भारतीय नौसेना ने बचाया बांग्लादेशी जहाज, हिन्द महासागार में 2 दिन पहले सोमालिया लुटेरों ने किया था अपहरण
कुछ दिन पहले हिन्द महासागर में बांग्लादेशी जहाज का अपहरण कर लिया गया था। अब भारतीय नौसेना ने उस जहाज का रेस्क्यू कर लिया है। मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार सुबह भारतीन नौसेना ने समुद्री लुटेरों से जहाज का रेस्क्यू किया।
इससे पहले मोजाम्बिक के मापुटो बंदरगाह से संयुक्त अरब अमीरात के अल हमरियाह बंदरगाह जा रही बांग्लादेशी कार्गो बोट, एम वी अब्दुल्ला का 15-20 समुद्री डाकुओं ने अपहरण कर लिया था। यह घटना सोमालिया की राजधानी मोगादिशु से लगभग 600 समुद्री मील पूर्व में हुई।

शुक्रवार को जारी एक बयान में, भारतीय नौसेना ने कहा कि 12 मार्च को सूचना मिलने पर, एलआरएमपी पी-81 को तुरंत तैनात किया गया था और शाम को व्यापारी जहाज एमवी अब्दुल्ला का पता लगाने पर स्थिति का पता लगाने के लिए संचार स्थापित करने का प्रयास किया गया था। मगर तब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई थी।
हालांकि 2 दिन के बाद भारतीय नौसेना ने सोमालिया तट पर बांग्लादेश के झंडे वाले जहाज अब्दुल्ला पर समुद्री डकैती के हमले को विफल कर दिया। सशस्त्र समुद्री डाकुओं द्वारा बंधक बनाए गए एमवी के चालक दल का पता लगा लिया गया और सोमालिया के क्षेत्रीय जल में इसके आगमन तक एमवी के करीब रहना जारी रखा।
नौसेना ने एक बयान में कहा, "मिशन ने समुद्री सुरक्षा अभियानों पर युद्धपोत तैनात किया था, जिसका मार्ग भी बदल दिया गया था, 14 मार्च की सुबह अपहृत जहाज को रोक लिया गया।"
मिली जानकारी के मुताबिक जहाज पर 58,000 टन कोयला लदा है। जहाज बांग्लादेशी संगठन एसआर शिपिंग का है, जो चटग्राम स्थित कबीर स्टील एंड रेरोलिंग मिल ग्रुप (केएसआरएम) की सहयोगी कंपनी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बोट में 23 सदस्य सवार थे। बताया गया कि चालक दल के सदस्य जहाज के केबिन के अंदर सुरक्षित हैं जबकि समुद्री डाकुओं ने जहाज पर नियंत्रण कर लिया है।
केएसआरएम के मीडिया सलाहकार मिजाबुल इस्लाम ने बताया कि चालक दल के सदस्यों को समुद्री डाकुओं ने बंधक बना लिया था लेकिन वे केबिन के अंदर सुरक्षित थे। बांग्लादेश मर्चेंट मरीन ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कैप्टन अनम चौधरी ने बताया कि चालक दल ने मदद मांगने के लिए एक व्हाट्सएप मैसेज भेजा था, जिसमें कहा गया था कि वे भारी हथियारों और गोला-बारूद के साथ, समुद्री डाकुओं के साथ केबिन के अंदर बंद थे।












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