बांग्‍लादेश: रंग लाया छात्रों का विरोध, अब सड़क हादसे में मिलेगी मौत की सजा

बांग्‍लादेश की कैबिनेट ने सोमवार को नया कानून बनाया है जिसके तहत उन लोगों की मौत की सजा दी जाएगी जिनकी वजह से सड़क हादसों में किसी की जान गई है। अब यहां पर सड़क हादसों में किसी जान लेने वाले को कम से कम पांच वर्ष की और ज्‍यादा से ज्‍यादा मौत की सजा दी जाएगी।

ढाका। बांग्‍लादेश की कैबिनेट ने सोमवार को नया कानून बनाया है जिसके तहत उन लोगों की मौत की सजा दी जाएगी जिनकी वजह से सड़क हादसों में किसी की जान गई है। अब यहां पर सड़क हादसों में किसी जान लेने वाले को कम से कम पांच वर्ष की और ज्‍यादा से ज्‍यादा मौत की सजा दी जाएगी। बांग्‍लादेश की सड़कों पर पिछले एक हफ्ते से बड़े पैमाने पर छात्रों का प्रदर्शन हो रहा था। 29 जुलाई को राजधानी ढाका में दो किशोरों की मौत उस समय हो गई थी जब एक बस उन्‍हें रौंदती हुई चली गई थी। इन छात्रों की मौत के बाद से पूरा ढाका रुक सा गया था और छात्र सड़कों पर उतर आए थे। जो छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे थे उनमें स्‍कूल और कॉलेज दोनों के छात्र शामिल थे। हजारों छात्र 29 जुलाई से सड़कों पर थे और इनकी मांग थी कि सरकार कानून में बदलाव करे। ये भी पढ़ें-जब नौकरशाही से आजिज पीवी नरसिम्‍हा राव ने यूके से पूछा, 'कैसे काम करता है आपका पीएमओ'

70 लाख की आबादी वाला ढाका भी थम गया

70 लाख की आबादी वाला ढाका भी थम गया

छात्रों ने ढाका की सड़कों को ब्‍लॉक कर दिया था और सिर्फ इमरजेंसी व्‍हीकल्‍स को ही जाने की मंजूरी थी। इस विरोध प्रदर्शन की वजह से छात्रों और सुरक्षाबलों में झड़पे भी हुई थीं। इस विरोध प्रदर्शनक की वजह से बांग्‍लादेश में अमेरिकी राजदूत मरसिाया बेरनीकैट को लेकर जा रहे आधिकारिक गाड़ी पर भी हमला हुआ था। यह हमला हथियारों से लैस कुछ अज्ञात लोगों ने शनिवार को किया था। 29 जुलाई को छात्रों का एक ग्रुप सड़क पर था और तेज रफ्तार से आती बस ने इन छात्रों को टक्‍कर मार दी। बस दो छात्रों दिया खानम और अब्‍दुल करीब राजिब को कुचलती हुई निकल गई जबकि घटना में 12 छात्र घायल हो गए। इस हादसे के लिए जिम्‍मेदार बस ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन घटना के बाद छात्र उग्र हो गए। उनकी मांग थी कि सरकार कड़े सुरक्षा नियमों को लागू करे।

13 वर्ष तक के छात्र थे प्रदर्शन का हिस्‍सा

13 वर्ष तक के छात्र थे प्रदर्शन का हिस्‍सा

बांग्‍लादेश पैंसेजर वेलफेयर एसोसिएशन के मुताबिक पिछले वर्ष सड़क हादसों की वजह से 7,400 लोगों की मौत हो गई थी और 16,000 से ज्‍यादा लोग इसमें घायल थे। बांग्‍लादेश के ट्रांसपोर्ट सेक्‍टर को हमेशा से भ्रष्‍ट माना जाता है। साथ ही इस दुनिया का सबसे अनयिमित और खतरनाक भी करार दिया जा चुका है। जो छात्र प्रदर्शन कर रहे थे उनकी मांग थी कि गैर‍-जिम्‍मेदार तरीके से ड्राइव करने वाले दोषी लोगों को मौत की सजा दी जाए। पिछले हफ्ते से छात्रों ने ट्रैफिक कानूनों को लागू करना शुरू कर दिया था। वे ढाका की सड़कों पर ड्राइवर्स को रोक कर उनके लाइसेंस चेक कर रहे थे। अथॉरिटीज की मानें तो 300 से ज्‍यादा गाड़‍ियों को विरोध प्रदर्शन के दौरान नुकसान पहुंचाया गया। इस विरोध प्रदर्शन में 13 वर्ष के भी छात्र शामिल थे। ये छात्र हर कार और बस ड्राइवर का लाइसेंस चेक कर रहे थे और ये देख रहे थे कि उनकी गाड़‍ियां चलने लायक हैं या नहीं। दो अगस्‍त को एक ट्रैफिक सार्जेंट ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिखाने से मना कर दिया तो छात्रों ने उसकी मोटरसाइकिल को ही आग के हवाले कर दिया।

क्‍या कहता है नया कानून

क्‍या कहता है नया कानून

बांग्‍लादेश में जो नया कानून आया है उसे रोड ट्रांसपोर्ट एक्‍ट 2018 नाम दिया गया है। इस नए कानून के तहत अगर किसी रोड एक्‍सीडेंट में मारे गए व्‍यक्ति की मौत जान-बूझकर की गई हत्‍या का मामला साबित होता है तो फिर दोषी पर केस चलेगा और उसे हत्‍या के संदिग्‍ध के तौर पर ही देखा जाएगा। अब इस दोष को गैर-जमानती करार दिया गया है। जबकि पहले रोड एक्‍सीडेंट में किसी की मौत जमानती आरोप था। यूनाइटेड नेशंस (यूएन) ने भी ढाका में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर चिंता जाहिर की थी। यूएन ने कहा था कि छात्रों और युवाओं के पास यह कानूनी अधिकार है कि वह उन मुद्दों पर आवाज उठाएं जो उन्‍हें परेशान कर रहे हैं।

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