300 साल पुराने काली मंदिर का पुनर्निर्माण करवा रहे हैं बांग्लदेशी मुस्लिम, PM मोदी से की ये अपील
Kali temple in Bangladesh: बांग्लादेश से एक ऐसी खबर आई है, जिसे जानने के बाद मजहबी हिंसा को फैलाने वाले लोग हैरान रह जाएंगे। यहां के ढाका से 176 किमी दूर मगुरा जिले के बसुरदुलझुरी गांव में 300 साल पुराना सासन काली मंदिर है, जिसे कि साल 2000 की आई बाढ़ ने काफी नुकसान पहुंचाया था।

इस मानक मंदिर का काफी हिस्सा बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त हो चुका है लेकिन अब इसके पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया है यहां के मुस्लिम भाईयों ने, जो इस मंदिर के आस-पास रहने वाले हिंदू परिवारों के साथ इसको फिर से बनवाने में पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
बांग्लादेश और भारत सरकार से मदद की गुहार
'द प्रिंट' की खबर के मुताबिक इन लोगों ने मंदिर के पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए बांग्लादेश और भारत सरकार से मदद की गुहार भी लगाई है। दरअसल साल 2000 की बाढ़ ने मंदिर को काफी नुकसान पहुंचाया था लेकिन वो काली मां की प्रतिमा को छू भी नहीं पाई। हर साल इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। कहते हैं यहां मांगी हर मन्नत पूरी होती है। मां के दर से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता है।
'हम दिल से चाहते हैं कि मंदिर फिर से बन जाए'
इस बारे में बात करते हुए स्थानीय मुस्लिम लोगों ने कहा कि 'हम दिल से चाहते हैं कि मंदिर फिर से बन जाए और इसके लिए हम एक कमेटी बना रहे हैं। हम बांग्लादेश और भारत सरकार दोनों से अपील कर रहे हैं कि वो मंदिर बनवाने में हमारी मदद करें।'
हर साल यहीं पर लाखों भक्त मत्था टेकने आते हैं...
उन्होंने कहा कि 'यहां पर साल 2001 से एक अस्थायी मंदिर लोगों की मदद से बनवाया गया है, जहां पर मां काली की प्रतिमा रखी गई है, हर साल यहीं पर लाखों भक्त मत्था टेकने आते हैं, अस्थायी मंदिर के लिए भी पैसा यहां के मुस्लिम भाईयों ने ही जमा किया था लेकिन अब हम चाहते हैं कि क्षतिग्रस्त मंदिर फिर से बने लेकिन इसके लिए हमें दोनों देशों के सरकार की मदद चाहिए।
यहां के लोगों को मोदी सरकार पर पूरा भरोसा
आपको बता दें कि भारत सरकार बांग्लादेश में सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों, शिक्षा और स्वास्थ्य की विकास परियोजनाओं के लिए अनुदान देती है। इसलिए बसुरदुलझुरी गांव के लोगों ने काली मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए मोदी सरकार से मदद की गुहार लगाई है और उन्हें पूरा भरोसा है कि मोदी सरकार उन्हें निराश नहीं करेगी। उनका मानना है कि दोनों देश की सरकारें अस्था की इस विरासत को संभंलाने में अवश्य मदद करेगी। आपको बता दें कि ये मंदिर करीब 300 साल पुराना है।












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