कनाडा में आंदोलनकारियों ने खाई कसम, उखाड़ फेकेंगे जस्टिन ट्रूडो की सत्ता, इस्तीफे की मांग पर अड़े
राजधानी ओटावा के विंडसर नामक जगह, जहां प्रदर्शन चल रहा है, वहां के मेयर ओंटारियो ने कहा कि, कनाडा और अमेरिका को जोड़ने वाली एंबेसडर ब्रिज को प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह से जाम कर दिया है।
ओटावा, फरवरी 11: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को शायद अब समझ में आ रही होगी, कि लोकतंत्र में प्रदर्शन को रोकना कितना मुश्किल होता है। भारत को लोकतंत्र पर ज्ञान देने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने बड़ा ऐलान कर दिया है और कहा है कि, जब तक वो जस्टिन ट्रूडो की सत्ता को उखाड़ नहीं फेकेंगे, तबतक प्रदर्शन जारी रहेगा। कनाडा की राजधानी में 50 हजार से ज्यादा ट्रक ड्राइवर्स प्रदर्शन कर रहे हैं और अब प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

कनाडा में प्रदर्शन तेज
कनाडा में वैक्सीन की अनिवार्यता खत्म करने की मांग को लेकर ट्रक ड्राइवर्स का प्रदर्शन काफी तेज हो चुका है और ट्रक ड्राइवर्स एक साथ हजारों ट्रकों का हॉर्न बजाकर प्रदर्शन करते हैं, जिससे पूरी राजधानी गूंज उठती है। जनवरी के अंत से ही कनाडा में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध जारी है और अब ये विरोध प्रदर्शन बढ़कर अमेरिका की सीमा तक जा पहुंचा और कनाडा का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने ठीक उसी तरह का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है और रास्तों को जाम कर दिया है, जिस तरह से राजधानी दिल्ली में सीएए के खिलाफ आंदोलनकारियों ने और किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने किया था।
पूरी तरह जाम एंबेसडर ब्रिज
राजधानी ओटावा के विंडसर नामक जगह, जहां प्रदर्शन चल रहा है, वहां के मेयर ओंटारियो ने कहा कि, कनाडा और अमेरिका को जोड़ने वाली एंबेसडर ब्रिज को प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह से जाम कर दिया है, जिससे अमेरिका-कनाडा की सड़क सीमा पूरी तरह से बंद हो चुकी है। उन्होंने कहा कि, ब्रिज बंद होने से व्यापार पूरी तरह से बाधित हो गया है और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को अब पुलिस फोर्स के जरिए हटाने की चेतावनी दी है। इससे पहले प्रधानमंत्री ट्रूडो भी सैन्य कार्रवाई की धमकी दे चुके है और ये वही प्रधानमंत्री ट्रूडो हैं, जिन्होंने भारत में चल रहे किसान आंदोलन पर भारत को लोकतंत्र की दुहाई देते हुए भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप की थी। लेकिन, अब खुद लोकतंत्र को ताक पर रखकर सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

कैसे शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन?
आपको बता दें कि, जनवरी के अंत में "फ्रीडम कॉन्वॉय", जो पूरे कनाडा में ट्रकों को ऑपरेट करती है, उसने वैक्सीन की अनिवार्यता और जरूरी क्वारंटाइन का विरोध किया था। हालांकि, कनाडा के एक औद्योगिक समूह कैनेडियन ट्रकिंग एलायंस ने कहा कि वह सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन और सड़कों को ब्लॉक करने का विरोध करता है, लेकिन इसके बाद भी प्रदर्शन की रफ्तार बढ़ती गई और सरकार के खिलाफ ट्रक ड्राइवर्स का गुस्सा बढ़ता गया। धीरे धीरे ट्रक ड्राइवर्स कनाडा को अमेरिका से जोड़ने वाले सड़क पूल एंबेसडर ब्रिज को जाम करना शुरू कर दिया और ट्रक ड्राइवर्स का प्रदर्शन काफी व्यापक होता चला गया।

