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पाकिस्तान में चल रहा अलग ही खेल, बिलावल ने सुप्रीम कोर्ट पर लगाया अवमानना का आरोप, सजा की मांग

पाकिस्तान के दो प्रांत, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सरकार आमने सामने है। शहबाज सरकार ने साफ कर दिया है, कि किसी भी हालात में चुनाव नहीं होंगे।

Bilawal Accuses Supreme Court of Contempt

Bilawal Accuses Supreme Court of Contempt: आम तौर पर यही सुना जाता है, कि किसी शख्स ने, या किसी सरकार ने, या फिर किसी संस्थान ने कोर्ट के आदेश की अवमानना की है, जिसके बाद उसके खिलाफ कंटेप्ट ऑफ कोर्ट का मुकदमा चलता है।

लेकिन, पाकिस्तान में अलग ही खेल चल रहा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी ने बुधवार को दावा किया है, कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले संसद की "अवमानना" के समान हैं और उन्होंने स्पीकर राजा परवेज अशरफ से इस मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंपने का आग्रह किया है।

सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान ने पिछले दिनों आदेश दिया था, कि पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में मई महीने में विधानसभा के चुनाव करवाए जाएं और इसके लिए केन्द्र सरकार, इलेक्शन कमीशन को पैसे जारी करे। लेकिन, पाकिस्तानी संसद में एक प्रस्ताव लाकर शहबाज सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया है।

जिसके बाद पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने कहा, कि 'लोकतंत्र की रक्षा और मजबूती के लिए तय समय के अंदर चुनाव करवाना आवश्यक है।' जिसके बाद बिलावल भुट्टो ने कहा, कि सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी उन सांसदों की "अवज्ञा" करने के समान है, जिन्होंने पहले ही चुनाव कराने के फैसले के खिलाफ अपना मत दिया है।

बिलावल भुट्टो, जो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने नेशनल असेंबली में जोर देकर कहा, कि संसद के फैसलों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, "अगर संसद धन जारी करने की अनुमति देती है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है।"

Bilawal Accuses Supreme Court of Contempt

सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कार्रवाई करेंगे बिलावल?

बिलावल भुट्टो ने नेशनल असेंबली में बोलते हुए कहा, कि "कार्यपालिका संसद के फैसलों का पालन करने के लिए बाध्य है, और सुप्रीम कोर्ट का फैसला, लोकतंत्र के मूल सिद्धांत और संविधान के विपरीत है"। उन्होंने कहा, "संसद के पास यह तय करने का अधिकार है, कि सार्वजनिक धन कैसे खर्च किया जा सकता है और इसे कहां खर्च किया जा सकता है।"

उन्होंने कहा, कि "किसी को भी संसद के विशेषाधिकार को भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।" बिलावल भुट्टो ने नेशनल असेंबली के स्पीकर से आग्रह किया, कि वह "अपमानजनक" आदेश के मामले को सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ विशेषाधिकार समिति को संदर्भित करें"।

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    बिलावल ने आगे कहा, कि "प्रधानमंत्री का अपमान करना नेशनल असेंबली के सभी सदस्यों का अपमान है। किसी भी संस्था को देश के प्रधानमंत्री का अपमान करने की इजाजत नहीं दी जाएगी"। बिलावल भुट्टो के तेवर के बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या पाकिस्तान सरकार अब देश की सर्वोच्च अदालत के खिलाफ कार्रवाई करेगी? क्या पाकिस्तान सरकार, सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ एक्शन लेगी?

    ये अपने आप में दुर्लभ मामला है, जब किसी देश की संसद में, देश के सर्वोच्च अदालत के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा ही है और सर्वोच्च अदालत की टिप्पणी को, देश के प्रधानमंत्री और सांसदों का अपमान बताया गया है।

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