बॉस को पर्सनल कमेंट करना पड़ा भारी, महिला कर्मचारी ने ठोक दिया केस, जीते 37 लाख रुपये
वर्कप्लेस पर किसी भी कर्मचारी के प्रति कोई व्यक्तिगत टिप्पणी करना और अभ्रद व्यवहार करने की सख्त मनाही होती है। इतना ही नहीं महिला कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल देने के लिए तमाम नियम भी कंपनियां लागू करती हैं लेकिन कई बार महिला शिकायत नहीं करेगी ऐसा सोच कर सह-कर्मचारी या बॉस ऐसी अभद्र टिप्पणी कर देते हैं लेकिन कई बार उन्हें लेने के देने पड़ जाते हैं।

हाल ही एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें बॉस महिला कर्मचारी पर कमेंट करना काफी भारी पड़ गया। महिला पर किए गए पर्सनल कमेंट के कारण उसे हर्जाने के तौर पर 37 लाख रुपये देना पड़ा।
बॉस ने किया था ये पर्सनल कमेंट
ये मामला स्कॉटलैंड की 49 वर्षीय कैरेन फ़ार्कुहार्सन का है जो 1995 से एक इंजीनियरिंग फर्म थील्स मरीन में कार्यरत थी। उसकी सलाना कमाई 38 लाख रुपये थी। उसकी कंपनी के डॉयरेक्टर जिम क्लार्क जो कैरेन के बॉस थे उस पर काम से बचने के लिए 'रजोनिवृत्ति ('menopause') का बहाना बनाने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं बॉस ने कैरेन की हेल्थ प्राब्लम को नजरंदाज करते हुए अभ्रद कमेंट किया और उसे नौकरी से निकाल दिया।
महिला ने कंपनी पर कर दिया केस
महिला कर्मचारी इस व्यवहार से भावानात्मक रूप से बहुत आहत हुई और उसे बिना किसी वजह से नौकरी से निकालने और उत्पीड़न करने को लेकर थीस्ल मरीन कंपनी पर केस कर दिया। महिला ने अपने 75 साल के बॉस को डॉयनासोर बताया क्योंकि वो समय के साथ नहीं चलते।
बॉस की महिला कर्मचारी ने खोल दी पोस्ट
49 वर्षीय महिला ने कहा मैं इस कंपनी में बीते 27 सालों से नौकरी कर रही लेकिन मेरे साथ बहुत ही गलत व्यवहार किया गया। मिस्टर क्लार्क को बदलाव नहीं पसंद था, वह समय के साथ नहीं चले, मैंने कई बातों को उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। कैरेन फ़ार्कुहार्सन ने बताया कि उसके बॉस अक्सर बीमार रहने वाले कर्मचारियों को 'स्नोफ्लेक्स' कहते थे।
महिला ने बीमारी बताई तो बर्खास्त कर दिया
महिला ने बताया कि दिसंबर 2022 में दो दिनों के लिए घर से काम करने का विकल्प चुना क्योंकि उन्हें 'रजोनिवृत्ति ('menopause') के दौरान रक्तस्राव हो रहा था। जब वह तीसरे दिन काम पर लौटी, तो उसके बॉस ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी। मैंने अपनी स्थिति बताई लेकिन उसने मुझे बर्खास्त कर दिया गया और कहा कि सभी लोग दर्द और पीड़ा से पीड़ित हैं। इसके बाद कैरेन ने कंपनी पर मुकदमा दायर किया।
कोर्ट ने दिया आदेश
ट्रिब्यूनल में उसके बॉस की दलीलों को नहीं सुना और जजों के पैनल ने कहा महिला के प्रति उन्होंने कोई सहानुभूति नहीं दिखाई और कंपनी से कैरेन को 37 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया।












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