पीएम मोदी को दोस्त ओबामा ने दिया धोखा, यूएनएससी में सुधार का किया विरोध
न्यूयॉर्क। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में स्थायी सदस्यता हासिल करने की कोशिशों में लगे भारत की मुहिम को कड़ा झटका लगा है। और यह झटका उसे गैरों से नहीं बल्कि अपनों ने ही दिया है। भारत के साथ दोस्ती का दम भरने वाले अमेरिका और रूस ने जहां भारत की कोशिशों को किनारे कर दिया तो वहीं चीन ने भी इन देशों के सुर में सुर मिलाया।

भारत, अमेरिका और चीन ने सिक्योरिटी काउंसिल में स्थायी सदस्यता के सुधार से जुड़ी वार्ताओं के विरोध में आवाज उठाई है। साथ ही सुधार प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए जरूरी योगदान से साफ इंकार कर दिया है।
पिछले वर्ष जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की यात्रा पर गए थे और उन्होंने राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की थी तो उन्हें स्थायी सदस्यता के लिए मदद का वादा दिया गया था।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष सैम कुटेसा ने सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़ी वार्ताओं का आधार बनने वाले डॉक्यमेंट्स को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच प्रसारित करके उपलब्धि हासिल की थी।
कुटेसा ने सुरक्षा परिषद सुधार के मुद्दे पर वार्ताओं की अध्यक्षता उनकी ओर से करने के लिए जैमेका के स्थायी प्रतिनिधि कोर्टने रैट्रे को नियुक्त किया था।
कुटेसा ने 31 जुलाई को संयुक्तराष्ट्र के सभी सदस्यों को लिखी चिट्ठी में कहा कि वह उन समूहों और सदस्य देशों के रुख को दर्शाने वाले पत्रों को भी प्रसारित कर रहे हैं, जिन्होंने ये संकेत दिए थे कि वे अपने प्रस्तावों को वार्ता से जुडे दस्तावेज में शामिल नहीं करना चाहते।
इन देशों में अमेरिका, रुस और चीन शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थाई प्रतिनिधि समांथा पावर ने कुटेसा को लिखी चिट्ठी में कहा कि अमेरिका 'सैद्धांतिक' तौर पर स्थायी और अस्थायी दोनों सदस्यों की संख्या में 'थोड़ा' विस्तार के लिए तैयार है।
लेकिन शर्त यह है कि 'स्थायी सदस्य संख्या को विस्तार देने पर विचार करते हुए अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के रखरखाव में और संयुक्त राष्ट्र के अन्य उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में देशों की योग्यता और तत्परता पर गौर किया जाना चाहिए।'












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