बाइडेन ने कर डाला तीसरे विश्वयुद्ध का बंदोबस्त? यूक्रेन को रूस में US के हथियार चलाने की मंजूरी, समझें मतलब
Russia-Ukraine War: जो बाइडेन, जिनका शासन जनवरी महीने में खत्म होने वाली है, उन्होंने लगता है, जाते जाते दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध में धकेलने का पूरा बंदोबस्त कर दिया है।
रॉयटर्स, एसोसिएटेड प्रेस और न्यूयॉर्क टाइम्स सहित विभिन्न समाचार आउटलेट्स ने बताया है, कि निवर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, यूक्रेन को रूस के अंदर हमला करने के लिए अमेरिका की तरफ से दिए गए, हथियारों का उपयोग करने की मंजूरी देने वाले हैं।

इस मामले से परिचित तीन सूत्रों, जिनमें दो अमेरिकी अधिकारी भी शामिल हैं, उन्होंने रविवार को रॉयटर्स को बताया, कि यूक्रेन आने वाले दिनों में हथियारों का उपयोग करके लंबी दूरी के हमले करने की योजना बना रहा है और अगर ऐसा होता है, तो दुनिया एक विनाशक जंग में शामिल हो जाएगी।
व्हाइट हाउस ने फिलहाल इन रिपोर्टों पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की ने कहा है, कि मिसाइलें "खुद के लिए बोलेंगी"।
जेलेंस्की ने यूक्रेनवासियों को शाम को संबोधित करते हुए कहा, "आज, मीडिया में कई लोग कह रहे हैं, कि हमें उचित कार्रवाई करने की अनुमति मिल गई है। लेकिन हमले शब्दों से नहीं किए जाते। ऐसी चीजों की घोषणा नहीं की जाती। मिसाइलें खुद के लिए बोलेंगी।" वहीं, पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोर्स्की ने रिपोर्टों का स्वागत करते हुए कहा, कि अमेरिका रूस को "ऐसी भाषा में जवाब दे रहा है जिसे (रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन समझते हैं"।
रूस की तरफ से आया खतरनाक जवाब
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट में कहा गया है, कि रूसी सांसद व्लादिमीर दजबारोव ने कहा है, कि यूक्रेन को अमेरिका द्वारा आपूर्ति की गई मिसाइलों से रूस के अंदर हमला करने की अनुमति देने से तीसरा विश्व युद्ध छिड़ जाएगा। सांसद ने कहा कि रूसी प्रतिक्रिया फौरन दी जाएगी।
ट्रंप के लिए मुश्किल स्थिति बना रहे बाइडेन?
बाइडेन ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब वे दो महीने में पद छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति चुनाव में जीतने वाले डोनाल्ड ट्रंप, 20 जनवरी को पदभार ग्रहण करेंगे।
ट्रंप और उनके आने वाले प्रशासन के सदस्यों ने संकेत दिया है, कि वे रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन का भारी समर्थन करने को लेकर ज्यादा संशय में हैं, और यह फिलहाल साफ नहीं है, कि ट्रंप, यूक्रेन को रूस के अंदर अमेरिका द्वारा आपूर्ति किए गए हथियारों का उपयोग करने की अनुमति देने के फैसले को पलटेंगे या नहीं।
रिपब्लिकन नेता ने युद्ध को जल्दी खत्म करने का वादा किया है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया है, कि वे ऐसा कैसे करेंगे।
सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया है, कि यूक्रेन द्वारा अमेरिका निर्मित आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) रॉकेट का उपयोग करने की उम्मीद है, जिसकी रेंज 190 मील (306 किमी) तक है, और कीव (यूक्रेन की राजधानी) अभी भी अमेरिका के अपने मुताबिक अनुकूल प्रशासन का लाभ उठा रहा है। जेलेंस्की, रूसी क्षेत्र के अंदर सैन्य ठिकानों के खिलाफ हथियारों का उपयोग करने की अनुमति के लिए महीनों से दबाव बना रहे थे।
फ्रांसीसी समाचार पत्र ले फिगारो की तरफ से प्रकाशित रिपोर्टों की ओर इशारा करते हुए, कि ब्रिटेन और फ्रांस भी रूस में यूक्रेन द्वारा अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों का उपयोग करने की अनुमति देंगे, अल जजीरा के राजनयिक संवाददाता जेम्स बेज़ ने कहा है, कि "इन पश्चिमी देशों का मकसद यूक्रेन का समर्थन करना है, विशेष रूप से रूस के उस कुर्स्क क्षेत्र में, जिस पर यूक्रेन ने कब्जा कर रखा है"।
मास्को ने पहले चेतावनी दी थी, कि वह अमेरिका द्वारा आपूर्ति किए गए हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंधों को कम करने के वाशिंगटन के किसी भी कदम को एक बड़ी भड़काऊ स्थिति के रूप में देखेगा।
अमेरिका का यह फैसला, नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, और यूक्रेनी सरकार को बढ़ावा देता है, जो शहरों और उसके विद्युत ग्रिड पर रूसी हमलों को रोकने के लिए संघर्ष कर रही है। बाइडेन ने लंबे समय से रूस के खिलाफ अमेरिकी हथियारों का उपयोग करने के कदमों का विरोध किया था, उन्हें डर था कि यह अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों को रूस के साथ सीधे संघर्ष में घसीट लेगा।
लेकिन युद्ध का नतीजा अब रूस की तरफ मुड़ने लगा है और यूक्रेन के बड़े हिस्से पर अब रूस का नियंत्रण हो चतुका है, जिसके बाद बाइडेन ने ये फैसला लिया है। वहीं, उत्तर कोरिया ने रूस का समर्थन करने के लिए हजारों सैनिकों को तैनात किया है, क्योंकि वह यूक्रेन से खोए कुर्स्क में क्षेत्र को वापस पाने का प्रयास कर रहा है।
वहीं, साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है, कि उत्तर कोरिया ने रूस में 10 हजार और सैनिकों को भेजने का फैसला किया है और उत्तर कोरिया के तानाशाह नेता किम जोंग उन ने उन सैनिकों को 'जी जान से लड़ने' के लिए कहा है।
हालांकि, फिलहाल मास्को का मानना है, कि आने वाला ट्रंप प्रशासन, उसके लिए अनुकूल होगा और वह कीव को पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में रूस के नियंत्रण वाले क्षेत्र को छोड़ने के लिए मजबूर कर सकते हैं।












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