क्रूरता का चेहरा, बेरहम तानाशाह! सीरिया में बशर अल-असद के शासन का अंत, 50 सालों तक देश पर रहा परिवार का कब्जा
Bashar al-Assad: सीरिया में विद्रोही बल हयात तहरीर अल-शाम (HTS) ने राष्ट्रपति बशर अल-असद के देश छोड़कर भागने की घोषणा करते हुए सीरिया गृहयुद्ध में जीत का ऐलान कर दिया है और कहा है, कि 'उसकी योजना किसी से बदला लेने की नहीं है।'
HTS प्रमुख अबू मोहम्मद अल-जुलानी, जो विद्रोही बलों के नेता हैं, उन्होंने अपने गुटों के लड़ाकों से सार्वजनिक संपत्तियों से दूर रहने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है, कि 'आधिकारिक रूप से सौंपे जाने तक सभी सार्वजनिक संस्थान और संपत्ति, प्रधानमंत्री की निगरानी में ही रहेंगे।'

वहीं, देश के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी अल-जलाली ने कहा है, कि वह राजधानी स्थिति अपने घर में रहेंगे और वो इस बात को सुनिश्चित करेंगे, देश के सार्वजनिक संस्थान काम करना जारी रखें। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया है, कि विद्रोही बलों के साथ वो संपर्क में हैं और जब तक नया प्रशासन काम शुरू नहीं करता है, वो देश की व्यवस्था को संभालेंगे।
यानि, राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का अंत हो गया है, जिनका परिवार पिछले 50 सालों से सीरिया को कंट्रोल कर रहा था।
50 सालों से सीरिया में था 'क्रूर' परिवार का शासन
सीरिया के विद्रोही बलों को आतंकवादी संगठन कहा जाता है, लेकिन राष्ट्रपति असद का शासन भी उससे कम क्रूर नहीं था। असद ने लाखों लोगों का कत्लेआम करवाया और लाखों लोगों को अपने घरों को छोड़कर भागने के लिए मजबूर किया। सत्ता बनाए रखने के लिए राष्ट्रपति असद ने छात्रों पर अंधाधुंध गोलियां चलवाई, टैंक को उतारे और जुल्म की हर हद को पार किया।
बशर अल-असद को देश की सत्ता अपने तानाशाह पिता हाफिज अल-असद से विरासत में मिली थी, जिन्होंने 1971 से जून 2000 में अपनी मृत्यु तक सीरिया पर शासन किया था। इस परिवार ने सीरियाई जनता को लोकतंत्र से कोसों दूर रखा और हर उस नेता का खात्म करवाया, जिसने इस परिवार की सत्ता को चुनौती देन की कोशिश की।
जुलाई 2000 में पूर्व मेडिकल छात्र बशर अल-असद पहली बार सीरिया के राष्ट्रपति बने, साथ ही बाथ पार्टी के नेता और सेना के कमांडर इन चीफ भी उन्हें बनाया गया।

ग्यारह साल बाद, जब सीरियाई लोग लोकतंत्र की मांग करते हुए सड़कों पर उतरे, तो अल-असद ने क्रूर तरीके से उस विद्रोह को दबाया। जैसे-जैसे और भी सीरियाई लोग विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए, सरकार की क्रूरता बढ़ती गई। राष्ट्रपति ने हर एक प्रदर्शनकारी को आतंकवादी कहा और दमन को लगातार बढ़ाया। प्रदर्शनकारियों पर तोप के गोलों से हमले करवाए, जिसकी वजह से सीरिया में गृहयुद्ध शुरू हो गया था।
गृहयुद्ध में लाखों लोगों का कत्ल कर दिया गया और राष्ट्रपति अल-असद ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करवाया।
युद्ध की आग के बीच ही उन्होंने देश में चुनाव भी करवाए, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक था। युद्ध में कभी जीत न पाने के बावजूद, अल-असद ने बाहरी ताकतों की मदद से सत्ता अपने कब्जे में रखी, लेकिन जब ईरान, इजराइल के साथ संघर्ष में फंसा और रूस, यूक्रेन युद्ध में उलझा, असद का नियंत्रण कमजोर होता गया और आखिरकार अब उनकी शासन का पतन हो गया है।












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