Canada: 'देश छोड़ना पड़ सकता है', खालिस्तानियों पर चलेगा कार्ने सरकार का हंटर! 30 हजार लोगों को नोटिस

Canada लंबे समय से गैरकानूनी शरणार्थी समस्या से जूझ रहा है। लोग बेहतर लाइफ-स्टाइल और हाई इनकम जॉब्स के चक्कर में किसी भी शर्त पर कनाडा में घुसना चाहते हैं और घुसते रहे हैं। पिछली सरकार इनका इस्तेमाल अपना वोट बैंक बढ़ाने में करती रही लेकिन अब मार्क कार्ने की सरकार ने तय किया है कि इस तरह के शरणार्थी बनकर आए लोगों को कनाडा से वापस उनके देश भेजा जाएगा। जिसकी एक बड़ी तलवार खालिस्तानियों पर लटक रही है। कनाडा में रहकर वे भारत के खिलाफ जहर उगलते थे लेकिन मौजूदा सरकार ने उन पर कसावट शुरू कर दी है।

इमिग्रेशन बदले नियम

इसके लिए कनाडाई सरकार ने हजारों शरणार्थी आवेदकों को औपचारिक नोटिस भेजे हैं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई है। इन नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि नए और सख्त इमिग्रेशन नियमों के तहत कई लोग शरण (asylum) के लिए अपात्र हो सकते हैं। इस कदम के बाद आवेदकों और उनके लिए काम करने वाले वकालत समूहों में बेचैनी साफ दिख रही है।

Canada

30,000 लोगों को भेजे गए नोटिस

CBC News के मुताबिक, Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC) ने लगभग 30,000 लोगों को नोटिस (procedural fairness letters) भेजे हैं। नोटिस में कहा गया है कि वे लोग जरूरी पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते। साथ ही, उन्हें जवाब देने के लिए सीमित समय दिया गया है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये नोटिस तुरंत देश से निकालने (deportation) का आदेश नहीं हैं। लेकिन इसके बाद आगे की कार्रवाई जरूर शुरू हो सकती है।

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खालिस्तानियों पर भी पड़ सकता है असर

The Australia Today में छपी एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक इन नोटिस में कई भारतीय आवेदक भी शामिल हो सकते हैं। इनमें वे लोग भी हैं जो स्टूडेंट या टूरिस्ट वीजा पर कनाडा पहुंचे थे और बाद में खालिस्तान से जुड़े आधारों पर शरण मांगने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे कई दावे निराधार माने जा रहे हैं।

Bill C-12 से नियम हुए और सख्त

नए बदलाव Bill C-12 के तहत किए गए हैं। इस कानून के लागू होने से शरण मांगने की समय-सीमा और शर्तें काफी कड़ी हो गई हैं। खास बात यह है कि यह कानून 3 जून 2025 के बाद किए गए दावों पर भी पूर्वव्यापी (retroactive) तरीके से लागू होगा, जिससे जून 2020 के बाद कनाडा आने वाले लोगों पर असर पड़ेगा।

देर से आवेदन करने वालों पर सख्ती

नए नियमों के मुताबिक, जो लोग कनाडा पहुंचने के एक साल से ज्यादा समय बाद शरण के लिए आवेदन करते हैं, वे अब बोर्ड रेफरल के लिए अयोग्य हो सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग अमेरिका से अनियमित तरीके से सीमा पार करके आए हैं और 14 दिनों के अंदर दावा दर्ज नहीं करते, वे भी इस प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।

नोटिस में साफ चेतावनी: 'देश छोड़ना पड़ सकता है'

मीडिया द्वारा देखे गए पत्रों में साफ लिखा है कि अगर कोई आवेदक अयोग्य पाया जाता है, तो उसे "जितनी जल्दी हो सके कनाडा छोड़ना होगा।" अगर ऐसा नहीं किया गया, तो उन्हें निर्वासन (deportation) का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, उन्हें Pre-Removal Risk Assessment के लिए आवेदन करने का मौका मिलेगा, जिसमें वे अपने जोखिम को साबित कर सकते हैं।

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सरकार का तर्क vs आलोचकों की चिंता

कनाडा सरकार का कहना है कि इन कदम का मकसद प्रक्रिया को तेज करना और लंबित मामलों को खत्म करना है। लेकिन आलोचकों का मानना है कि इस कानून की पूर्वव्यापी प्रकृति (retroactive nature) कमजोर लोगों को कानूनी अनिश्चितता में डाल सकती है। यही वजह है कि अब हजारों आवेदक अपनी पात्रता साबित करने के लिए तेजी से कोशिश कर रहे हैं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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