तो इस वजह से अरूण और वरूण ग्रह के हैं दो रंग, वर्षों की मेहनत के बाद वैज्ञानिकों को मिली सफलता
अरूण और वरूण जिनका अंग्रेजी में नाम नेपच्यून और यूरेनस है उनसे जुड़े एक बड़े रहस्य पर वैज्ञानिकों ने पर्दा उठाने में सफलता हासिल कर ली है।
वाशिंगटन, 03 जूनः अरूण और वरूण जिनका अंग्रेजी में नाम नेपच्यून और यूरेनस है उनसे जुड़े एक बड़े रहस्य पर वैज्ञानिकों ने पर्दा उठाने में सफलता हासिल कर ली है। ये दोनों ग्रह आकार, द्रव्यमान और वायुमंडलीय रचनाओं में लगभग एक समान हैं, लेकिन इनके रंग अलग-अलग हैं। अब जाकर वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया है कि इन दोनों ग्रहों के रंग अलग-अलग क्यों हैं?

धुंध के कारण पड़ता है फर्क
वरुण जहां चमकदार नीला दिखाई देता है, वहीं अरुण का रंग सयान यानी कि हल्का नीला है। वैज्ञानियों का कहना है कि अरुण का हल्का नीला रंग उसके वायुमंडल में मौजूद धुंध के कारण है। एक तरफ वरुण जहां स्पष्ट रूप से नीला दिखाई देता है, वहीं अरुण पर सियान की हल्की छाया दिखाई देती है। इस अंतर की वजह का पता लगाने के लिए खगोलविद लंबे समय से प्रयासरत थे और अब जाकर उन्होंने इसका जवाब ढूंढ़ लिया है।

ग्रह के स्थिर वातावरण से बनती है धुंध
एसोसिएशन आफ यूनिवर्सिटीज फार रिसर्च इन एस्ट्रोनामी के शोध के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने एक एकल वायुमंडलीय मॉडल विकसित किया, जो दोनों ग्रहों के अवलोकन से मेल खाता है। दोनों ग्रहों के अध्ययन के लिए जेमिनी नार्थ टेलीस्कोप, नासा इन्फ्रारेड टेलीस्कोप फैसिलिटी और हबल स्पेस टेलीस्कोप का प्रयोग किया गया। इस मॉडल से ज्ञात हुआ कि अरुण ग्रह के सयान रंग की वजह अतिरिक्त धुंध है, जो ग्रह के स्थिर और सुस्त वातावरण से बनती है।

अरुण पर धुंध की परत अधिक मोटी
शोध से पता चला है कि अरुण ग्रह पर मौजूद धुंध की परत वरुण ग्रह की तुलना में काफी अधिक मोटी है। इस वजह से अरुण के रंग में कुछ सफेदी दिखाई देती है। यदि दोनों ग्रहों के वातावरण में धुंध न रहे हो तो अरूण और वरूण दोनों ही लगभग एक ही समान रंग के दिखाई देंगे। अरूण का रंग भी, वरूण ग्रह की तरह गहरा नीला लिए होगा। इस अंतर को अभी तक स्पष्ट नहीं करने की सबसे बड़ी वजह तुलना के लिए डेटा का अभाव थी। प्रत्येक ग्रह के स्पेक्ट्रम के पिछले अध्ययन व्यक्तिगत तरंग दैर्ध्य क्षेत्रों पर आधारित थे।












Click it and Unblock the Notifications