ब्रिटिश पीएम ने G7 समिट के लिए पीएम मोदी को किया आमंत्रित, भारत को बताया ‘फार्मेसी ऑफ वर्ल्ड’

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को G7 समिट के लिए आमंत्रित किया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि भारत ‘फार्मेसी ऑफ वर्ल्ड’ है। भारत दुनिया का 50 प्रतिशत वैक्सीन का निर्यात करता है।

Pharmacy of The World: लंदन: इस साल जून में होने वाले G7 समिट से पहले ब्रिटेन (Britain) के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) ने भारत (India) को लेकर बड़ा बयान दिया है। बोरिस जॉनसन ने भारत को 'फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' बताया है। बोरिस जॉनसन ने कहा है कि अकेले भारत अकेले विश्व में उत्पादन होने वाली वैक्सीन (Vaccine) का पचास प्रतिशत विश्व के अलग अलग देशों को सप्लाई करता है।

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    BORIS JOHNSON

    दरअसल, इस साल जून में G7 का समिट होने जा रहा है, जिसे इस बार ब्रिटेन होस्ट करने वाला है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन भी G7 समिट में शिरकत करने वाले हैं और उससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा है कि वो G7 समिट से पहले भारत का दौरा करेंगे। बोरिस जॉनसन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बतौर अतिथि के तौर पर G7 समिट में आमंत्रित किया है। बोरिस जॉनसन ने कोरोना के खिलाफ भारत के काम की सराहना करते हुए कहा कि महामारी के इस दौर में भारत और इंग्लैंड ने बेहद करीब होकर एक दूसरे के साथ काम किया है। आपको बता दें कि G7 ग्रुप में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान हैं। G7 समूह का गठन 1975 में किया गया था, जिसका मकसद अर्थव्यवस्था को लेकर एक दूसरे का सहयोग करना था।

    दवा उद्योग में आत्मनिर्भर भारत

    आखिर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारत को 'फॉर्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' क्यों कहा है। जब आप ब्रिटिश प्रधानमंत्री के इस कथन पर गौर करेंगे तो आपको भारत पर गर्व महसूस हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अलग अलग बीमारियों की वैक्सीन के उत्पादन में भारत पूरी दुनिया में पहले पायदन पर आता है। विश्व का 50 प्रतिशत वैक्सीन अकेले भारत सप्लाई करता है। अमेरिका में सामान्य दवाईयों की मांग का 40% तो ब्रिटेन की कुल दवाओं की मांग का 25% से ज्यादा आपूर्ति भारत करता है। इसके अलावा विश्व भर में एड्स जैसी खतरनाक बीमारी के लिए इस्तेमाल होने वाली एंटी रेट्रोवायरल दवाओं की आपूर्ति 80% तक सिर्फ हिंदुस्तान करता है। साल 2017 तक भारतीय दवा उद्योग का घरेलू कारोबार करीब 18.87 अरब अमेरिकी डॉलर का था जिसमें 2018 में करीब 9.4% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा भारत विश्व को सबसे ज्यादा जेनरिक दवा उपलब्ध कराने वाला देश है। IMRC की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि 2025 तक भारत का वैक्सीन बाजार करीब 250 करोड़ रुपये का हो जाएगा जो 2019 में करीब 94 अरब रुपये का था।

    विश्व के लिए 'दवा का बाजार' है भारत

    मार्च 2020 में भारत सरकार ने दवा उद्योग के विकास के लिए 2025 तक अपनी GDP का 2.5 प्रतिशत दवा उद्योग में इनवेस्ट करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही भारत सरकार ने ग्रीन फील्ड फार्मा परियोजना के लिए ऑटोमेटिक रूट के तहत 100 प्रतिशत FDI को भी मंजूरी दे चुकी है। यानि, भारत सरकार का लक्ष्य दवा उद्योग में विश्व के तमाम देशों को काफी पीछे छोड़ देने की है। इसके अलावा भारत बायोटेक्नोलॉजी और बायो मेडिसिन के क्षेत्र में भी काफी तरक्की कर चुका है। साल 2025 तक भारत का बायोटेक्नोलॉजी उद्योग 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

    G7 समिट में बतौर गेस्ट मोदी आमंत्रित

    इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने प्रधानमंत्री मोदी को G7 समिट में बतौर अतिथि आमंत्रित किया है। 2019 में फ्रांस में हुए G7 समिट में भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए थे। दरअसल, अमेरिका और इंग्लैंड चाह रहा है कि G7 ग्रुप को विस्तार देते हुए भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी इसमें शामिल कर लिया जाए। पीएम मोदी से पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 5 बार बतौर अतिथि G7 में शामिल हो चुके हैं।

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