सीरिया में 'संघर्ष विराम' के बावजूद बरस रहे बम
सीरिया के पूर्वी शहर ग़ूता में बमबारी नहीं थमी है. विद्रोहियों के कब्जे वाले इस इलाके में सरकार और उसके सहयोगी रूस ने हर दिन पाँच घंटे के संघर्ष विराम पर सहमति जताई थी.
संघर्ष को रोकने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 30 दिन के संघर्षविराम पर सहमति बनी थी.
सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्यों ने प्रभावित इलाके में सहायता पहुंचाने और मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वोट किया.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने हवाई ताक़त और तोपखाने का इस्तेमाल किया, जबकि रूस ने कहा है कि विद्रोहियों ने उस इलाक़े में बमबारी की, जो इलाक़ा आम नागरिकों के बाहर निकलने के लिए छोड़ा गया है.
सीरिया की राजधानी दमिश्क के पास करीब तीन लाख 93 हज़ार आम नागरिक फसे हुए हैं. एजेंसियों का कहना है कि इस हफ़्ते की शुरुआत से ही सीरियाई सरकार ने राजधानी दमिश्क के नजदीक विद्रोहियों के कब्जे के वाले इलाके पूर्वी ग़ूता में बमबारी शुरू कर दी थी. इन हमलों में 500 से अधिक लोग मारे गए हैं.
इस बीच, फ्रांस ने रूस से आग्रह किया कि वो संघर्ष विराम को पूरे सीरिया में लागू करने के लिए सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के साथ अपने करीबी संबंधों का इस्तेमाल करे.
सीरिया में हो क्या रहा है?
मानवीय मामलों पर नज़र रखने वाले संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने कहा है कि उसे रूस के संघर्ष विराम की घोषणा करने के बावजूद वहां लड़ाई जारी रहने की ख़बरें मिली हैं.
जिनेवा में इस संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "स्पष्ट है कि ज़मीन पर हालात ऐसे नहीं हैं कि वाहनों का काफिला अंदर जा सके या फिर मेडिकल सेवाएं बाहर जा सकें."
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि उसके पास गंभीर रूप से बीमार और ज़ख्मी एक हज़ार लोगों की सूची है, जिन्हें तत्काल युद्धग्रस्त इलाके से बाहर निकाले जाने की आवश्यकता है.
इससे पहले, संघर्षविराम के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लंबी खींचतान देखने को मिली थी. गुरुवार को पेश किए गए प्रस्ताव को रूस ने मानने इंकार कर दिया था, वह उसमें कुछ संशोधन चाहता था.
रूस सीरियाई सरकार का समर्थन करता है, वह संघर्षविराम प्रस्ताव में बदलाव चाहता था, वहीं पश्चिमी राजनयिकों का कहना था कि रूस इस तरह की बातें करके समय बर्बाद कर रहा है.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी प्रतिनिधि निकी हैली ने कहा है कि संघर्षविराम को तुरंत प्रभाव से लागू कर देना चाहिए. हालांकि उन्होंने आशंका जताई कि सीरिया संघर्षविराम को लागू करने के लिए तैयार होगा इस पर संशय है.
वहीं संयुक्त राष्ट्र में रूस के दूत विताली चुर्किन ने कहा है कि संघर्षविराम का पालन तब तक संभव नहीं है जब तक संघर्ष में शामिल दोनों पक्ष उसे नहीं मानते.
सीरिया में संघर्ष पर नज़र रखने वाले ब्रिटेन स्थित समूह ऑब्ज़रवेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने बताया कि शनिवार देर रात जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में संघर्षविराम पर आम सहमति बनी उसके कुछ मिनट बाद ही पूर्वी ग़ूता में हवाई हमला किया गया.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेश कह चुके हैं कि पूर्वी ग़ूता में नर्क जैसे हालात हो गए हैं.
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