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Bangladesh Opinion Poll: बांग्लादेश में इस पार्टी की बन सकती है सरकार, ओपिनियन पोल से बढ़ी यूनुस की टेंशन

Bangladesh Opinion Poll 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले 13वें आम चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी चरम पर है। कड़ाके की ठंड के बीच जारी ताजा ओपिनियन पोल ने देश के राजनीतिक भविष्य की एक स्पष्ट तस्वीर पेश की है। सर्वे के चौंकाने वाले नतीजों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग के पतन के बाद अब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करती दिख रही है।

करीब 70 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन हासिल कर BNP ने अपने प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी को काफी पीछे छोड़ दिया है। यह चुनाव न केवल बांग्लादेश, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति के लिए निर्णायक साबित होने वाला है।

Bangladesh Opinion Poll

ओपिनियन पोल में BNP की 'सुनामी', जमात बहुत पीछे

एमिनेंस एसोसिएट्स द्वारा कराए गए मेगा सर्वे ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। देश के सभी 300 संसदीय क्षेत्रों में हुए इस पोल के मुताबिक, 70 प्रतिशत जनता BNP के साथ खड़ी है, जबकि कट्टरपंथी विचारधारा वाली जमात-ए-इस्लामी मात्र 19 प्रतिशत पर सिमटती दिख रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि आवामी लीग के पारंपरिक वोट बैंक में भी बड़ी सेंध लगी है। उनके 60 प्रतिशत पुराने समर्थक अब BNP की ओर रुख कर चुके हैं, जो पार्टी की ऐतिहासिक जीत का संकेत है।

तारिक रहमान की ताजपोशी और चुनावी शंखनाद

पार्टी के कार्यवाहक नेता तारिक रहमान के लिए यह समय संजीवनी जैसा है। ओपिनियन पोल के सकारात्मक रुझानों के बीच BNP उन्हें औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की तैयारी पूरी कर चुकी है। महासचिव फखरुल इस्लाम आलमगीर ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही इसकी घोषणा होगी। राजनीतिक विरासत को संभालते हुए तारिक रहमान अपना चुनावी अभियान सिलहट से शुरू करेंगे, जो उनकी मां खालिदा जिया का पारंपरिक गढ़ रहा है। इस कदम को समर्थकों को एकजुट करने के भावनात्मक कार्ड के रूप में देखा जा रहा है।

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छात्र आंदोलन से बनी पार्टी (NCP) का फीका प्रदर्शन

अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार को उखाड़ फेंकने वाले छात्र आंदोलन से भारी उम्मीदें थीं, लेकिन चुनावी मैदान में वे फीकी पड़ती दिख रही हैं। आंदोलन से निकली 'नेशनल सिटिजन्स पार्टी' (NCP) को सर्वे में मात्र 2.6 प्रतिशत लोगों का साथ मिला है। यह नतीजे बताते हैं कि सड़कों पर दिखने वाला जन-आक्रोश हमेशा स्थायी राजनीतिक समर्थन में नहीं बदलता। बांग्लादेश की जनता फिलहाल नए प्रयोगों के बजाय स्थापित और अनुभवी नेतृत्व (BNP) पर अधिक भरोसा जताती नजर आ रही है।

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Bangladesh Election 2026: दक्षिण एशिया के लिए चुनाव के भू-राजनीतिक मायने

बांग्लादेश का यह चुनाव केवल घरेलू बदलाव नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का भी मामला है। शेख हसीना के भारत के साथ करीबी रिश्तों के बाद, अब BNP की संभावित वापसी नई दिल्ली और बीजिंग दोनों के लिए कूटनीतिक चुनौतियां और अवसर लेकर आएगी। आवामी लीग के बिखराव और जमात-ए-इस्लामी की सीमित बढ़त के बीच, 12 फरवरी को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि बांग्लादेश लोकतंत्र की राह पर आगे बढ़ेगा या धार्मिक कट्टरवाद और राजनीतिक अस्थिरता के एक नए दौर में प्रवेश करेगा।

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