नाजियों के अत्याचार को दुनिया के सामने लाने वाले बेन फर्न्ज का 103 साल की आयु में निधन
न्यूरेमबर्ग ट्रायल के चीफ प्रोजिक्यूटर बेन फर्न्ज का 103 साल की आयु में निधन हो गया। उन्होंने इस केस में 22 कमांडरों के खिलाफ आरोप साबित किए थे।

नाजियों के अत्याचार के खिलाफ उन्हें कोर्ट में जिम्मेदार ठहराने वाले बेन फर्न्ज की मौत हो गई है। बेन ने न्यूरेमबर्ग ट्रायल के दौरान नाजियों के अत्याचार की जांच की और उनके खिलाफ केस लड़ा था। महज 27 साल की आयु में बिना किसी अनुभव के बेन मुख्य अभियोजक बन गए थे। 1947 में ट्रायल के दौरान बेन ने 10 लाख यहूदियों की हत्या के लिए 22 पूर्व कमांडरों के खिलाफ आरोप साबित किए थे। इस ट्रायल में शामिल बेन आखिरी व्यक्ति थे, जिनकी 103 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई। बेन ने नाजियों द्वारा युद्ध के दौरान किए गए नरसंहार के खिलाफ कोर्ट में गवाही दी थी, वह पहले ऐसे बाहरी गवाह थे, जिन्होंने नाजियों द्वारा कंसेन्ट्रेशन कैंप में किए गए अत्याचार का लिखित दस्तावेज तैयार किया था। मार्च माह में बेन ने 103वं जन्मदिन मनाया था।
शुक्रवार की शाम को बेन की फ्लोरिडा के बॉयन्टोन बीच पर मृत्यु हो गई। वॉशिंगटन स्थित यूएस होलोकॉस्ट म्युजियम ने भी बेन की मृत्यु की पुष्टि की है। म्युजियम की ओर से ट्वीट करके लिखा गया, आज दुनिया ने एक ऐसे लीडर को खो दिया, जिसने नरसंहार के पीड़ितों के न्याय के खिलाफ डटकर लड़ाई की। बेन का जन्म 1920 में हुआ था। उन्होंने हार्वर्ड लॉल स्कूल से पढ़ाई की इसके बाद वह अमेरिकी सेना में शामिल हो गए और वह दूसरे विश्व युद्ध में शामिल हुए।
बेन लॉ ग्रैजुएट थे, जिसका उन्होंने नाजी वॉर क्राइम की जांच में इस्तेमाल किया। अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ जिस तरह से नाजियों ने अत्याचार किया था, उसे दुनिया के सामने लाने का काम बेन ने किया था। वह अमेरिकी सैनिकों पर नाजियो द्वारा किए गए अपराध के जांचकर्ता बन गए।












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