ऑस्ट्रेलिया ने भी किया बीजिंग ओलंपिक का डिप्लोमेटिक बहिष्कार, भड़के चीन ने सुनाई 'नदी पहाड़' की कहानी
पिछले लंबे अर्से से ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच मतभेद बना हुआ है और चीन ऑस्ट्रेलिया पर कई तरह के प्रतिबंध लगा चुका है। वहीं, अमेरिका ने भी कहा था कि, मानवाधाकिर उल्लंघन को लेकर वो चुप नहीं रह सकता है।
कैनबरा/वॉशिंगटन, दिसंबर 08: चीन से डायरेक्ट पंगा लेते हुए अमेरिका के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भी बीजिंग ओलंपिक गेम्स का डिप्लोमेटिक बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है। चीन में मानवाधिकारों के हनन के बारे में चिंता जताते हुए बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक में ऑस्ट्रेलिया ने किसी भी राजनयिक को नहीं भेजने का फैसला किया है। जिसके बाद चीन आगबबूला हो गया है।

बीजिंग ओलंपिक का बहिष्कार
बीजिंग ओलंपिक का डिप्लोमेटिक बहिष्कार का ऑस्ट्रेलिया का ये फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति का चीन का बहिष्कार किए जाने के फैसले के बाद लिया गया है और अब माना जा रहा है कि, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बाद कई और देश भी बीजिंग ओलंपिक का डिप्लोमेटिक बहिष्कार सकते हैं। ऑस्ट्रेलियाई प्रसारण निगम (एबीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि, ये कोई आश्चर्यजनक फैसला नहीं है और ऑस्ट्रेलियन राजदूत बीजिंग ओलंपिक का बहिष्कार करेंगे।'' ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री ने कहा कि, चीन में होने वाले बीजिंग ओलंपिक का बहिष्कार करने का फैसला ऑस्ट्रेलिया के लिए फायदेमंद है।

मानवाधिकार पर चीन का बहिष्कार
पिछले लंबे अर्से से ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच मतभेद बना हुआ है और चीन ऑस्ट्रेलिया पर कई तरह के प्रतिबंध लगा चुका है। जिसको लेकर ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि, चूंकी चीन ने ऑस्ट्रेलियाई राजनयिकों पर प्रतिबंध लगा रखा है, लिहाजा ऑस्ट्रेलिया मानवाधिकार के मुद्दों को चीन के सामने में उठाने में असमर्थ रहा है। आपको बता दें कि, ऑस्ट्रेलिया से पहले चीन में होने वाले बीजिंग ओलंपिक का बहिष्कार करते हुए व्हाइट हाउस ने कहा था कि, अमेरिकन खिलाड़ी जरूर बीजिंग ओलंपिक में हिस्सा लेंगे, लेकिन अमेरिकन अधिकारी बीजिंग ओलंपिक का बहिष्कार करेंगे। अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का ये कदम अल्पसंख्यक मुस्लिमों पर अत्याचार रोकने के लिए चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम है।

चीन को अमेरिकी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले महीने कहा था कि, वह चीन में मानवाधिकार की स्थिति का विरोध करने के लिए शीतकालीन ओलंपिक के डिप्लोमेटिक बहिष्कार पर विचार कर रहे हैं। वाशिंगटन का कहना है कि चीन में अल्पसंख्यक मुसलमानों के खिलाफ नरसंहार हो रहा है। हालांकि, अमेरिका अपने खिलाड़ियों को ओलंपिक में हिस्सा लेने से नहीं रोकेगा और शीतकालीन ओलंपिक में अमेरिकी खिलाड़ी भी खेलेंगे। वहीं, साल 2028 में अमेरिका ओलंपिक की मेजबानी करने जा रहा है, लिहाजा सवाल ये उठ रहे हैं कि, आखिर चीन, अमेरिका के खिलाफ प्रतिक्रिया कैसे देगा?

ऑस्ट्रेलिया पर आग-बबूला ड्रैगन
ऑस्ट्रेलिया द्वारा 2022 बीजिंग ओलंपिक के डिप्लोमेटिक बहिष्कार की घोषणा के बाद ऑस्ट्रेलिया में चीनी दूतावास ने इस कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है और कहा कि चीन-ऑस्ट्रेलिया संबंध में सुधार करने की जिम्मेदारी ऑस्ट्रेलिया के पास है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि, "पहाड़ नदी को समुद्र में बहने से नहीं रोक सकते हैं"। बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक में ऑस्ट्रेलिया की सफलता उसके एथलीटों के प्रदर्शन पर निर्भर करती है, न कि अधिकारियों की उपस्थिति पर। ऑस्ट्रेलियाई ओलंपिक समिति (एओसी) ने हालांकि स्पष्ट किया है कि, अगले साल होने वाले बीजिंग ओलंपिक के अमेरिकी डिप्लोमेट के बहिष्कार में शामिल होने के उनकी सरकार के फैसले का शीतकालीन खेलों के लिए एथलीटों की तैयारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।












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