Bangladesh Quota Violence: क्यों हिंसा की आग में धधक रहा बांग्लादेश? अब तक 32 की मौत, जानें हर सवाल का जवाब
Bangladesh Quota Violence: बांग्लादेश में दो सप्ताह से चल रहा आरक्षण विरोधी प्रदर्शन ने गुरुवार को हिंसक रूप ले लिया। छात्रों ने देश के मुख्य सरकारी टीवी चैनल BTV के मुख्यालय में आग लगा दी। लाठी-डंडों और पत्थरों से लैस हजारों छात्रों ने ढाका, चटगांव, रंगपुर और कुमिला सहित बांग्लादेश के विभिन्न शहरों में सशस्त्र पुलिस का सामना किया। हिंसा बढ़ने के बाद भारत समेत अन्य देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी सलाह जारी की है।
डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, तेजी से बिगड़ते हालात के बीच राजधानी ढाका में गुरुवार को पुलिस के साथ झड़प में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई, जिससे मरने वालों की कुल संख्या अब 32 हो गई। एक दिन पहले प्रधानमंत्री शेख हसीना ने झड़पों को शांत करने के लिए इंटरव्यू दिया था। आइए 6 प्वाइंट में समझें गुरुवार को क्या-क्या हुआ?

- सरकारी नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने दंगा पुलिस पर भारी पड़ गए। उन्होंने पुलिस का पीछा करते हुए ढाका में बीटीवी के मुख्यालय तक पहुंच गए और चैनल के रिसेप्शन भवन और कई पार्क किए गए वाहनों में आग लगा दी। कई लोग कार्यालय के अंदर फंस गए थे, लेकिन उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
- गुरुवार को झड़पों में 25 और लोग मारे गए। ढाका और अन्य शहरों में विश्वविद्यालय के छात्र एक सप्ताह से अधिक समय से सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था का विरोध करते हुए रैलियां कर रहे हैं, जिसमें 1971 में पाकिस्तान से देश की आजादी के लिए लड़ने वाले युद्ध नायकों के रिश्तेदारों के लिए आरक्षण भी शामिल है।
- पुलिस प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए रबर की गोलियां, आंसू गैस और शोरगुल वाले ग्रेनेड का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
- हिंसा के कारण राजधानी में मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए। सरकार ने इंटरनेट बंद करने का भी आदेश दिया है। आउटेज मॉनिटर नेटब्लॉक्स ने कहा कि बांग्लादेश में 'लगभग पूरी तरह से इंटरनेट बंद' हो गया है।
- सरकार ने कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए राजधानी सहित पूरे देश में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवानों को तैनात किया है।
- शेख हसीना सरकार ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों को अनिश्चित काल के लिए बंद करने का आदेश दिया है। बुधवार को, प्रधानमंत्री हसीना ने ब्रॉडकास्ट पर आकर प्रदर्शनकारियों की हत्या की निंदा की और कसम खाई कि जिम्मेदार लोगों को उनकी राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना दंडित किया जाएगा। हालांकि, अगले दिन हिंसा और भी बदतर हो गई।
बांग्लादेश में कोटा प्रणाली क्या है?
1972 में देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान ने एक कोटा प्रणाली शुरू की, जिसके तहत 1971 में पाकिस्तान से स्वतंत्रता के लिए लड़े गए युद्ध में लड़ने वाले लोगों के बच्चों और पोते-पोतियों के लिए सरकारी नौकरियों में एक निश्चित प्रतिशत स्थान आरक्षित कर दिया गया। इस प्रणाली के तहत प्रथम और द्वितीय श्रेणी की 44 प्रतिशत सरकारी नौकरियां 'योग्यता' आधारित हैं।
शेष 56 प्रतिशत विशिष्ट समुदायों के लिए आरक्षित हैं। जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों और पोते-पोतियों के लिए 30 प्रतिशत, महिलाओं के लिए 10 प्रतिशत, पिछड़े जिलों के लिए 10 प्रतिशत जिला कोटा, जातीय अल्पसंख्यकों के लिए 5 प्रतिशत, शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए 1 प्रतिशत आरक्षित की जानी थी।
कैसे भड़की हिंसा?
वहीं, देश की हसीना सरकार ने छात्रों के प्रदर्शन के बाद 2018 में ही कोटा सिस्टम खत्म कर दिया था, लेकिन इस साल 5 जून को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फिर से आरक्षण लागू करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि 2018 से पहले जैसे आरक्षण मिलता था, उसे फिर से उसी तरह लागू किया जाए। एक तरफ, सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी कोटा बहाल किया। दूसरी तरफ, छात्रों में रोष व्याप्त हो गया। छात्रों ने 1 जुलाई से प्रदर्शन शुरू कर दिया।
सरकार ने क्या प्रतिक्रिया दी है?
सरकार ने दंगा पुलिस को तैनात किया है, जिसने 16 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सरकार समर्थक छात्र समूह के बीच हिंसक झड़पों के दौरान आंसू गैस छोड़ी और लाठियां चलाईं। बढ़ते तनाव के बीच कई जिलों में अर्धसैनिक बलों को भी तैनात किया गया है। दक्षिण एशियाई देश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच सरकारी नौकरी कोटा प्रणाली के खिलाफ प्रदर्शनकारियों पर हुए हमलों में 15 और 16 जुलाई को 400 से अधिक लोग घायल हो गए, जो अब तक 1000 की संख्या पार कर गया है।
भारतीयों का पलायन शुरू
वहीं, हिंसा को देखते हुए भारतीयों का पलायन शुरू हो चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां फंसे 300 से ज्यादा भारतीय, नेपाली और भूटानी नागरिक मेघालय पहुंचाया गया है।
क्या है छात्रों की मांग?
- आरक्षण 56% से घटाकर 10% किया जाए।
- योग्य उम्मीदवार नहीं मिले तो मेरिट लिस्ट से हो भर्ती।
- सभी उम्मीदवारों के लिए समान परीक्षा हो।
- सभी उम्मीदवारों के लिए उम्र एक समान हो।
- एक बार से ज्यादा आरक्षण का इस्तेमाल न हो।











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