कनाडा सरकार क्या कर रही है?
कनाडाई अधिकारी ओटावा को प्रदर्शनकारियों के 'कब्जे' से 'आजाद' करवाने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं और अधिकारियों को उम्मीद है कि, ट्रक ड्राइवर्स के खिलाफ क्रिमिनल चार्जेज में मुकदमा दर्ज करने और उनके ट्रकों में पेट्रोल खत्म होने के बाद उनका प्रदर्शन खत्म हो जाएगा। हालांकि, ट्रक ड्राइवर्स अधिकारियों की इस उम्मीद को धता बताने की कोशिश में हैं। इसी हफ्ते कनाडा के एक अदालत ने प्रदर्शन को लेकर ट्रक ड्राइवर्स से लगातार हॉर्न नहीं बजाने के लिए कहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, वो शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व घुस आए हैं। जबकि, ओटावा शहर के लोगों का कहना है कि, उन्हें जान-बूझकर परेशान किया जा रहा है। वहीं, ओटावा में शोर फैलाने के जुर्म में अभी तक 12 से ज्यादा ट्रक ड्राइवर्स को गिरफ्तार किया गया है और 1300 से ज्यादा चालान काटे गये है।

प्रदर्शन को हल्के में लिया
कनाडा के राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि, कनाडा सरकार ने प्रदर्शन को काफी हल्के में लिया और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने प्रदर्शनकारियों को लेकर जो बयान दिए, वो इस बात की पुष्टि करता है। आपको बता दें कि, पीएम ट्रूडो ने प्रदर्शनकारियों को 'मुट्ठी भर चिल्लाने वाले लोग' और 'स्वास्तिक लहराने वाले' करार दिया था और उनकी इस विवादित टिप्पणी ने प्रदर्शन की आग में घी डालने का काम किया और विपक्ष ने उनके इस बयान को काफी अच्छी तरह से भुना लिया। वहीं, प्रधानमंत्री की पार्टी ने भी उनके इस बयान पर गहरी आपत्ति जताई और उनकी लिबरल पार्टी के कुछ सांसदों ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर दी। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के बयान को बेतुका बताते हुए कसम खाई है, कि वो तब तक प्रदर्शन करते रहेंगे, जब तक प्रधानमंत्री ट्रूडो इस्तीफा नहीं दे देते हैं।

पुलिस के लिए क्या विकल्प हैं?
कनाडा में यातायात को अवरुद्ध करने, अत्यधिक शोर करने और गाड़ियों को खतरनाक तरीके से चलाने को लेकर सख्त कानून बने हैं, लेकिन कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी और उनमें बच्चों के शामिल होने के बाद पुलिस के लिए कोई सख्त कार्रवाई करना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, अगर उन्होंने बल प्रयोग किया, तो स्थिति बिगड़ सकती है और बड़े पैमाने पर हिंसा हो सकती है, लिहाजा ज्यादातर पुलिस अधिकारी बल प्रयोग करने के खिलाफ नजर आ रहे हैं। हालांकि, पुलिस के पास ट्रक ड्राइवर्स का लाइसेंस निरस्त करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए पहले उनका चालान काटना होगा और दूसरा डर ये है, कि अगर उन्होंने ट्रक ड्राइवर्स का लाइसेंस रद्द कर दिया, तो फिर आगे जाकर भी जरूरी सामानों की सप्लाई कौन करेगा। कनाडा की सरकार देख चुकी है, कि ब्रिटेन में ट्रक ड्राइवर्स की कमी की वजह से हालात कितने खराब हो गये थे।
प्रदर्शन का असर
एक तरह प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं, दूसरी तरफ प्रदर्शन की वजह से कनाडा को करोड़ों का नुकसान तो हो ही रहा है, इसके साथ ही अब देश में जरूरी सामानों की कमी होने की आशंका भी गहराने लगी है। एंबेसडर ब्रिज जाम होने की वजह से कनाडा-अमेरिका के बीच करोड़ों डॉलर का व्यापार बाधित हो रहा है। वहीं, कनाडा में चल प्रदर्शन का असर न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और अमेरिका पर भी पड़ने की आशंका है और रिपोर्ट के मुताबिक, इन देशों के ट्रक ड्राइवर्स भी अब वैक्सीन मैंडेट के खिलाफ आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, एक स्वतंत्र सर्वे में करीब 62 प्रतिशत कनाडाई ने विरोध प्रदर्शन का विरोध किया है और कहा है कि, सभी लोगों को कोविड 19 के खिलाफ सरकारी उपायों का पालन करना चाहिए।












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