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बांग्लादेश में रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में लगी भीषण आग, हजारों लोग हुए बेघर, 2 साल में 222वीं घटना

रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या पिछले कई सालों से मौजूद हैं, जिन्हें म्यांमार से भगा दिया गया था। इनकी तादाद करीब 10 लाख से ऊपर है। म्यांमार की सेना ने इनके खिलाफ क्रूर दमनचक्र अभियान चलाया था।

rohingya refugee camp fire

Rohingya refugee camp Fire in Bangladesh: बाग्लादेश में रोहिंग्या मुसलमानों पर आफत कम होने का नाम नहीं ले रहा है और इस बार सबसे ज्यादा भीड़ वाले रोहिंग्या कैंप में भीषण आग लगी है, जिसकी वजह से सैकड़ों कैंप जलकर खाक हो गये हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक अग्रिशमन अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है, कि रोहिंग्या लोगों से भरे शरणार्थी शिविर में भीषण आग लग गई, जिससे हजारों लोग बेघर हो गये हैं। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, बालुखली अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने बताया है, कि रविवार को लगी आग में कम से कम 2000 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं हैं।

रोहिंग्या राहत कैंप में भीषण आग

रोहिंग्या राहत कैंप में भीषण आग

रोहिंग्या कैंप में ये आग सीमावर्ती कॉक्स बाजार शिविर-11 में लगी थी, जहां करीब एक लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं। ये रोहिंग्या शरणार्थी साल 2017 में म्यांमार में सैनिकों की कार्रवाई के बाद देश छोड़कर भाग गये थे। अलजजीरा के मुताबिक,कॉक्स बाज़ार के 32 शिविरों में से एक बालूखाली शिविर है, जहां सबसे ज्यादा भीड़ होती है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि "प्रत्येक झोपड़ी में एक परिवार के रूप में चार से पांच लोग एक साथ रहते हैं, और कम से कम आधी आबादी महिलाओं और बच्चों की होती है।" अलजजीरा ने बताया है, कि "जिस क्षेत्र में आग लगी है, वह एक पहाड़ी क्षेत्र है, जिससे बचाव दल के लिए मौके पर पहुंचना और परिवारों को आग से बचाना काफी मुश्किल हो गया था"। रोहिंग्या शरणार्थी राहत शिविरों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही कापी खराब रही हैं, लिहाजा आग लगने के बाद घायलों को बचाने में भी काफी परेशानी हो रही हैं। इन राहत कैंपों में करीब 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं, जिनके लिए स्वास्थ्य सुविधाएं अल्पविकसित हैं।

रोहिंग्या की काफी खराब स्थिति

रोहिंग्या की काफी खराब स्थिति

वहीं, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी की रेजिना डे ला पोर्टिला ने अल जज़ीरा को बताया, कि शिविर में ज्यादातर घर बांस और तिरपाल के बने हैं और ऐसे शिविरों में रहना काफी ज्यादा मुश्किल होता है। फिर भी चार से पांच लोगों का परिवार एक एक घरों में रहता है। उन्होंने कहा, कि "शिविरों में हम जिन सामग्रियों का उपयोग करते हैं, वे सभी अस्थायी हैं और इनमें फौरन आग पकड़ लेती है और ये घर आपस में इतने करीब होते हैं, कि फौरन आग फैल जाती है और लोगों के लिए खुद को बचाना काफी मुश्किल हो जाता है।"

लोगों ने खोए मुश्किल से जुटाए जरूरी सामान

लोगों ने खोए मुश्किल से जुटाए जरूरी सामान

रोहिंग्या कैंप में लगी आग पर अग्निशामकों ने काबू पा लिया है, लेकिन यूएन शरणार्थी एजेंसी की पोर्टिला ने कहा, कि "शिविर की एक तिहाई आबादी ने अपने घरों और सामानों को खो दिया है और अब संयुक्त राष्ट्र लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहा है"। उन्होंने कहा, कि "हमने 90 सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी तैनात किए हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है, और अगर किसी को और सहायता की आवश्यकता होती है, तो उन्हें इस प्रकार के मानसिक आघात से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भेजा जाता है।" हालांकि, इस बात का फिलहाल जवाब किसी के पास नहीं है, कि आश्रय शिविरों के जलने के बाद लोग खुली छत के नीचे कैसे अपनी जिंदगी बिताएंगे।

रोहिंग्यां कैंपों में बार बार लगती आग

रोहिंग्यां कैंपों में बार बार लगती आग

एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के रोहिंग्या कैंप में पिछले दो साल में आग लगने की ये 222वीं घटना है और इस बार लगी आग में करीब 12 हजार लोग बेघर हो गये हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि फंड में भारी कमी और बांग्लादेश सरकार की ध्यान नहीं देने की वजह से इनकी स्थिति काफी खराब है। बांग्लादेश सरकार कई बार कह चुकी है, कि रोहिंग्या मुसलमान उनके देश के लिए बोझ बन गये हैं। रोहिंग्या मुसलमानों को उनके देश में भेजने का मुद्दा कई बार गरमाया है, लेकिन म्यांमार की सैन्य सरकार उन्हें देश में फिर से आने देने के लिए तैयार नहीं है।

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    म्यांमार से भगाए गये थे रोहिंग्या

    म्यांमार से भगाए गये थे रोहिंग्या

    रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या पिछले कई सालों से मौजूद हैं, जिन्हें म्यांमार से भगा दिया गया था। इनकी तादाद करीब 10 लाख से ऊपर है। इनमें से करीब 7 लाख 40 हजार रोहिंग्या म्यांमार की सीमा अगस्त 2017 में पार कर बांग्लादेश चले गये थे, जब म्यांमार की सेना ने काफी क्रूर कार्रवाई शुरू की थी। अभी भी म्यांमार के मुसलमान, बांग्लादेश में शरण लेने के लिए जाते रहते हैं। वहीं, चुनाव होने के बाद जब सरकार का गठन हुआ, तो उम्मीद जगी, कि रोहिंग्या को फिर से देश में बसाया जा सकता है, लेकिन महज एक महीने में ही सरकार को सेना ने बर्खास्त कर दिया। साल 2021 के फरवरी में सेना ने सरकार का तख्तापलट कर दिया और फिर म्यांमार में रहने वाले बचे खुचे रोहिंग्या मुस्लिमों की स्थिति भी खराब हो गई। पिछले साल, संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा था, कि म्यांमार में रोहिंग्या का उत्पीड़न नरसंहार के बराबर है और अमेरिकी अधिकारियों ने रोहिंग्या को सेना द्वारा कुचलने की पुष्टि की थी। बांग्लादेश में रहने वाले मुस्लिम अकसर आरोप लगाते रहते हैं, कि वहां की बौद्ध बहुसंख्यक आबादी उनके साथ व्यापक भेदभाव का सामना करते हैं और उन्हें नागरिकता के साथ साथ कई मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा जाता है।

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