बांग्लादेश की सेना पर किसका कंट्रोल? खालिदा जिया की संभावित ताजपोशी से पहले शीर्ष पदों पर बड़ा उलटफेर
Bangladesh News: बांग्लादेश की सेना के शीर्ष पदों पर मंगलवार को भारी उलटफेर किया गया है। सेना के अधिकारियों की जिम्मेदारी बदले जाने का यह काम बांग्लादेशी राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के संसद भंग करने की घोषणा के बाद किया गया गया है।
ढाका ट्रिब्यून डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को बांग्लादेश की सेना के उच्च पदों पर काफी बदलाव किया गया है। एक मेजर जनरल की छुट्टी कर दी गई है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद सेना का यह कदम काफी चौंकाने वाला लग रहा है।

बांग्लादेश सेना का चौंकाने वाला कदम
शेख हसीना को बहुत ही मुश्किल हालातों में बांग्लादेश छोड़ना पड़ा है और उसके बाद वहां की राजनीति में कई चौंकाने वाले फैसले देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सेना में बड़ा फेरबदल किया गया। हसीना के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ी बात पूर्व प्रधानमंत्री और शेख हसीना की कट्टर विरोधी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की नेता बेगम खालिदा जिया की जेल से रिहाई का फैसला है।
आर्मी चीफ ने ही दी थी शेख हसीना के इस्तीफे की सूचना
खास बात ये है कि शेख हसीना के इस्तीफे की घोषणा भी बांग्लादेश के आर्मी चीफ वकार उज जमान ने ही टेलीविजन पर आकर दी थी और उन्होंने ही कहा था कि वहां एक अंतरिम सरकार का गठन होगा।
बांग्लादेश के सैन्य अफसरों में जो बदलाव हुए हैं, उसकी जानकारी इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशन्स (ISPR) की ओर से एक प्रेस रिलीज जारी करके दी गई है।
मेजर जनरल जियाउल अहसन की छुट्टी
इस फेरबदल में सबसे बड़ा फैसला मेजर जनरल जियाउल अहसन को सेवा से मुक्त करने का लिया गया है। इसके अनुसार जो नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, वह निम्न प्रकार से हैं-
लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद सैफुल आलम- विदेश मामलों का मंत्रालय
लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद मोजिबुर रहमान- जीओसी आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड
लेफ्टिनेंट जनरल तबरेज शम्स चौधरी- क्वार्टरमास्टर जनरल ऑफ द आर्मी
लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर शमीम- चीफ ऑफ जनरल स्टाफ ऑफ द आर्मी
लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद शहीनुल हक- कमांड एनडीसी
मेजर जनरल एएसएम रिदवानुर रहमान- डायरेक्टर जनरल ऑफ नेशनल टेलीकॉम्युनिकेशन मॉनिटरिंग सेंटर (NTMC)
बांग्लादेश में किसने लगाई आग?
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा सिस्टम के खिलाफ यूनिवर्सिटी छात्रों का प्रदर्शन पिछले महीने जुलाई में हिंसक हो गया था। 16-17 जुलाई को इसको लेकर ऐसी हिंसा भड़की की 200 लोग मारे गए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शेख हसीना सरकार की ओर से घोषित 30% कोटा को घटाकर 5% कर दिया और आंदोलन शांत हो गया।
लेकिन, 11 दिन बाद फिर से हिंसा भड़क उठी और 4-5 अगस्त तक ही 170 के करीब लोग और मारे गए। अब इस तरह की रिपोर्ट आ रही हैं कि दूसरी बार जो हिंसा भड़की, उसके पीछे पाकिस्तान और चीन का हाथ हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिंसा भड़काने में पाकिस्तानी आईएसआई ने जमीनी स्तर पर सक्रिय समर्थन दिया और चीन ने इसके लिए फंडिंग की है।












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