Bangladesh History: कैसे हुआ बांग्लादेश का जन्म? भारत के PM ने निभाया था अहम रोल, जानें पूरा किस्सा
Bangladesh History: बांग्लादेश में सबसे लंबी पारी खेलने वाली शेख हसीना की सरकार का 5 अगस्त 2024 को पतन हो गया। बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों और हिंसा में बढ़ती मौतों के बीच हसीना को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद देश छोड़कर भागना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, वह थोड़े समय के लिए भारत में रहेंगी।
यह एक छोटा पड़ाव हो सकता है और हसीना यूनाइटेड किंगडम के लिए उड़ान भरेंगी। ऐसे में सभी के जेहन में सवाल उठना लाजिमी है कि बांग्लादेश का जन्म कैसे हुआ? इसमें भारत का क्या रोल था? आइए वनइंडिया आपको बांग्लादेश से जुड़े कुछ इतिहास के पन्ने पलटते हुए सभी सवालों के जवाब से रूबरू करा रहा है...

- 1947: भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान दो भागों में बंट गया-पश्चिम पाकिस्तान (वर्तमान पाकिस्तान) और पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश)।
- 1952: पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली भाषा आंदोलन (भाषा आंदोलन) शुरू हुआ, जिसमें बंगाली भाषा को अधिकार दिलाने की मांग की गई।
- 1966: शेख मुजीबुर रहमान ने छह-सूत्री मांग की, जिसमें पूर्वी पाकिस्तान को अधिक स्वायत्तता देने की मांग थी।
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम
- मार्च 1971: पाकिस्तान के राष्ट्रपति याह्या खान ने पूर्वी पाकिस्तान में शेख मुजीबुर रहमान और उनके अनुयायियों पर कठोर कार्रवाई की, जिससे व्यापक हिंसा और अत्याचार शुरू हो गए।
- 26 मार्च 1971: शेख मुजीबुर रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की, और यह तारीख बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की शुरुआत के रूप में मानी जाती है।
- अप्रैल 1971: भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम को समर्थन देना शुरू किया। उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर में शरणार्थियों के लिए शिविरों की स्थापना की और मुक्ति वाहिनी (स्वतंत्रता सेनानियों) को प्रशिक्षण और समर्थन प्रदान किया।
- 17 अप्रैल 1971: शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठे।
इंदिरा गांधी की भूमिका
अंतरराष्ट्रीय समर्थन:
- मई 1971: इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के उद्देश्य से विभिन्न देशों का दौरा किया। उन्होंने सोवियत संघ, ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका का दौरा किया।
- सितंबर 1971: इंदिरा गांधी ने संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के मुद्दे को उठाया।
सैन्य सहयोग:
- दिसंबर 1971: पाकिस्तान के साथ भारत का युद्ध शुरू हुआ। इंदिरा गांधी ने भारतीय सशस्त्र बलों को पूर्वी पाकिस्तान में प्रवेश करने और मुक्ति वाहिनी के साथ मिलकर लड़ने का आदेश दिया।
युद्ध का परिणाम:
- 16 दिसंबर 1971: भारतीय सशस्त्र बलों और मुक्ति वाहिनी ने ढाका पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया और बांग्लादेश का जन्म हुआ।
युद्ध के बाद
- 1972: बांग्लादेश की पहली सरकार का गठन हुआ, और शेख मुजीबुर रहमान इसके पहले प्रधानमंत्री बने।
- 1972: भारत और बांग्लादेश के बीच मैत्री और सहयोग संधि पर हस्ताक्षर हुए, जो दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध का प्रतीक बनी।
इंदिरा गांधी का योगदान
इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निर्णायक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सक्रिय भूमिका ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता सुनिश्चित की। उन्होंने न केवल सैन्य सहयोग प्रदान किया बल्कि अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद, इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के पुनर्निर्माण और विकास में भी सहायता की।
यह घटना भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसने न केवल बांग्लादेश को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित किया, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों को भी मजबूत किया।
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