Canada में अब फहराए खालिस्तानी झंडे तो होगी जेल! सरकार लेकर आई भारत समर्थक कानून, किसको परेशानी?
Canada में अब खालिस्तानी कट्टरपंथी अब भारत विरोधी नारे और झंडे फहराकर भारतीयों के खिलाफ नफरत वाला माहौल नहीं बना पाएंगे। कनाडा की संसद के निचले सदन House of Commons of Canada ने एक अहम विधेयक पास किया है, जिसे आधिकारिक तौर पर 'नफरत विरोधी अधिनियम' (Combatting Hate Act) कहा जा रहा है। इस कानून के तहत अब आतंकवादी चिन्ह, जैसे बब्बर खालसा जैसे खालिस्तानी संगठनों के झंडे दिखाना और मंदिरों के बाहर लोगों को डराना या रोकना गैरकानूनी होगा। अब यह बिल आगे Senate of Canada में जाएगा और वहां भी यह पास होता है तो यह कानून बन जाएगा। जिसके बाद इस तरह के काम क्राइम माने जाएंगे और उनमें सजा का भी प्रावधान होगा।
आतंकवाद को बढ़ावा नहीं दे पाएंगे खालिस्तानी
इस नए कानून का मकसद आतंकवाद के प्रचार को रोकना है। अब कोई भी व्यक्ति खालिस्तानी झंडे लहराकर या उनसे जुड़े साहित्य को खुले में बांटकर आतंकवाद का महिमामंडन नहीं कर सकेगा। पहले लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर करते थे, लेकिन अब इस पर सख्ती होगी।

इन संगठनों पर सबसे ज्यादा असर
इस कानून का सीधा असर Babbar Khalsa International (BKI), Sikh For Justice (SFJ) और International Sikh Youth Federation (ISYF) जैसे संगठनों पर पड़ेगा। ये दोनों संगठन भारत और कनाडा में पहले से ही आतंकवादी घोषित हैं, लेकिन अब इनके लिए खुले तौर पर काम करना और मुश्किल हो जाएगा।
भारतीय समुदाय के लिए बड़ी राहत
इस बिल के पास होने को कनाडा में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। पिछले कई सालों से उन्हें खालिस्तानी कार्यकर्ताओं की वजह से परेशानी झेलनी पड़ रही थी, जिसमें मंदिरों के बाहर विरोध, रास्ता रोकना और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं शामिल थीं।
क्या है खालिस्तान आंदोलन?
खालिस्तान आंदोलन का मकसद भारत के पंजाब में सिखों के लिए एक अलग देश बनाना है। इस आंदोलन से जुड़े कुछ समूहों ने भारत में कई सालों तक हिंसक गतिविधियां चलाईं, जो 1990 के दशक में कमजोर पड़ गईं।
यहां से भगाया तो विदेशों में एक्टिव हुए खालिस्तानी
भारत में कमजोर पड़ने के बाद, ये समूह कनाडा जैसे देशों में सक्रिय हो गए। वहां उन्होंने धर्म और अभिव्यक्ति की आजादी का फायदा उठाकर अपनी गतिविधियां जारी रखीं और धीरे-धीरे मजबूत होते गए।
खालिस्तानियों ने बिगाड़े थे भारत-कनाडा के रिश्ते
कनाडा में इन समूहों की मौजूदगी और उनका राजनीति में प्रभाव, भारत और कनाडा के रिश्तों में लंबे समय से तनाव का कारण रहा है। खासकर खालिस्तानी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कई बार टकराव देखने को मिला है।
ट्रूडो के दौर में बढ़ा विवाद
पूर्व प्रधानमंत्री Justin Trudeau के समय यह विवाद और बढ़ गया था। 2023 में उन्होंने भारत पर Hardeep Singh Nijjar की हत्या का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने आतंकवादी घोषित किया हुआ था। इसके बाद उन्होंने भारतीय राजनयिकों को निष्कासित किया और भारत पर संगठित अपराध नेटवर्क चलाने जैसे आरोप लगाए, जिससे रिश्ते काफी खराब हो गए।
नए प्रधानमंत्री के साथ सुधार के संकेत
हालांकि, Mark Carney के प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदलते दिख रहे हैं। उनके कार्यकाल में भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत मिले हैं और दोनों देश नए सिरे से संबंध बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
क्या होगा नए कानून का असर?
यह नया कानून कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों पर बड़ा असर डाल सकता है। इससे न सिर्फ आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि आम लोगों, खासकर भारतीय मूल के लोगों को भी राहत मिल सकती है। साथ ही, इससे भारत-कनाडा संबंधों में भी सुधार आने की उम्मीद है।
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