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...जब 64,800 kmph रफ्तार से आ रहा 'काल' 30 KM ऊपर फटा, थर्राई धरती, निकली 35 परमाणु बमों की ऊर्जा

धरती पर लाखों वर्षों से बड़े परिवर्तन के वजह उल्कपिंड रहे हैं। साल 21वीं सदी में एक ऐसी खगोलीय घटना हुई, जिसने पूरी को हिलाकर रख दिया था।

Chelyabinsk crash

धरती पर 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय घटना हुई, जिसकी दहशत हिरोशिमा (Hiroshima) और नागासाकी (Nagasaki) से कई गुना अधिक थी। जपान के इन दोनों शहरों की तुलना में यहां कई गुना ऊर्जा वातावरण में फैली। परिणाम एक भयानक तबाही के रुप में दिखी, जिसमें हजारों लोग घायल हुए, कई मौतें हुईं और बड़ी संख्या में इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। दुनिया में यूरोप की धरती पर होने वाली खगोलीय घटना के कारण ये एक बड़ी तबाही थी।

निकली थी 5000 टन ऊर्जा

निकली थी 5000 टन ऊर्जा

विस्फोट के दो मिनट बाद भूकंप के झटके आए। एस्टेरॉयड (Asteroid) का विस्फोट इतनी जोरदार था, कि उसमे लगभग आधा मेगाटन (5000 टन ) ऊर्जा निकली। शॉकवेव कारण हजारों इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। मकान की खिड़िकयों के कांच टूट गए। टक्कर की तीव्रता के चलते खिड़कियों के कांच काफी ऊंचाई तक हवा में उड़ने लगे। इस घटना से लगभग 1500 लोग घायल हुए।

35 परमाणु बम जितनी तेज विस्फोट

35 परमाणु बम जितनी तेज विस्फोट

जब एस्टेरॉयड पृथ्वी के करीब फटा तो उसकी गति 64,800 किलोमीटर प्रतिघंटा था। ये विस्फोट धरती से करीब 30 किलोमीटर ऊंचाई पर वातावरण में ही हो गया। ये एक अप्रत्याशित घटना था। धरती की ओर कूच कर रहा एस्टेरॉयड अगर पृथ्वी से टकराता भीषण तबाही मच सकती थी। साइंटिस्ट्स के मुताबिक इस विस्फोट में हिरोशिमा में हुए ब्लास्ट की तुलना में करीब 35 गुना ऊर्जा निकली थी।

यहां फटा था एस्टेरॉयड

यहां फटा था एस्टेरॉयड

यह खगोलीय घटना रूस के शहर चेल्याबिंस्क में के ऊपर हुई थी। 2013 में एस्टेरॉयड के फटने से यहां करीब 1500 लोग घायल हुए थे। घटना 5 फरवरी, 2013 को हुई। ये एक ऐसी घटना थी, जिसके किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

गिरा कई टन मलबा

गिरा कई टन मलबा

खगोल शास्त्रियों के अनुसार चेल्याबिंस्क में फटे एस्टेरॉयट का वजन करीब 13,000 टन था। ये 20 मीटर के आकार था। ये पृथ्वी से सीधे टक्कर करने वाला था। लेकिन रूस के यूराल पहाड़ों के ऊपर चट्टान पृथ्वी से 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर वातावरण में ही फट गया। जिस वक्त विस्फोट हुआ एस्टेरॉयड की गति 64,800 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

दशकों बाद होती है ऐसी घटना

दशकों बाद होती है ऐसी घटना

यूरोपियन स्पेस एजेंसी (European Space Agency) मुताबिक इस तरह के उल्कापिंड धरती से करीब 50 से 100 साल में एक बार टकराते हैं। ईएसए के प्लैनेटरी डिफेंस के प्रमुख रिचर्ड मोइसल कहते हैं, "अगर लोगों को आने वाले प्रभाव और इसके अनुमानित प्रभावों का पहले से सटीक जानकारी हो जाए तो एयरबर्स्ट (Air burst) जैसी घटनाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है। घटना से पहले लोगों को खिड़कियों और शीशों से दूर रहने की सलाह दी जा सकेगी"।

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