Artemis-1:चांद पर NASA दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट के साथ जानें किस अंतरिक्ष यात्री को भेज रहा
Artemis-1: NASA is sending astronauts to the moon with the world's most powerful rocket
वाशिंगटन, 29 अगस्त: चंद्रमा पर अपोलो मिशन के तहत आज से 50 साल से भी अधिक समय पहले इंसान ने कदम रखा था। वहीं अब नासा एक बार फिर मनुष्यों को चंद्रमा पर ले जाने के प्रयास में जुट चुका है। इस कोशिश के तहत आज का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि नासा आज चंद्रमा पर इंसान को भेजने का मिशन लॉन्च कर रहा है। इस बार चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति और मंगल की ओर आगे बढ़ने के उद्देश्य से आर्टिमिश मिशन-1 का पहला पार्ट लॉन्च करने के लिए तैयार है। अंतरिक्ष यान चंद्रमा से आगे और पीछे 60,000 किमी जाएगा।

42 दिन के सफर पर जाएगा और फिर लौट आएगा
स्पेस लॉन्च सिस्टम कैनेडी के लॉन्च पैड 39B से दो घंटे की लॉन्च विंडो के दौरान उठेगा जो भारतीय समय के अनुसार 6:00 बजे होगा। दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट चांद से आगे और पीछे जाते हुए 42 दिन के सफर पर जाएगा और फिर लौट आएगा।

जानिए कौन है इस मिशन का अंतरिक्ष यात्री
322 फुट (98 मीटर) स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट नासा द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। हालांकि यह पहला लांच है जिसमें कोई मनुष्य नहीं जाएगा केवल एक कमांडर मूनिकिन कैम्पोस को चांद की सतह पर उतारा जाएगा। त्वरण और कंपन डेटा इकट्ठा करने के लिए एक अंतरिक्ष यात्री यानी astronaut को ले जाएगा।

मूनिकिन कैम्पोस एक पुरुष शरीर के शेप का पुतला है
ये कमांडर मूनिकिन कैम्पोस एक पुरुष शरीर जैसा नजर आने वाला मैनीकिन यानी पुतला है जो पहले ओरियन कंपन परीक्षणों में उपयोग किया जाता था। पुतला उड़ान के दौरान कमांडर की कुर्सी पर वही स्पेससूट पहनेगा जो आर्टेमिस अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की यात्रा के दौरान पहनेंगे।ये पुतला दो विकिरण सेंसर से लैस है और पूरे मिशन में त्वरण और कंपन डेटा रिकॉर्ड करने के लिए इसके हेडरेस्ट के नीचे और इसकी सीट के पीछे अतिरिक्त सेंसर हैं। नासा ने कहा कि डेटा पहले मिशन आर्टेमिस II के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा में मदद करेगा।

अपोलो 13 को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने में निभाएगा प्रमुख भूमिका
पुतले का नाम आर्टुरो कैंपोस (Arturo Campos) के नाम पर रखा गया है। ये अपोलो 13 को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने में एक प्रमुख खिलाड़ी की भूमिका निभाएगा। हालांक पुतला अकेला नहीं है, यह आर्टेमिस-1 के साथ उड़ान भरने वाले तीन यात्रियों में से एक है। नासा दो लेडी बॉडी मॉडल मानव टोरोस भी लॉन्च कर रहा है, जिन्हें फैंटम कहा जाता है, जिन्हें क्रमशः इज़राइल स्पेस एजेंसी और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (डीएलआर) द्वारा "ज़ोहर" और "हेल्गा" नाम दिया गया है।

जानिए कैसे करेगा ये काम
इस लांच के दौरान एक खाली 6 फीट का कैप्सूल जिसे ओरियन कैप्सूल नाम दिया गया है उसे चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा वो उड़ान के दौरान विकिरण डेटा प्रदान करेंगा। पहले मिशन का उद्देश्य चंद्रमा से लगभग 60,000 किलोमीटर दूर ओरियन अंतरिक्ष यान को धकेलना है और गहन अभ्यास की एक सीरीज में वापस जाना है जो अंतरिक्ष यान को स्थापित करेगा जो मनुष्यों को चंद्र कक्षा और सतह में उड़ान भरने के लिए उपयुक्त है।

नासा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को टारगेट कर रहा है
322 फुट (98 मीटर) स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट नासा द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। फॉलो-ऑन आर्टेमिस उड़ान, 2024 की शुरुआत में चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर उड़ते हुए देखेंगे। 2025 में एक लैंडिंग की जा सकती है। नासा चंद्रमा के बेकार पड़े दक्षिणी ध्रुव को टारगेट कर रहा है, जहां स्थायी रूप से छाया वाले क्रेटर को बर्फ रखने के लिए माना जाता है जिसका उपयोग भविष्य के क्रू मेंबर द्वारा किया जा सकता है।












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