बांग्लादेश में चुनाव टालने और PM के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, शेख हसीना क्या फिर से प्रधानमंत्री बन पाएंगी?

बांग्लादेश में आम चुनाव की घोषणा के बाद राजनीति सरगर्मी तेज हो गई है। देश की विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 7 जनवरी के आम चुनाव को रद्द करने की मांग करते हुए गुरुवार से राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर बैठ गई है।

गुरुवार को 48 घंटे की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान कर बीएनपी ने दावा किया कि चुनाव आयोग के इस फैसले का उद्देश्य प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्तारूढ़ अवामी लीग सरकार को फिर से सत्ता में लाना है।

BNP calls nationwide strike

बीएनपी की घोषणा मुख्य चुनाव आयुक्त काजी हबीबुल अवल के उस बयान के एक दिन बाद आई है। इसमें कहा गया कि बहुप्रतीक्षित आम चुनाव 7 जनवरी को होंगे। चुनाव आयुक्त के बयान के बाद बीएनपी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिज़वी ने रविवार सुबह 6 बजे से दो दिवसीय आम हड़ताल का आह्वान किया।

रुहुल कबीर रिजवी ने कहा, "हम यह कभी होने नहीं देंगे। चुनाव की तारीखों का एकतरफा एलान मौजूदा राजनीतिक गतिरोध और तनावों को और बढ़ाने का काम करेगा।"

उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि अगर हसीना इस्तीफा नहीं देती हैं और चुनावों की देखरेख के लिए एक निष्पक्ष कार्यवाहक प्रशासन को सत्ता नहीं सौंपती हैं तो उसके बाद हर परिणाम की जिम्मेदार चुनाव आयोग और सरकार होंगी।

बीएनपी पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल मोईन खान ने कहा, "बांग्लादेश में हर कोई इस चुनाव के नतीजे जानता है।" धुर दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी सहित कई पार्टियां इस हड़ताल के समर्थन में आ गई हैं।

इस वजह से कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देशव्यापी सुरक्षा चौकसी बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। बांग्लादेश के राजमार्गों और प्रमुख शहरों की सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों को भी बुलाना पड़ा है।

विपक्ष ने 28 अक्टूबर से रुक-रुक कर राष्ट्रव्यापी परिवहन नाकाबंदी जारी रखी, आपूर्ति प्रणालियों को बाधित किया, चुनाव कराने के लिए एक तटस्थ सरकार के लिए रास्ता बनाने के लिए प्रधान मंत्री हसीना के इस्तीफे की मांग की।

इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त अवल ने बुधवार को कहा कि सुचारू चुनाव के लिए सौहार्दपूर्ण माहौल जरूरी है। हालांकि, "मतदान की संस्थागत पद्धति समेत कई मुद्दों पर राजनीतिक नेतृत्व के बीच मतभेद थे। ऐसे में लंबे समय से चुनाव कराए जाने की बातें हो रही हैं। अब अगले साल चुनाव कराने की तैयारियां की जा रही हैं।

बीएनपी और उसके सहयोगियों का नाम लिए बिना बांग्लादेश के चुनाव आयुक्त अवल ने कहा कि उनके कार्यालय में सभी पंजीकृत राजनीतिक दलों को आयोग के साथ बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया। उन दलों को भी बुलाया गया जो आगामी चुनावों में भाग लेना नहीं चाहते। उन्होंने निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया।

बांग्लादेश के सीईसी ने कहा, "बहुदलीय लोकतंत्र में मतभेद होने की संभावना हो सकती है, लेकिन अगर मतभेदों के कारण झड़प और हिंसा होती है जो चुनाव प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।"

48 घंटों की हड़ताल के आह्वान के बीच चुनाव आयोग के प्रमुख ने सभी राजनीतिक दलों से "संघर्ष और हिंसा" का रास्ता छोड़ने और "समाधान तलाशने" की अपील की। उन्होंने कहा कि आयोग हमेशा चुनाव में सभी राजनीतिक दलों की सहज भागीदारी और प्रतियोगिता का स्वागत करेगा।

इसी बीच सत्तारूढ़ अवामी लीग ने चुनाव कार्यक्रम का स्वागत किया है। पार्टी महासचिव ओबैदुल कादिर ने कहा है कि सत्तारूढ़ पार्टी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को सभी आवश्यक समर्थन देगी।

कादर ने कहा, "हमारा मानना है कि चुनाव में भाग लेने का समय अभी खत्म नहीं हुआ है। बीएनपी की चुनावी भागीदारी का स्वागत किया जाएगा।"

हालांकि, बीएनपी ने बार-बार कहा है कि मौजूदा सरकार के तहत कोई भी चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकता। बता दें कि बीएनपी ने 2014 में भी चुनाव का बहिष्कार किया था। हालांकि, बाद में पार्टी नेताओं ने इस फैसले को एक गलती बताया था। इसके बाद 2018 के चुनावों में विपक्षी पार्टी ने भाग लिया।

इस बीच अमेरिका ने सभी पक्षों से संयम बरतने, हिंसा से बचने और शांतिपूर्ण तरीके से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावे कराने के लिए स्थितियां बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि अमेरिका वही चाहता है बांग्लादेशी लोग खुद चाहते हैं, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जो शांतिपूर्ण तरीके से कराएं जाएं।

बांग्लादेश एक संसदीय लोकतंत्र है, जहां विशेषकर चुनावों से पहले और चुनाव के दौरान हिंसा का इतिहास रहा है। पिछले दो सप्ताह में हुई राजनीतिक हिंसा में एक पुलिसकर्मी समेत कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान 200 से अधिक लोग घायल हो गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशव्यापी कार्रवाई में बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर समेत करीब 8,000 विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

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