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Bilawal Bhutto: छोटी उम्र में मां को खोया, हिना रब्बानी संग रिश्ता टूटा.. काफी दर्दनाक रही है बिलावल की जिंदगी

बिलावल भुट्टो की मां बेनजीर भुट्टो थीं, जिनका साल 2007 में आतंकियों ने एक बम धमाके में हत्या कर दी थी। वहीं, उनके पिता का आसिफ अली जरदारी है, जिनकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा जेल में गुजरा।

Bilawal Bhutto Personal Life

Bilawal Bhutto Personal Life: पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में हिस्सा लेने के लिए भारत में हैं और ये बिलावल भुट्टो की पहली भारत यात्रा है। पाकिस्तान के बड़े राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने वाले बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा सुर्खियों में हैं और लोग बिलावल की जिंदगी के उन पहलुओं को जानने में काफी दिलचस्पी रखते हैं, जो अभी तक कम लोग जानते हैं।

बिलावल भुट्टो की निजी जिंदगी काफी उथल-पुथल रही है और बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके जन्म को इतना खुफिया रखा गया था, कि ना तो पाकिस्तान की सेना और ना ही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को पता लग पाया था, कि बेनजीर भुट्टो मां बनने वाली हैं।

Bilawal Bhutto Personal Life

पाकिस्तानी सेना बिलावल भुट्टो के जन्म का सियासी फायदा उठाना चाहती थी, लेकिन बेनजीर भुट्टो ने ऐसा नहीं होने दिया। बीबीसी के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ऐसे वक्त में चुनाव करवाना चाहती थी, जब बेनजीर भुट्टो बच्चे को जन्म देने वाली हों, ताकि वो सक्रिय चुनाव प्रचार में हिस्सा ना लें पाएं, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य शासक जिया उल हक को बिलावल के जन्म की भनक तक नहीं लग पाई और बेनजीर ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ा और साल 1988 में अपनी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) को जीत दिलाया।

बिलावल भुट्टो का जन्म 21 सितंबर 1988 को हुआ और जब उनकी मां बेनजीर भुट्टो पहली बार प्रधानमंत्री बनीं, उस वक्त वो सिर्फ 3 महीने थे।

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आसान नहीं था बिलावल का बचपन

बिलावल भुट्टो जरदारी का बचपन आसान नहीं था। सिर्फ 3 महीने की उम्र में बिलावल अपनी मां के साथ प्रधानमंत्री आवास भले ही पहुंच चुके थे, लेकिन उस वक्त की पाकिस्तान की राजनीतिक परिस्थितियां आज के मुकाबले काफी अलग थी। कुछ ही महीने पहले उनके नाना जुल्फिकार अली भुट्टो को सैन्य शासक जिया उल हक ने फांसी पर चढ़ाया था और बाद में जिया उल हक की भी मौत हेलीकॉप्टर हादसे में हो गई।

साल 1988 से 1996 के बीच बेनजीर भुट्टो दो बार प्रधानमंत्री बनीं, जबकि दूसरी तरफ पाकिस्तान में खूनी राजनीति भी चल रही थी।

1996 में जब बेनजीर भुट्टो को सत्ता से हटाया गया, उस वक्त बिलावल सिर्फ 8 साल के थे और उनके पिता को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेज दिया गया। आसिफ अली जरदारी करीब 8 सालों तक जेल में रहे। बीबीसी के मुताबिक, एक इंटरव्यू में बिलावल ने अपना दर्द बताते हुए कहा था, कि उनका बचपन उनके पिता के बिना ही बीता।

1996 के बाद जब नवाज शरीफ सत्ता में आए, तो पाकिस्तान में बदले की राजनीति उफान पर थी और बेनजीर भुट्टो 8 साल के बिलावल को लेकर दुबई से लंदन चली गईं। बिलावल की शुरूआती जिंदगी लंदन में गुजरी, जहां से उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्राइस्ट चर्च कॉलेज से मॉडर्न हिस्ट्री और पॉलिटिक्स में पढ़ाई की।

हालाकि, इन सबके बीच बेनजीर भुट्टो फिर से पाकिस्तान लौट आईं थीं, लेकिन 2007 में एक चुनावी प्रचार के दौरान आतंकियों ने बम धमाके में उनकी हत्या कर दी और इसके साथ ही बिलावल की जिंदगी पर पहाड़ टूट पड़ा।

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19 की उम्र में संभाली मां की विरासत

बेनजीर भुट्टो की मौत के बाद सिर्फ 19 साल की उम्र में बिलावल भुट्टो को मां की विरासत संभाली पड़ी और उन्होंने औपचारिक तौर पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की कमान अपने हाथों में ले ली। हालांकि, इस दौरान वो लंदन में अपना पढ़ाई भी जारी रखे हुए थे।

