बांग्लादेश चुनाव: वोटिंग के दिन अवामी लीग और बीएनपी के बीच हिंसा, 12 की मौत, 10 घायल
ढाका। बांग्लादेश में आज प्रधानमंत्री पद के लिए वोट डाले जा रहे हैं और इस दौरान पोलिंग बूथ पर हिंसा देखने को मिल रही है। बांग्लादेश में रविवार को कई पोलिंग बुथ पर सत्ताधारी अवामी लीग और मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी के बीच हिंसा हुई, जिसमें 12 लोगों की मौत और 10 लोग घायल हुए हैं। बांग्लादेश में 11वें संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग से पहले शेख हसीना अपनी जीत को लेकर आश्वत दिखी और लगातार तीसरी बार सत्ता संभालने का दावा कर रही है। उधर अवामी लीग को सत्ता से बेदखल करने के लिए बीएनपी और जमात-इ-इस्लामी पार्टी ने गठबंधन किया है।

वोटिंग को देखते हुए बांग्लादेश में हर पोलिंग बूथ के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती देखी जा रही है। वहीं, आज देर रात तक सरकार ने इंटरनेट को भी सस्पेंड कर दिया है, ताकि अफवाहों को रोका जा सके। रविवार को ढाका में प्रवेश करने के लिए सिर्फ सरकारी और पत्रकारों के वाहनों को अनुमति मिली है।
बांग्लादेश में चुनाव के दौरान इस बार सबसे ज्यादा अल्पसंख्यकों को डराया और धमकाया गया है। करीब 16 करोड़ हिंदू आबादी वाले बांग्लादेश में पिछले कुछ हफ्तों में हिंदुओं पर अटैक हुए हैं और उनके घरों को आग के हवाले कर वोटिंग से दूर रहने जैसी धमकियां दी है। ज्यादातर हिंदू अवामी लीग सरकार से खुश नहीं है, क्योंकि शेख हसीना के कई सांसदों ने हिंदुओं को परेशान करने के काम किया है। हालांकि, हिंदुओं को लुभाने के लिए शेख हसीना ने 18 हिंदू उम्मीदवारों को टिकट दिया है।
वोटिंग से पहले पीएम शेख हसीना ने ढाका में मीडिया से कहा, 'मुझे विश्वास है कि लोग विकास की गति को जारी रखने के लिए अवामी लीग के पक्ष में वोट डालेंगे। 2009 से पद पर बने रहने के बाद सत्ता विरोधी लहर का सामना करने वाली हसीना अपने देश में हिंसक गतिविधियों को रोकने में नाकाम रही है। अपने कार्यकाल में खालिदा जिया को जेल में डालने से लेकर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अगुवाई वाली जटिया ओकाया फ्रंट (जेओएफ) के बैनर तले एकजुट विपक्ष से कड़ी चुनौती मिल रही है। हसीना को हराने के लिए बांग्लादेश में कई पार्टियों ने हाथ मिलाए हैं।












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