Bangladesh: Muhammad Yunus की विदाई के पीछे ये 4 लोग जिम्मेदार, जानें पर्दे के पीछे कैसे हुआ गेम
Bangladesh Muhammad Yunus: बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार साल भर भी नहीं चल सकी कि फिर एक बार सत्ता परिवर्तन की अटकलें शुरू हो गई हैं। कुछ दिन पहले तक भारत को धमकी देने वाले यूसुफ अब अपने ही देश में बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। उन्होंने इस्तीफा देने की भी बात कही है। हालांकि, बांग्लादेश की राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह पड़ोसी देश एक बार फिर सैन्य तानाशाही के जाल में फंस सकता है। 9 महीने में ही मशहूर अर्थशास्त्री और शिक्षाविद् से राजनेता बने मोहम्मद यूनुस की छवि कैसे बदलती गई और उनका राजनीतिक कद अपने उभार पर पहुंचने से पहले ही खत्म हो गया। उनकी लुटिया डुबोने का काम बांग्लादेश के ही चार कद्दावर लोगों ने की है।
Muhammad Yunus पर्दे के पीछे हो गया खेल
मोहम्मद यूनुस पारंपरिक राजनीतिक हस्ती नहीं है, बल्कि वह अध्यापन और एक्टिविज्म की दुनिया से यहां पहुंचे थे। हालांकि, बांग्लादेश की सत्ता संभालते ही उन्होंने अपना सीधा झुकाव चीन की तरफ जाहिर किया और पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की कोशिश में जुट गए। बांग्लादेश के जन्म से ही हर मुश्किल में साथ देने वाले भारत के हितों को चोट पहुंचाने से भी बाज नहीं आए। भारत के खिलाफ साजिश रचने में व्यस्त यूनुस को पता ही नहीं चला और पर्दे के पीछे उनके साथ बड़ा खेल हो गया। आइए जानते हैं किन 4 लोगों ने यूनुस को बैकफुट पर लाने का काम किया है।

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खलीलुर रहमान
खलीलुर रहमान अंतरिम सरकार में आंतरिक मामलों के सलाहकार हैं। रहमान के लिए फैसलों की वजह से बांग्लादेश में यूनुस सरकार के खिलाफ माहौल बना। रोहिंग्याओं के लिए कॉरिडोर बनाने से लेकर पाकिस्तान की एंट्री ऐसे फैसले थे जिससे सरकार बैकफुट पर आ गई। इन फैसलों को लेकर खुद बांग्लादेश के नागरिकों में भारी आक्रोश पनप गया।
वकर-उज-जमान
वकर-उज-जमान बांग्लादेश के आर्मी चीफ हैं और शेख हसीना को अपदस्थ करने में उनकी बड़ी भूमिका थी। वह मोहम्मद यूनुस के करीबी लोगों में शुमार किए जाते थे, लेकिन सरकार गठन के बाद दोनों के बीच दूरियां आने लगीं। आर्मी चीफ से कुछ ही महीनों में मोहम्मद यूनुस इतना परेशान हो गए कि उन्होंने उनके खिलाफ बड़ा एक्शन लेने की भी कोशिश की। यूनुस ने आर्मी चीफ को हटाने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हुए।
खालिदा जिया
बांग्लादेश की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो खालिदा जिया लंबे समय बाद जेल से निकली हैं। अब वह लंदन से वापस ढाका भी पहुंच गई हैं और किसी भी तरह से सत्ता में अपनी वापसी करना चाहती हैं। खालिदा और उनकी पार्टी दिसंबर से पहले चुनाव कराने के लिए दबाव बना रही है। चारों तरफ से घिरे हुए यूनुस अब खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं और इसलिए खुद ही पद छोड़ने की धमकी देने लगे हैं।
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इशराक
ढाका के मेयर इशराक भी शेख हसीना के सत्ता में रहने के दौरान उनके खास लोगों में शुमार थे। हालांकि, मोहम्मद यूनुस नहीं चाहते थे कि इशराक ढाका के मेयर रहें और उन्होंने उन्हें पद से हटा दिया। इसके खिलाफ इशराक हाई कोर्ट चले गए जहां उन्हें राहत मिली और यूनुस को एक और झटका लगा। इशराक ने यूनुस सरकार के खिलाफ असंतोष को भुनाने का मौका जाने नहीं दिया और ढाका में बड़ी संख्या में लोगों को एकजुट कर सड़कों पर प्रदर्शन कर मोहम्मद यूनुस पर भारी दबाव बनाने में कामयाब रहे।












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