हालांकि, बाद में जब पढ़ाई खत्म कर बिलावल भुट्टो वापस पाकिस्तान लौटे और अपनी पार्टी को संभाली, तो अपने पिता आसिफ अली जरदारी के साथ उनके गंभीर मतभेद सामने आने लगे। पाकिस्तान के कई राजनीतिक जानकारों का कहना है, कि बिलावल काफी आक्रामक तरीके से राजनीति करना चाहते थे, लेकिन उनके पिता सबको साथ लेकर चलने में विश्वास करते थे। वहीं, बिलावल अल्पसंख्यकों से होने वाले अत्याचार को लेकर सख्ती चाहते थे, लेकिन उनके पिता ऐसा करने में राजनीतिक नुकसान देखते थे।

वहीं, राजनीतिक जानकारों का कहना है, कि बिलावल भुट्टो जनता के बीच जाना चाहते थे, लेकिन आसिफ अली जरदारी को उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा डर था। इसीलिए उन्होंने बिलावल को ज्यादातर समय लंदन में ही रखा।

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हिना रब्बानी संग अफेयर

हिना रब्बानी खार और बिलावल भुट्टो और हिना रब्बानी खान के बीच प्रेम संबंध है, इसका खुलासा सबसे पहले साल 2012 में किया गया था, जब बिलावल भुट्टो सिर्फ 24 साल के थे और उस वक्त हिना रब्बानी खार 35 साल की थीं।

बिलावल भुट्टो और हिना रब्बानी के बीच प्यार और रोमांस के बारे में सबसे पहले बांग्लादेशी टैब्लॉइड, "द वीकली ब्लिट्ज" में रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसके बाद पाकिस्तान की राजनीति में बवाल मच गया था।

हिना रब्बानी खार की शादी पाकिस्तान के प्रभावशाली कारोबारी फिरोज गुलजार से हुई थी और दोनों की दो बेटियां हैं, जिनके नाम अन्नया और दीना है। बांग्लादेशी अखबार ने तो यहां तक दावा किया था, कि दोनों दोनों की शादी के बाद स्विट्जरलैंड में बसने की योजना तक बनाई थी।

इस प्यार और रिश्ते की खबर बिलावल भुट्टो के पिता आसिफ अली जरदारी को लग गई और उन्होंने इस रिश्ते का भारी विरोध किया था। आसिफ अली जरदारी को लग रहा था, कि हिना रब्बानी के साथ रिश्ते में आने से ना सिर्फ बिलावल भुट्टो का राजनीतिक करियर खतरे में आ जाएगा, बल्कि उनकी सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के लिए मौत की घंटी भी बजाएगा।

बांग्लादेशी अखबार ने दावा किया था कि, आसिफ अली जरदारी ने हिना रब्बानी खार और अपने बेटे बिलावल भुट्टो को पाकिस्तानी राष्ट्रपति भवन के अंदर ही आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ा था। उस वक्त बिलावल भुट्टो राष्ट्रपति भवन में ही रहते थे।

हिना रब्बानी खार भी बिलावल भुट्टो के प्यार में गिरफ्तार थीं और उन्होंने बिलावल के लिए अपने करोड़पति पति फिरोज गुलजार को छोड़ने का फैसला कर लिया था। हालांकि, ऐसा नहीं हो पाया और पिता और पार्टी के दबाव में आकर बिलावल को हिना रब्बानी से रिश्ता खत्म करना पड़ा। वर्तमान में हिना रब्बानी खार, शहबाज शरीफ की सरकार में विदेश राज्य मंत्री हैं।

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बिलावल भुट्टो का राजनीतिक कैरियर

बिलावल भुट्टो ने साल 2018 में पहली बार चुनाव लड़ा और सांसद बने। हालांकि, उनकी पार्टी चुनाव हार गई और इमरान खान पहली बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। 2018 में पहली बार सांसद बनने के बाद संसद में उनका पहला भाषण ही काफी प्रसिद्ध हो गया था, जब उन्होंने इमरान खान को 'सलेक्टेड प्रधानमंत्री' कहा।

इमरान खान जब तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे, ये शब्द उनके साथ चिपका रहा। 2022 में जब इमरान खान की सत्ता चली गई, तो शहबाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री बने। शहबाज शरीफ की सरकार को बिलावल भुट्टो की पार्टी ने समर्थन किया था और शहबाज शरीफ ने बिलावल भुट्टो को देश का विदेश मंत्री बनाया।

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    बिलावल भुट्टो ने विदेश मंत्री बनने के बाद करीब दो दर्जन विदेश यात्राएं की हैं और उन्होंने अमेरिका से संबंध सुधारने के लिए काफी मेहनत की है, हालांकि इसमें उन्हें आंशिक कामयाबी ही मिल पाई। पाकिस्तान के राजनीतिक जानकारों का कहना है, कि उनके नाना जुल्फीकार अली भुट्टो भी 1960 के दशक में विदेश मंत्री बनकर ही सत्ता की राजनीति की शुरूआत की थी और बाद में देश के प्रधानमंत्री बने थे।

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