बांग्लादेश: इस्कॉन मंदिर ने भारत सरकार ने मांगी मदद, कहा-हम अभी भी डरे हुए हैं
नई दिल्ली, 19 मार्च: बांग्लादेश के इस्कॉन राधाकांता मंदिर में गुरुवार रात सांप्रदायिक भीड़ द्वारा हमला किया गया। जिसमें ना सिर्फ मंदिर क्षतिग्रस्त हुआ है, बल्कि मंदिर के कर्मचारी भी घायल हुए हैं।इस हमले के बाद भी मंदिर के सदस्यों के चेहरों पर अभी भी भय व्याप्त है। मंदिर के सदस्यों ने जान को खतरा बताते हुए मामले में भारत सरकार से मदद मांगी है।

इस्कॉन के चिकित्सा अधिकारी और राधाकांत मंदिर में हुई हिंसा के प्रत्यक्षदर्शी रासमणि केशवदास ने कहा कि बांग्लादेश सरकार द्वारा पुलिस सुरक्षा की पेशकश के बावजूद, मंदिर के कर्मचारी अभी भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना पहले से ही उनकी "मदद करने की कोशिश" कर रही है, उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
केशवदास ने एएनआई को बताया कि, पुलिस में शिकायत करने के बाद हमें थोड़ी सुरक्षा दी गई। अभी यहां 10 पुलिसकर्मी तैनात हैं। हालांकि हम अभी भी डरे हुए हैं। आपके माध्यम से हम आपकी सरकार से हमारी मदद करने का अनुरोध करते हैं। हमारी पीएम भी हमारी मदद करने की कोशिश कर रही हैं। हम दोनों प्रधानमंत्रियों से हमारी मदद करने का अनुरोध करते हैं।
केशवदास ने आरोप लगाया कि एक हाजी शफीउल्लाह उन्हें सालों से मंदिर परिसर छोड़ने की धमकी दे रहा था। उन्होंने दावा किया कि शफीउल्लाह के एक सहयोगी इशराफ सूफी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। केशवदास ने कहा, उस दिन इन दोनों [शफीउल्लाह और सूफी] ने 500-600 लोगों के साथ मिलकर मंदिर की दीवार में तोड़फोड़ की। हमारे दो लोगों ने भीड़ को रोकने की कोशिश की तो वे घायल हो गए।
केशवदास ने कहा कि, उन्होंने पुलिस के सामने भी ऐसा ही व्यवहार किया। पुलिस ने उनका समर्थन किया। वे हमारी बात नहीं सुनना चाहते थे। उन्होंने हमें मंदिर छोड़ने के लिए कहा, लेकिन यह हमारा है। दोनों घायलों को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी हालत "थोड़ी बेहतर" बताई गई। पुलिस ने अभी तक इस मामले में गिरफ्तारी नहीं की है। केशवदास ने कहा कि अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और अगर कोई मंदिर के कर्मचारियों से मिलता है तो उन्हे बदले की धमकी देता है।
इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने बताया कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने ढाका में राधाकांत मंदिर के सामने 12 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। उन्होंने कहा, "भारत सरकार पहले ही भारतीय दूतावास को इस मामले को बांग्लादेश सरकार के साथ उठाने का निर्देश दे चुकी है।












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