कोरोना की 'वुहान लैब लीक थ्योरी' को ब्रिटिश इंजेलीजेंस ने भी माना, चीनी 'साजिश' का होगा पर्दाफाश?

लंदन, 30 मई। कोरोना वायरस के वुहान लैब लीक थ्योरी की बात सुनते ही तिलमिला उठता है। वो इसे चीन के खिलाफ साजिश बताता है लेकिन जांच के नाम पर भागने लगता है। लेकिन अब लगातार ऐसे अध्ययन सामने आने लगे हैं जिनमें यह कहा गया है कि यह वायरस लैब में ही तैयार हुआ है। ब्रिटेन के एक टॉप वैज्ञानिक के सनसनीखेज खुलासे के बाद अब ब्रिटिश इंटेलीजेंस ने भी इस बात पर सहमति जताई है कि मुमकिन है कि यह वायरस लैब में ही तैयार किया गया है।

वुहान लैब लीक थ्योरी पर ब्रिटिश खुफिया अधिकारी सहमत

वुहान लैब लीक थ्योरी पर ब्रिटिश खुफिया अधिकारी सहमत

डेली मेल की खबर के मुताबिक ब्रिटिश खुफिया अधिकारी अब मानते हैं कि यह संभव है कि कोरोना वायरस महामारी वुहान में एक लैब से लीक हुई है। कोरोना वायरस में चीन की संलिप्तता की जांच को लेकर नया घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कई अध्ययन इस ओर संकेत कर चुके हैं।

खुफिया अधिकारी अब इस संभावना की जांच कर रहे हैं कि क्या इस वैश्विक महामारी के पीछे चीन स्थित वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी जिम्मेदार है जिसने दुनिया में अब तक 35 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।

सूत्रों के मुताबिक आरंभ में पश्चिमी खुफिया एजेंसियों ने वायरस के प्रयोगशाला में तैयार होने की संभावना को खारिज किया था लेकिन हाल में इस थ्योरी की फिर से पुनर्मूल्याकंन किया गया जिसमें माना गया है कि ऐसा होना मुमकिन है।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी भी इस बारे में इनपुट इकठ्ठा कर रही है। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने खुफिया एजेंसियों से कहा था कि वे लैब लीक थ्योरी के साथ-साथ कोरोनावायरस के तैयार होने की अन्य संभावना को तलाश और 90 दिनों के भीतर उन्हें एक रिपोर्ट दें। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी भी अमेरिका के साथ मिलकर इस मामले में काम कर रही हैं।

चीन पर जांच के लिए तेज हो रही मांग

चीन पर जांच के लिए तेज हो रही मांग

ब्रिटेन की विदेश मामलों की चयन समिति के अध्यक्ष टॉम टगेंडट ने कहा 'वुहान से आ रही चुप्पी परेशान करने वाली है। हमें इस राज को खोलने और भविष्य में अपनी रक्षा करने में सक्षम होने के लिए, क्या हुआ यह देखने की जरूरत है। इसका मतलब है कि दुनिया भर के भागीदारों और डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर मामले की जांच शुरू करनी होगी।"

जांच में ब्रिटिश खुफिया एजेंसी के शामिल होने से परिचित एक पश्चिमी खुफिया सूत्र ने बताया है 'सबूतों की एक तह हो सकती है जो हमें एक दिशा में ले जा सकती है और कुछ सबूत ऐसे भी होंगे जो हमें दूसरी तरफ ले जाते हैं।" सूत्र के मुताबिक चीन अपनी आदत के अनुसार झूठ ही बोलेगा और इस मामले की सच्चाई कभी सामने आ पाना मुश्किल ही होगा।

वैक्सीन मंत्री नादिम जाहवी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की जांच होनी चाहिए जो महामारी की उत्तपत्ति के बारे में पूरी तरह से पता लगाने में सक्षम हो।

ब्रिटेन के टॉप वैज्ञानिक का दावा

ब्रिटेन के टॉप वैज्ञानिक का दावा

कोरोना वायरस के पीछे चीनी चाल होने की 'वुहान लैब लीक थ्योरी को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज हो गई है। एक दिन पहले ही ब्रिटेन के टॉप वैज्ञानिक ने दावा किया था कि उन्हें कोरोना वायरस वैक्सीन के निर्माण की कोशिश के दौरान वायरस में यूनिक फिंगरप्रिंट्स मिले थे जिन्हें लैब में ही तैयार किया जा सकता है। यही नहीं चीन ने इसे नेचुलली विकसित जैसा दिखाने के लिए रेट्रो इंजीनियरिंग के जरिए इसके ट्रैक को छिपाने की कोशिश भी की। इस पेपर को ब्रिटिश प्रोफेसर एंगुस डाल्गलिश और नार्वे के वैज्ञानिक डॉक्टर बर्जर सॉर्सन ने लिखा है जो जल्द ही सामने आ सकता है।

इस अध्ययन के निष्कर्षों को लिखने वाले ब्रिटिश प्रोफेसर एंगुस डाल्गलिश और नार्वे के वैज्ञानिक डॉक्टर बर्जर सॉर्सन ने लिखा है। इसमें कहा है कि उनके पास एक साल से चीन में प्रथम दृष्टया रेट्रो इंजीनियरिंग के सबूत थे लेकिन अकादमिक जगत और बड़े जर्नल्स ने इसकी उपेक्षा की।

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