसानों के प्रदर्शन पर बात नहीं की और भारत से आने वाली किसान विरोधी खबरों पर चुप रहा, तो मुझे अफसोस होगा।' उन्होंने भारत में चल रहे किसान आंदोलन पर बोलते हुए स्थिति को 'चिंताजनक' कहा था और कहा था कि, हम किसानों के परिवार और उनके दोस्तों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा था कि, किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कनाडा हमेशा खड़ा रहेगा, लेकिन अब जब ट्रक प्रदर्शनकारियों का विरोध जस्टिन ट्रूडो के गले की हड्डी बन चुका है, तो अब वो भागते फिर रहे है और आंदोलनकारियों से बात तक करने को तैयार नहीं हैं।












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